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वीजा खत्म होने पर डिटेन हुआ कनाडाई नागरिक, फ्लाइट में बैठने से रोका गया; अस्पताल में मौत l

जयपुर घूमने आए 44 वर्षीय कनाडाई नागरिक रणदीप सिंह का टूरिस्ट वीजा 22 जुलाई को खत्म हो गया था। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रहने की जानकारी मिलने पर जयपुर पुलिस ने उन्हें डिटेन कर अलवर के डिटेंशन सेंटर भेज दिया। परिजनों ने उन्हें कनाडा वापस भेजने के लिए टिकट बुक कराया, लेकिन खराब तबीयत के कारण एयरलाइन ने उन्हें फ्लाइट में बैठाने से इनकार कर दिया। बाद में डिटेंशन सेंटर में डायरिया की शिकायत के बाद उन्हें अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया है और मौत की सटीक वजह रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी

Kashish Rai29 अग. 2026, 04:03 PM IST
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वीजा खत्म होने पर डिटेन हुआ कनाडाई नागरिक, फ्लाइट में बैठने से रोका गया; अस्पताल में मौत l

राजस्थान के जयपुर और अलवर से एक विदेशी नागरिक की मौत का मामला सामने आया है। कनाडा से भारत घूमने आए 44 वर्षीय रणदीप सिंह का वीजा खत्म होने के बाद उन्हें पुलिस ने डिटेन कर लिया था। भारत से कनाडा वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

जयपुर घूमने आए थे रणदीप

रणदीप सिंह कनाडा के रहने वाले थे और टूरिस्ट वीजा पर जयपुर घूमने आए थे। उनके वीजा की वैधता 22 जुलाई को खत्म हो गई थी। वीजा समाप्त होने के बाद भी रणदीप भारत में रुके हुए थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद जयपुर के प्रताप नगर थाना पुलिस ने उन्हें डिटेन किया।पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई के बाद रणदीप को अलवर सेंट्रल जेल परिसर में बने डिटेंशन सेंटर भेज दिया। उन्हें 22 अगस्त को जयपुर से अलवर शिफ्ट किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, विदेशी नागरिक के वीजा ओवरस्टे से जुड़े नियमों के तहत उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया था।

कनाडा भेजने की थी तैयारी

रणदीप के डिटेन किए जाने की जानकारी उनके परिवार को दी गई। इसके बाद परिजनों ने उन्हें भारत से कनाडा वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की। परिवार की ओर से उनके लिए कनाडा की फ्लाइट का टिकट भी बुक कराया गया था। लेकिन जब रणदीप को एयरपोर्ट ले जाया गया, तो एयरलाइंस के कर्मचारियों ने उन्हें फ्लाइट में बैठाने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। एयरलाइन को आशंका थी कि यात्रा के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति और बिगड़ सकती है। इसके बाद रणदीप को वापस डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। परिजनों ने जेल प्रशासन को रणदीप की खराब सेहत के बारे में जानकारी दी। इसके बाद डिटेंशन सेंटर में उनका इलाज शुरू किया गया। कुछ समय बाद उन्हें डायरिया की शिकायत हुई और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।

हालत बिगड़ने पर अस्पताल रेफर

शुरुआत में रणदीप का इलाज डिटेंशन सेंटर परिसर की डिस्पेंसरी में किया गया। जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और स्थिति गंभीर हो गई, तो उन्हें अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में रेफर किया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन बुधवार को इलाज के दौरान रणदीप सिंह ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने उनकी मौत की सूचना परिवार को दी। अधिकारियों के अनुसार, रणदीप को डायरिया की शिकायत थी और इसी वजह से उनकी हालत गंभीर होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम

मामला विदेशी नागरिक की मौत से जुड़ा होने के कारण प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड का गठन किया। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अलवर के सामान्य अस्पताल में रणदीप सिंह के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस डिटेंशन सेंटर में रणदीप के इलाज, उनकी स्वास्थ्य स्थिति, अस्पताल रेफर किए जाने और मौत से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। रणदीप की बहन और जीजा दिल्ली में रहते हैं, जबकि कनाडा से उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य अलवर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

शव दिल्ली ले गए परिजन

परिजनों ने रणदीप सिंह का अंतिम संस्कार दिल्ली में करने की इच्छा जताई। इसके लिए संबंधित दूतावास से अनुमति ली गई। अनुमति मिलने के बाद परिवार के लोग रणदीप का शव लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गए। अलवर के एडिशनल एसपी डॉ. दीपक शर्मा के मुताबिक, रणदीप सिंह को वीजा अवधि से अधिक समय तक भारत में रहने के कारण जयपुर पुलिस ने डिटेन किया था। बाद में उन्हें अलवर के डिटेंशन सेंटर भेजा गया। बीमारी की शिकायत के बाद उनका इलाज कराया गया और हालत गंभीर होने पर अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। इस मामले में डिटेंशन सेंटर की स्वास्थ्य सुविधाओं और इलाज में अपनाई गई प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।