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अगस्त में Foreign Investors ने लगाए ₹30,919 करोड़, भारतीय शेयर बाजार को मिला सपोर्ट

Foreign Portfolio Investors (FPI) ने अगस्त 2026 में भारतीय Stock Market में ₹30,919 करोड़ का निवेश किया। यह लगातार दूसरा महीना है जब विदेशी निवेशक भारतीय Equities में Net Buyer रहे। जुलाई में भी करीब ₹20,200 करोड़ की खरीदारी हुई थी। विदेशी निवेशकों की बढ़ती खरीदारी को Indian Market और Economy पर बढ़ते Global Investor Confidence के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

Neha Sharma30 अग. 2026, 07:06 PM IST
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अगस्त में Foreign Investors ने लगाए ₹30,919 करोड़, भारतीय शेयर बाजार को मिला सपोर्ट

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अगस्त 2026 में भारतीय शेयर बाजार में ₹30,919 करोड़ का निवेश किया है। इसके साथ ही विदेशी निवेशक लगातार दूसरे महीने भारतीय इक्विटी में नेट खरीदार बने हैं। जुलाई में भी FPIs ने करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब इससे पहले लगातार चार महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से बड़ी रकम निकाली थी।


चार महीने की बिकवाली के बाद बदला रुख

विदेशी निवेशकों के लिए 2026 का पहला हिस्सा भारतीय बाजार में बिकवाली वाला रहा था। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में FPIs ने करीब ₹1.17 लाख करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़ और जून में ₹49,340 करोड़ की निकासी की थी। इसके बाद जुलाई में विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर खरीदारी शुरू की और ₹20,200 करोड़ भारतीय इक्विटी में लगाए। अगस्त में निवेश बढ़कर ₹30,919 करोड़ पहुंचना विदेशी निवेशकों के रुख में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।


क्यों बढ़ा विदेशी निवेशकों का भरोसा?

रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय कंपनियों के बेहतर कॉरपोरेट अर्निंग्स, देश की मजबूत आर्थिक गतिविधियों और रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ कमी आने से भी निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी के पीछे भारतीय बाजार में मौजूद अपेक्षाकृत आकर्षक वैल्यूएशन और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे भी अहम कारण रहे हैं। अगस्त के पहले पखवाड़े में ही FPIs ने भारतीय इक्विटी में ₹16,621 करोड़ का निवेश कर दिया था।


अभी भी 2026 में विदेशी निवेशक नेट सेलर

हालांकि अगस्त और जुलाई की खरीदारी से तस्वीर सुधरी है, लेकिन पूरे 2026 कैलेंडर ईयर में विदेशी निवेशक अभी भी भारतीय इक्विटी में नेट सेलर बने हुए हैं। यानी पिछले कुछ महीनों में हुई भारी बिकवाली की तुलना में हालिया खरीदारी अभी उस कमी को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाई है।


घरेलू निवेशकों की भूमिका भी अहम

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है, विदेशी और घरेलू दोनों संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे भी विदेशी निवेश के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।


बाजार के लिए क्या संकेत?

अगस्त में ₹30,919 करोड़ का FPI निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। लगातार दूसरे महीने विदेशी निवेशकों की खरीदारी यह बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक वापस आया है। फिर भी बाजार में आगे की दिशा केवल FPI निवेश पर निर्भर नहीं करेगी। वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल, रुपये और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों समेत कई कारक बाजार की चाल तय करेंगे।