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UP Board का बड़ा नियम: 10वीं की मार्कशीट में जन्मतिथि बदलना अब आसान नहीं

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने हाईस्कूल के विद्यार्थियों की जन्मतिथि को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। अब 10वीं की मार्कशीट में जन्मतिथि दर्ज करते समय छात्र के स्कूल में पहली बार प्रवेश के वक्त जमा किए गए वैध आयु प्रमाण को आधार बनाया जाएगा। इससे जन्मतिथि में बार-बार बदलाव और रिकॉर्ड में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।

sd30 अग. 2026, 07:04 PM IST
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UP Board का बड़ा नियम: 10वीं की मार्कशीट में जन्मतिथि बदलना अब आसान नहीं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने हाईस्कूल की मार्कशीट और प्रमाणपत्र में दर्ज होने वाली जन्मतिथि को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत विद्यार्थियों की जन्मतिथि दर्ज करने में शुरुआती स्कूल रिकॉर्ड को प्राथमिक आधार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य बाद में जन्मतिथि में बदलाव को लेकर होने वाले विवादों और अनियमितताओं को रोकना है। परिषद के निर्देश के अनुसार, विद्यार्थी के विद्यालय में पहली बार प्रवेश के समय जो वैध आयु या जन्मतिथि प्रमाण प्रस्तुत किया गया था, उसी के आधार पर स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि दर्ज की जानी चाहिए। इसके बाद इसी रिकॉर्ड का उपयोग आगे की शैक्षणिक प्रक्रियाओं में किया जाएगा।

पहली बार प्रवेश के समय देना होगा सही दस्तावेज

नए नियमों के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए स्कूल में पहली बार दाखिला लेते समय जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज सही देना बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगा। जन्म प्रमाणपत्र समेत निर्धारित वैध दस्तावेजों के आधार पर विद्यार्थी का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यदि जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है, तो नियमों के तहत स्वीकार्य अन्य दस्तावेजों के आधार पर आयु और जन्मतिथि दर्ज की जा सकती है। स्कूलों को भी रिकॉर्ड तैयार करते समय दस्तावेजों की जांच करने और सही जानकारी दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गई है।

10वीं के समय बदलाव कराने की प्रक्रिया होगी सख्त

अब हाईस्कूल परीक्षा के समय या मार्कशीट जारी होने के बाद जन्मतिथि में बदलाव कराने के लिए केवल दावा करना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित विद्यार्थी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। परिषद की व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र की जन्मतिथि शुरुआत से ही प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर दर्ज हो। इससे अलग-अलग दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि होने की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।

स्कूल रिकॉर्ड में गलती की गुंजाइश कम करने पर जोर

UP Board की ओर से विद्यार्थियों के विवरण को अंतिम रूप से दर्ज करने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करने पर भी जोर दिया गया है। नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में गलती होने पर बाद में सुधार की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि स्कूल में प्रवेश से लेकर बोर्ड पंजीकरण तक सभी दस्तावेजों में दर्ज जानकारी को ध्यान से जांचें।

छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?

नए नियमों का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ेगा जो बाद में अपनी जन्मतिथि बदलवाने का प्रयास करते हैं। अब स्कूल में पहली बार दर्ज की गई जन्मतिथि और उसके समर्थन में मौजूद वैध दस्तावेजों को अधिक महत्व दिया जाएगा। इस व्यवस्था से UP Board के रिकॉर्ड में जन्मतिथि को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने और गलत या बार-बार किए जाने वाले संशोधनों को रोकने की कोशिश की जा रही है। इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी है कि पहली बार स्कूल में प्रवेश के समय ही जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेज सही और प्रमाणिक रूप में जमा करें।