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पेट्रोल में कितना एथेनॉल? पंप की नोजल और बिल पर जानकारी की मांग वाली याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार

पेट्रोल पंप पर गाड़ी की टंकी फुल कराने के बाद हाथ में आने वाली रसीद अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—आपने जो पेट्रोल खरीदा, उसमें आखिर कितना एथेनॉल मिला था? इसी ‘जानने के अधिकार’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर सोमवार को कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने नोजल और पेट्रोल बिल पर एथेनॉल का प्रतिशत लिखने की मांग की थी। E20 को लेकर पहले से जारी राजनीतिक घमासान के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट जाने की छूट दी है।

Sonali31 अग. 2026, 04:47 PM IST
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पेट्रोल में कितना एथेनॉल? पंप की नोजल और बिल पर जानकारी की मांग वाली याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली: 

पेट्रोल पंप पर गाड़ी में पेट्रोल भरवाते वक्त क्या उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार है कि उस पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला है? यह सवाल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस एम.एम. सुंदररेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी को अपनी शिकायतों के लिए संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी। याचिका में मांग की गई थी कि पेट्रोल पंपों पर dispensing nozzle के पास पेट्रोल में मिले एथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। साथ ही उपभोक्ता को दिए जाने वाले fuel bill और receipt पर भी एथेनॉल की मात्रा दर्ज करना अनिवार्य किया जाए।

'मुझे जानने का अधिकार है कि मैं क्या खरीद रहा हूं'

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एन.के. गोस्वामी ने उपभोक्ता के 'Right to Know' का मुद्दा उठाया। उन्होंने कोर्ट के सामने पेट्रोल की रसीद का हवाला देते हुए कहा कि उसमें एथेनॉल की मात्रा का कोई उल्लेख नहीं होता। गोस्वामी ने कहा कि जब कोई नागरिक पेट्रोल खरीदता है तो उसे यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि वह वास्तव में किस composition का ईंधन खरीद रहा है। उन्होंने E20 कार्यक्रम को लेकर पहले सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही का भी हवाला दिया और अटॉर्नी जनरल की कथित 'experiment' टिप्पणी का मुद्दा उठाया। याचिकाकर्ता ने केंद्र से इस मामले में स्पष्टता और आश्वासन की मांग की।

अटॉर्नी जनरल ने याचिका को बताया 'Proxy Petition'

सुनवाई के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल ने याचिका के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता भारत सरकार को अपने प्रति जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इस पर गोस्वामी ने जवाब दिया कि मांग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि भारत के नागरिकों के अधिकारों से संबंधित है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खरीद रहे हैं। अटॉर्नी जनरल ने याचिका को 'proxy petition' बताया और यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले इसी तरह की याचिका को खारिज कर चुका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को entertain करने से इनकार कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दे दी।

सिर्फ एथेनॉल प्रतिशत नहीं, E20 पर विशेषज्ञ समिति की भी मांग

याचिका में केवल पेट्रोल पंप की नोजल और बिल पर ethanol percentage लिखने की मांग नहीं की गई थी। याचिकाकर्ता ने E20 कार्यक्रम के प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कराने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की थी।

याचिका में प्रमुख मांगें थीं:

  • पेट्रोल पंप की dispensing nozzle पर ethanol percentage स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।

  • प्रत्येक fuel bill और receipt पर ethanol content दर्ज किया जाए।

  • वाहन के manufacturer, model, engine और manufacturing year के आधार पर ethanol compatibility की जानकारी देने वाला सार्वजनिक database बनाया जाए।

  • E20 के पुराने वाहनों पर प्रभाव का अध्ययन किया जाए।

  • fuel efficiency और mileage पर पड़ने वाले असर की जांच हो।

  • engine life और maintenance cost का अध्ययन किया जाए।

  • warranty और insurance पर E20 के संभावित प्रभावों की समीक्षा हो।

  • E20 के environmental impact और ethanol production में water consumption का अध्ययन किया जाए।

  • food security पर ethanol production के संभावित प्रभावों की समीक्षा की जाए।

  • पुराने वाहनों के लिए transition framework तैयार किया जाए।

E20 को लेकर देश में पहले से राजनीतिक घमासान

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला ऐसे समय आया है जब E20 पेट्रोल को लेकर देश में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 नीति पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि E20 से वाहनों का mileage प्रभावित हो रहा है और इंजन को लेकर भी लोगों में चिंता है। उन्होंने उपभोक्ताओं को E10, E20 और दूसरे fuel options उपलब्ध कराने की मांग की है। केजरीवाल ने अगस्त में गोवा में E20 के खिलाफ टाउनहॉल भी किया था और इस मुद्दे पर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की। उन्होंने E20 नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी E20 नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीति लागू करने से पहले पर्याप्त consultation होना चाहिए था। उनका तर्क रहा कि जब सरकार से जुड़े data और अध्ययन अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं, तब वाहन मालिकों से नुकसान साबित करने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।

नितिन गडकरी ने E20 का किया बचाव

दूसरी तरफ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 नीति का बचाव किया है। उन्होंने E20 से वाहन खराब होने के दावों पर आलोचकों से इसका प्रमाण पेश करने को कहा। सरकार का पक्ष है कि ethanol blending से कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों के लिए घरेलू ethanol market को मजबूत करने में मदद मिलती है।

हरदीप पुरी ने भी किया E20 का समर्थन

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी ethanol-blended fuel का बचाव किया है। उन्होंने E20 के संदर्भ में कहा कि ethanol आधारित fuel का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रों में भी होता है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया है कि ethanol blending से fuel efficiency में कुछ कमी हो सकती है। सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में यह भी कहा गया है कि 2023 से पहले बने वाहनों में E20 के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर engine failure या breakdown होने का कोई verified evidence सामने नहीं आया है।

Chief Economic Adviser ने E10 का विकल्प सुझाया

E20 विवाद के बीच Chief Economic Adviser वी. अनंथा नागेश्वरन ने अगस्त में कम ethanol-blend वाले fuel, जैसे E10, को दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि भारत में बड़ी संख्या में पुराने वाहन मौजूद हैं और ऐसे वाहनों को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं को विकल्प देना व्यावहारिक हो सकता है। यह सुझाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे E20 बहस का केंद्र केवल 'E20 सही या गलत' से हटकर consumer choice और पुराने वाहनों के transition की ओर जाता है।

ऑटो इंडस्ट्री में भी E20 को लेकर चिंता

E20 विवाद में automobile industry से जुड़े कुछ concerns भी सामने आए हैं। कुछ fuel samples में chloride और moisture contamination को लेकर automobile companies की ओर से चिंता जताए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि, industry body SIAM ने बाद में इस मुद्दे पर अपनी शिकायत वापस लेते हुए कहा कि sample size पर्याप्त नहीं था और आगे validation की आवश्यकता थी। इसलिए E20 से engine damage या बड़े पैमाने पर mechanical failure को स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना फिलहाल उचित नहीं होगा। इस मुद्दे पर सरकार, automobile industry और आलोचकों के दावे अलग-अलग हैं।

जनता के बीच भी E20 को लेकर मतभेद

E20 को लेकर किए गए एक C-Voter सर्वे में भी उपभोक्ताओं की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं दिखी। सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने E20 के बजाय दूसरे fuel options उपलब्ध कराने का समर्थन किया। यही वजह है कि मौजूदा याचिका में भी consumer disclosure और fuel choice पर जोर दिया गया था।

E20 आखिर है क्या?

E20 का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें अधिकतम 20 प्रतिशत तक ethanol blend किया जाता है। भारत में ethanol blending programme का उद्देश्य मुख्य रूप से imported crude oil पर निर्भरता कम करना, energy security मजबूत करना और घरेलू ethanol production को बढ़ावा देना है। लेकिन इसके साथ पुराने वाहनों की compatibility, mileage, engine components, maintenance और consumer choice जैसे सवाल लगातार उठते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या है?

31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदररेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने याचिका को entertain करने से इनकार कर दिया। हालांकि, पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट में अपनी शिकायतें और मांगें उठाने की स्वतंत्रता दे दी। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह तय नहीं किया कि पेट्रोल पंपों पर ethanol percentage बताना उपभोक्ता का कानूनी अधिकार है या नहीं। कोर्ट ने केवल मौजूदा याचिका को सुनने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को उचित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता खुला रखा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

अगर भविष्य में किसी हाईकोर्ट या सक्षम प्राधिकरण द्वारा याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार की जाती है, तो पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली जानकारी में बड़ा बदलाव आ सकता है। पेट्रोल भरवाते समय उपभोक्ता को यह पता चल सकेगा कि ईंधन में ethanol का कितना blend है और receipt पर भी उसका विवरण दर्ज हो सकता है।

फिलहाल, 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट कार्यवाही के बाद यह मुद्दा संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष आगे बढ़ सकता है।