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PM मोदी का जोर: नागरिकों की जरूरत के हिसाब से बदले Governance

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Citizen-Centric Governance को मजबूत करने पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य प्रशासन को अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और प्रभावी बनाना है, ताकि सरकारी सेवाएं नागरिकों तक आसानी से और समय पर पहुंच सकें। इसके लिए Technology, Data, Digital Governance, Skilled Workforce और Ease of Living जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। Mission Karmayogi के जरिए सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने और Public Service Delivery को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

Neha Sharma30 अग. 2026, 02:10 PM IST
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PM मोदी का जोर: नागरिकों की जरूरत के हिसाब से बदले Governance

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी व्यवस्था को अधिक नागरिक-केंद्रित, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती नागरिक आकांक्षाओं के दौर में Governance केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसका लक्ष्य लोगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर सेवाएं और बेहतर जीवन-स्तर सुनिश्चित करना होना चाहिए। यह बात उन्होंने Karmayogi Sādhana Saptah 2026 को संबोधित करते हुए कही थी।


‘नागरिक देवो भव’ पर जोर

प्रधानमंत्री ने Governance के लिए “Nagrik Devo Bhava” के सिद्धांत को रेखांकित किया। उनके मुताबिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका ऐसी होनी चाहिए जिससे Public Service अधिक सक्षम और नागरिकों के प्रति संवेदनशील बने। सरकार का उद्देश्य प्रशासन को इस तरह विकसित करना है कि नागरिकों की जरूरतों और आकांक्षाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्राथमिकता मिले। PM मोदी ने यह भी कहा कि आज का भारत Aspirational India है, जहां नागरिक अपने जीवन और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें रखते हैं। ऐसे में Governance को इन आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायक की भूमिका निभानी चाहिए।


सिर्फ Infrastructure नहीं, Skilled Workforce भी जरूरी

प्रधानमंत्री के अनुसार विकसित भारत के निर्माण के लिए केवल आधुनिक Infrastructure और Technology पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए Skilled, Dedicated और Sensitive Human Resources भी जरूरी हैं। इसी सोच के तहत सरकार Civil Servants और अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को बदलती Technology, Data और नई प्रशासनिक चुनौतियों के अनुसार लगातार सीखने और अपने काम को बेहतर बनाने के लिए तैयार करना है।


Mission Karmayogi की भूमिका

Citizen-centric Governance की इस दिशा में Mission Karmayogi, जिसे National Programme for Civil Services Capacity Building के रूप में लागू किया जा रहा है, महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को केवल नियम-आधारित कामकाज के बजाय Role-based और Competency-driven approach के लिए तैयार करना है। इसके तहत कर्मचारियों की क्षमता, समस्या-समाधान, नेतृत्व, Communication, Digital Governance और अन्य आवश्यक skills को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। Mission Karmayogi के तहत iGOT Karmayogi digital learning platform का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 तक इस platform पर 1.5 करोड़ से अधिक learners registered थे और 8 करोड़ से अधिक course completions दर्ज किए गए थे।


Technology और Data से बेहतर Decision Making

PM मोदी ने Governance में Technology और Data के बेहतर इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि आधुनिक Administrator के लिए Technology और Data की समझ जरूरी है, क्योंकि इससे निर्णय अधिक प्रभावी और तथ्य आधारित बनाए जा सकते हैं। Sādhana Saptah 2026 में भी Technology को प्रमुख विषय बनाया गया था। इसमें Artificial Intelligence, Digital Public Infrastructure, Data-informed Decision Making और Automation जैसे विषयों के माध्यम से Governance को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।


विभागों के बीच बेहतर Coordination पर जोर

सरकार का एक और महत्वपूर्ण लक्ष्य अलग-अलग विभागों के बीच Coordination को बेहतर बनाना है। PM मोदी ने कहा कि Government Departments को अलग-अलग “silos” में काम करने के बजाय whole-of-government approach के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि किसी नागरिक को एक सेवा के लिए अलग-अलग विभागों के बीच अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े और सरकारी योजनाओं का implementation अधिक coordinated तरीके से हो।


Ease of Living को बनाया जा रहा प्रमुख लक्ष्य

Citizen-centric Governance का एक महत्वपूर्ण पहलू Ease of Living है। सरकार के अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंचाना होना चाहिए। इसमें Public Services की पहुंच, समय पर सेवा उपलब्ध कराना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता जैसे पहलू शामिल हैं। PM मोदी ने Quality of Life को Governance का प्रमुख focus बताया है।


Sādhana Saptah 2026 का उद्देश्य

Sādhana Saptah 2026 को Department of Personnel and Training (DoPT), Capacity Building Commission और Karmayogi Bharat के सहयोग से आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य देशभर में Civil Services की क्षमता बढ़ाना और Citizen-centric Governance को मजबूत करना था। इस पहल में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा Civil Services Training Institutions को भी जोड़ा गया।

  • Technology — आधुनिक तकनीक के माध्यम से Governance में सुधार
  • Tradition — भारतीय Knowledge Systems और प्रशासनिक परंपराओं से सीख
  • Tangible Outcomes — सरकारी नीतियों का नागरिकों के जीवन पर दिखाई देने वाला प्रभाव सुनिश्चित करना।

Governance में बदलाव का बड़ा लक्ष्य

सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ऐसा प्रशासन तैयार करना है जो Modern, Responsive, Accountable और Citizen-centric हो। सरकार का मानना है कि संस्थानों की क्षमता मजबूत होने से Public Service Delivery बेहतर होगी और योजनाओं का वास्तविक प्रभाव नागरिकों तक पहुंच सकेगा। यह पहल सरकार के Viksit Bharat 2047 के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ी है। इसके तहत प्रशासनिक व्यवस्था में लगातार Learning, Technology, Innovation और बेहतर Coordination को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।


नागरिक-केंद्रित Governance पर सरकार का जोर प्रशासन को केवल Rule-based System से आगे ले जाकर People-focused Public Service बनाने की दिशा में एक प्रयास है। PM मोदी के संदेश में Technology, Skilled Workforce, Data-based Decision Making, Accountability और Ease of Living को इसके प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया है। हालांकि, इस दृष्टिकोण की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन सुधारों का असर जमीनी स्तर पर सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता, उनकी पहुंच और नागरिकों की समस्याओं के समाधान की गति में कितना दिखाई देता है।