general

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 788 मौतें; 2,500 से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में भीषण Flash Flood और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 30 अगस्त तक नेपाल पुलिस के अनुसार 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। कई सड़कें, पुल और Hydropower Projects क्षतिग्रस्त हुए हैं। खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के बीच Rescue Operation जारी है। भारत समेत कई देशों ने नेपाल के लिए Relief and Rescue Assistance बढ़ाई है।

Neha Sharma31 अग. 2026, 04:44 PM IST
खबर शेयर करें:
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 788 मौतें; 2,500 से ज्यादा लोग लापता

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। रविवार, 30 अगस्त को नेपाल पुलिस के मुताबिक देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान पांचवें दिन भी जारी है। लगातार खराब मौसम, मुश्किल पहाड़ी इलाकों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।


ग्लेशियर और मलबे के सैलाब से शुरू हुई तबाही

यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद बड़े पैमाने पर बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ पानी नीचे की ओर आने से शुरू हुई। अचानक आए इस मलबे वाले सैलाब ने नदियों के किनारे बसे गांवों और कस्बों को प्रभावित किया। बाढ़ का सबसे गंभीर असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में देखने को मिला। कई जगह सड़कें और पुल बह गए, जिससे प्रभावित इलाकों का दूसरे हिस्सों से संपर्क टूट गया। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।


हजारों लोग अभी भी लापता

बचाव अभियान के बावजूद लापता लोगों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। नेपाल के अलग-अलग प्रभावित जिलों में मलबे और नदी किनारे तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर चिंता बनी हुई है। नेपाल के नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 537 कर्मचारी और कामगार अभी भी लापता बताए गए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इन परियोजनाओं से जुड़े 898 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी।


खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधाओं में खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक स्थिति शामिल है। कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। हेलीकॉप्टर के जरिए भी राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मौसम की स्थिति के कारण हवाई अभियान प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने कुछ इलाकों में फिर से बाढ़ आने की चेतावनी भी जारी की है। खासकर भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास के लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।


शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

आपदा के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने से उनकी पहचान और सुरक्षित रखे जाने की चुनौती भी सामने आई है। कई शवों की पहचान तुरंत नहीं हो पा रही है। इसी वजह से नेपाल में कुछ अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकारियों ने डीएनए सैंपल जुटाने शुरू किए हैं ताकि बाद में शवों की पहचान की जा सके। भारत और चीन की फोरेंसिक टीमें भी इस प्रक्रिया में सहायता कर रही हैं।


भारत ने बढ़ाई मदद

नेपाल की इस आपदा के बीच भारत ने राहत और बचाव सहायता बढ़ा दी है। भारत की ओर से राहत सामग्री के साथ मेडिकल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें भेजी गई हैं। रविवार को भारत का चौथा राहत विमान 11 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। भारत अब तक नेपाल को करीब 68.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। भारतीय फोरेंसिक टीम डीएनए सैंपल की जांच और मृतकों की पहचान में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रही है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में फंसे 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारतीय अधिकारियों की ओर से प्रभावित भारतीय नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया भी जारी है।


WHO और अमेरिका ने भी दी सहायता

आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल को मदद मिल रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपात स्वास्थ्य जरूरतों के लिए 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता जारी की है। वहीं अमेरिका ने नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 36 लाख डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इस सहायता में प्रभावित परिवारों के लिए जरूरी खाद्य और राहत सामग्री शामिल है।


90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

इस प्राकृतिक आपदा से नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आबादी प्रभावित हुई है। पहले की रिपोर्टों के मुताबिक करीब 93,000 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के घर और आजीविका के साधन प्रभावित हुए हैं, जबकि सड़क, पुल, बिजली और जलविद्युत जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है।


नेपाल के सामने अब राहत के साथ पुनर्वास की चुनौती

फिलहाल नेपाल की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज, प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाना तथा क्षतिग्रस्त इलाकों में संपर्क बहाल करना है। हालांकि, बचाव अभियान पूरा होने के बाद नेपाल के सामने पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती होगी। बाढ़ से प्रभावित सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और अस्थिर पहाड़ी इलाकों से जुड़े जोखिमों की बेहतर निगरानी और सीमा-पार आपदा सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होगा।


लगातार बदल रहा है आंकड़ा

नेपाल में बचाव अभियान अभी जारी है और कई इलाकों तक टीमें पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा आगे भी बदल सकता है। 30 अगस्त की दोपहर नेपाल पुलिस ने 788 मौतों और 2,502 लापता लोगों का आंकड़ा बताया था।