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आरक्षण पर NDA में घमासान, चिराग ने मांझी से मांगा इस्तीफा l

आरक्षण नीति को लेकर NDA के दो सहयोगी दलों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानी HAM के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से इस्तीफे की मांग की है। चिराग ने कहा कि अगर मांझी SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटे के समर्थक हैं, तो उन्हें पहले अपना मंत्री पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग भी की। इसके जवाब में मांझी ने चिराग पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें गरीब और जरूरतमंद लोगों की चिंता नहीं है, तो उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए।

Kashish Rai30 अग. 2026, 02:12 PM IST
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आरक्षण पर NDA में घमासान, चिराग ने मांझी से मांगा इस्तीफा l
आरक्षण के मुद्दे पर बिहार और केंद्र में सत्तारूढ़ NDA के भीतर सहयोगी दलों की खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी यानी LJP रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने ही गठबंधन के सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानी HAM के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विवाद की शुरुआत HAM की ओर से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-कोटा और आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग के बाद हुई। HAM का तर्क है कि SC और ST वर्ग के भीतर भी कुछ समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है।

जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा है कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के सबसे कमजोर और लंबे समय से पिछड़े समुदायों तक पहुंच सके। उनका कहना है कि उनकी पार्टी आरक्षण खत्म करने की मांग नहीं कर रही है, बल्कि आरक्षण के लाभ को अधिक न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने की बात कर रही है। HAM का दावा है कि दलित आरक्षण का लाभ कुछ चुनिंदा समुदायों तक अधिक सीमित रह गया है। पार्टी का मानना है कि पासवान और रविदास जैसे समुदायों को आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत ज्यादा मिला है, जबकि मुशहर समेत कई अन्य दलित समुदाय अब भी शिक्षा, सरकारी नौकरी और प्रशासनिक सेवाओं में पीछे हैं।

जीतन राम मांझी खुद मुशहर समुदाय से आते हैं। संतोष कुमार सुमन ने इसी संदर्भ में दावा किया कि उनके समुदाय से अब तक एक भी व्यक्ति IAS अधिकारी नहीं बन पाया है। HAM का कहना है कि ऐसे समुदायों के लिए आरक्षण के भीतर अलग व्यवस्था की जरूरत है, ताकि आरक्षण का लाभ उन वर्गों तक भी पहुंचे जो लंबे समय से इसका पर्याप्त फायदा नहीं उठा पाए हैं। HAM के इस रुख का चिराग पासवान ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा लागू करने की मांग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर कर सकती है। चिराग के अनुसार, SC आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया है। चिराग पासवान ने कहा कि अगर जीतन राम मांझी आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने या उप-कोटा देने की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें पहले केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन से भी बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा।

चिराग का तर्क है कि जो लोग आरक्षण के लाभार्थियों के भीतर क्रीमी लेयर तय करने की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले खुद आरक्षण से मिलने वाले लाभों को छोड़ने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि SC आरक्षण में उप-कोटा या क्रीमी लेयर लागू करने से दलित समाज के भीतर विभाजन बढ़ सकता है और सामाजिक एकता प्रभावित हो सकती है। चिराग पासवान की पार्टी LJP रामविलास लंबे समय से SC आरक्षण में उप-कोटा और क्रीमी लेयर के विचार का विरोध करती रही है। चिराग का कहना है कि अनुसूचित जाति समाज को एकजुट रखना जरूरी है और आरक्षण व्यवस्था में ऐसा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, जिससे समुदायों के बीच आपसी टकराव बढ़े। दूसरी ओर, जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान के बयान पर पलटवार किया है। मांझी ने कहा कि आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण या अलग हिस्सेदारी की मांग व्यापक जनहित में की जा रही है। उनका कहना है कि यदि कुछ दलित समुदायों को लगातार आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है, तो उनके लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।

मांझी ने चिराग पर गरीब और जरूरतमंद लोगों की चिंता नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि चिराग को गरीबों और पिछड़े समुदायों की समस्याओं की समझ नहीं है और वह आरक्षण के लाभ को अधिक वंचित लोगों तक पहुंचाने के पक्ष में नहीं हैं, तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संतोष कुमार सुमन ने भी चिराग के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि वह गरीब और अति-पिछड़े समुदायों के हित में अपनी बात रख रहे हैं। उनके अनुसार, आरक्षण को खत्म करने का कोई सवाल नहीं है, बल्कि इसके लाभ का न्यायपूर्ण बंटवारा सुनिश्चित करना जरूरी है। मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का 2024 का महत्वपूर्ण फैसला भी है। इस फैसले में राज्यों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी गई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इन वर्गों के भीतर सबसे अधिक पिछड़ी जातियों तक आरक्षण का लाभ पहुंच सके।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद SC और ST वर्ग के भीतर क्रीमी लेयर को लेकर भी बहस तेज हुई। हाल में इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने की मांग की गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि SC और ST वर्ग पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। केंद्र के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में क्रीमी लेयर का प्रावधान OBC वर्ग पर लागू होता है। इस कानूनी और संवैधानिक बहस के बीच बिहार में यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। NDA के दोनों दल केंद्र और बिहार में गठबंधन के सहयोगी हैं। ऐसे में दो केंद्रीय मंत्रियों के बीच सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के इस्तीफे की मांग गठबंधन के भीतर मतभेदों को उजागर करती है। हालांकि, अभी यह विवाद किसी औपचारिक गठबंधन टूटने तक नहीं पहुंचा है, लेकिन आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों दलों के अलग-अलग रुख से बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। आरक्षण के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों के बीच NDA के भीतर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। एक ओर चिराग पासवान SC समाज की एकजुटता और मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रखने की बात कर रहे हैं, वहीं मांझी और HAM आरक्षण के लाभ को सबसे पिछड़े समुदायों तक पहुंचाने के लिए उप-कोटा और समीक्षा की मांग पर कायम हैं।