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“भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए” सोचने वाला हिंदू नहीं रह सकता: न्यूयॉर्क में मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘One World, One Humanity’ Faith Leaders’ Conference में धार्मिक सद्भाव और विविधता पर जोर देते हुए कहा कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व किसी समुदाय को भारत से बाहर करने की विचारधारा नहीं है और हर इंसान की गरिमा समान है।

Kalpana Gautam30 अग. 2026, 05:57 PM IST
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“भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए” सोचने वाला हिंदू नहीं रह सकता: न्यूयॉर्क में मोहन भागवत
न्यूयॉर्क में भागवत का बड़ा बयान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘One World, One Humanity’ Faith Leaders’ Conference में भारत की धार्मिक विविधता और मानवता की एकता पर जोर दिया। अपने संबोधन के दौरान भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने इसे हिंदुत्व की अपनी व्याख्या से जोड़ते हुए कहा कि हिंदू होने का अर्थ सभी मनुष्यों की गरिमा को स्वीकार करना है। भागवत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वयं को हिंदू कहता है, तो उसे यह मानना होगा कि अलग-अलग धार्मिक रास्ते एक ही अंतिम लक्ष्य की ओर ले जा सकते हैं और सभी मनुष्यों में मूलभूत रूप से कोई भेद नहीं है।

2018 की घटना का किया जिक्र
RSS प्रमुख ने अपने बयान के समर्थन में वर्ष 2018 में दिल्ली में आयोजित अपनी व्याख्यान श्रृंखला का जिक्र किया। भागवत के अनुसार, उस कार्यक्रम में मौजूद कुछ मुस्लिम लोगों ने उनसे पूछा था कि RSS हिंदू राष्ट्र की बात करता है, तो मुसलमानों का क्या होगा और क्या उन्हें भारत से बाहर कर दिया जाएगा। भागवत ने बताया कि उन्होंने तब जवाब दिया था—“नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है।” इसके बाद उन्होंने कहा था कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं रह सकता।

“धर्म अलग हो सकते हैं, मानवता एक है”
अपने न्यूयॉर्क संबोधन में भागवत ने भारत की पारंपरिक सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मों के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य एक है, हालांकि अलग-अलग लोग और धार्मिक परंपराएं उसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करती हैं। भागवत ने भारत की विविधता को देश की विशेषता बताते हुए कहा कि विविधता को स्वीकार, सम्मान और संरक्षित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विविधता मानवता की एकता को खत्म नहीं करती, बल्कि उसे सजाती है।

RSS के सेवा कार्यों का भी किया उल्लेख
भागवत ने RSS के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संगठन जरूरतमंद लोगों की मदद करते समय धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। उन्होंने RSS के स्वयंसेवकों द्वारा चलाए जा रहे करीब 1.30 लाख सेवा प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र किया। उन्होंने हरियाणा में हुई एक विमान दुर्घटना के बाद स्वयंसेवकों द्वारा राहत और अंतिम संस्कार में मदद किए जाने की घटना का उदाहरण दिया। 

बयान के समय न्यूयॉर्क में RSS कार्यक्रम को लेकर विवाद
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया जब न्यूयॉर्क में RSS से जुड़े कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद भी चल रहा था। न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने कार्यक्रम से पहले RSS की विचारधारा को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि वह आयोजन का समर्थन नहीं करते। दूसरी ओर, कार्यक्रम के आयोजकों ने इसे अंतरधार्मिक संवाद, एकता और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम बताया था।