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प्रतापगढ़ CHC में SDM की बेटी को लगा एक्सपायरी इंजेक्शन, 2 फार्मासिस्ट सस्पेंड l

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में SDM वाचस्पति सिंह की 8 वर्षीय बेटी श्रेयसी सिंह को एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाए जाने का मामला सामने आया है। इंजेक्शन की शीशी पर जून 2026 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। बच्ची पर तत्काल कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा, लेकिन शिकायत के बाद CMO ने दो फार्मासिस्टों को निलंबित कर दिया और अस्पताल का दवा स्टोर सील कर दिया। मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

Kashish Rai30 अग. 2026, 05:57 PM IST
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प्रतापगढ़ CHC में SDM की बेटी को लगा एक्सपायरी इंजेक्शन, 2 फार्मासिस्ट सस्पेंड l
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी CHC में लालगंज के SDM वाचस्पति सिंह की 8 वर्षीय बेटी श्रेयसी सिंह को एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन लगा दिया गया। श्रेयसी को तेज बुखार आने के बाद शुक्रवार को इलाज के लिए लालगंज CHC लाया गया था। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद फार्मासिस्ट ने उसे पैरासिटामोल का इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के बाद जब उसकी शीशी देखी गई, तो उस पर एक्सपायरी डेट जून 2026 दर्ज थी।

एक्सपायरी डेट सामने आने के बाद SDM वाचस्पति सिंह ने मामले पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को इसकी जानकारी दी। SDM ने सवाल उठाया कि जब एक प्रशासनिक अधिकारी की बेटी के इलाज में इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है, तो आम ग्रामीण मरीजों को किस तरह की स्वास्थ्य सुविधा मिल रही होगी। शिकायत मिलने के बाद प्रतापगढ़ के CMO डॉ. एनके प्रसाद ने मामले को गंभीरता से लिया और लालगंज CHC का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल के दवा स्टोर को तत्काल प्रभाव से सील करा दिया, ताकि वहां रखी दवाओं और इंजेक्शनों की जांच की जा सके। प्राथमिक जांच के आधार पर स्टोर प्रभारी फार्मासिस्ट अरविंद कुमार शुक्ला और ड्यूटी पर तैनात फार्मासिस्ट देव कुमार दुबे को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की अवधि में दोनों को उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी ACMO कार्यालय से संबद्ध किया गया है।

निलंबन आदेश के अनुसार, स्टोर प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला पर एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन स्टोर से जारी करने का आरोप है। वहीं, ड्यूटी फार्मासिस्ट देव कुमार दुबे पर इंजेक्शन लगाने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट की जांच नहीं करने का आरोप लगाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विभागीय जांच के लिए समिति गठित की है। जांच में यह देखा जाएगा कि एक्सपायरी इंजेक्शन स्टोर में कैसे रखा हुआ था, उसे जारी करने से पहले उसकी जांच क्यों नहीं की गई और मरीज को इंजेक्शन लगाने से पहले फार्मासिस्ट ने दवा की वैधता की पुष्टि क्यों नहीं की। राहत की बात यह है कि एक्सपायरी इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्ची की तबीयत पर तत्काल कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायरी दवा या इंजेक्शन का इस्तेमाल मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से अस्पतालों में दवाओं के स्टॉक और एक्सपायरी डेट की नियमित जांच जरूरी मानी जाती है।

CMO डॉ. एनके प्रसाद ने बताया कि उन्हें लालगंज CHC में एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन लगाए जाने की सूचना मिली थी। मामले में दो फार्मासिस्टों को निलंबित किया गया है और दवा स्टोर सील कर जांच के आदेश दिए गए हैं। CMO ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ और कड़ी प्रशासनिक तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग यह भी जांच करेगा कि अस्पताल में अन्य एक्सपायरी दवाएं तो मौजूद नहीं थीं। इस घटना के बाद लालगंज CHC में दवाओं के रखरखाव और मरीजों को दवा देने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पतालों में दवाओं को निर्धारित तापमान पर रखना, स्टॉक रजिस्टर अपडेट करना और मरीज को देने से पहले दवा की नाम, मात्रा और एक्सपायरी डेट की जांच करना जरूरी होता है।

परिजनों का कहना है कि यदि इंजेक्शन की शीशी पर दर्ज तारीख पर नजर नहीं पड़ती, तो गंभीर परिणाम हो सकते थे। उनका सवाल है कि स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले आम मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की नियमित जांच किस तरह की जाती है। पुलिस कार्रवाई के बजाय फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक जांच शुरू की है। जांच समिति स्टोर और डिस्पेंसरी में मौजूद दवाओं का रिकॉर्ड देखेगी। साथ ही, संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जाएगा कि लापरवाही केवल एक इंजेक्शन तक सीमित थी या अस्पताल की दवा व्यवस्था में व्यापक खामी है। मामले में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों फार्मासिस्टों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच में जानबूझकर लापरवाही या नियमों की अनदेखी साबित होती है, तो उनके खिलाफ आगे कठोर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल श्रेयसी सिंह की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसकी निगरानी की गई है। दवा स्टोर सील होने के बाद अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।