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Goa Nightclub Fire: 25 मौतों के आरोपी क्लब मालिकों को Supreme Court से भी राहत नहीं, Bombay HC का Bail Cancellation बरकरार

25 जिंदगियां एक रात में बुझ गईं… Goa के Birch by Romeo Lane nightclub में लगी उस भीषण आग ने सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ा नहीं, बल्कि क्लब की fire safety, लाइसेंस और कथित लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अब इसी मामले में क्लब के तीन सह-मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। Supreme Court ने Bombay High Court के bail cancellation order में दखल देने से इनकार करते हुए सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दो हफ्ते के भीतर surrender करने का निर्देश दिया है। यानी 25 मौतों वाले इस मामले में अब bail की लड़ाई के बाद नजरें सीधे trial और आरोप तय होने की प्रक्रिया पर टिक गई हैं।

Sonali31 अग. 2026, 04:48 PM IST
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Goa Nightclub Fire: 25 मौतों के आरोपी क्लब मालिकों को Supreme Court से भी राहत नहीं, Bombay HC का Bail Cancellation बरकरार

गोवा के बहुचर्चित Birch by Romeo Lane नाइटक्लब अग्निकांड मामले में क्लब के तीन सह-मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 25 लोगों की जान लेने वाले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की जमानत रद्द कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।

SC में आज क्या हुआ?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने तीनों आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के जमानत रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा। लूथरा भाइयों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अजय गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान पेश हुए। सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि लूथरा भाइयों की ओर से ऐसा कोई प्रत्यक्ष कृत्य नहीं था, जिससे 25 लोगों की मौत हुई हो। उन्होंने IPC की धारा 304 Part II के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और तर्क दिया कि अधिकतम मामला लापरवाही से मौत का हो सकता है। दवे ने यह भी कहा कि अगर हाईकोर्ट को आरोपियों की निगरानी, जांच अधिकारी के सामने नियमित उपस्थिति या यात्रा संबंधी शर्तों को लेकर चिंता थी तो ऐसी शर्तें लगाई जा सकती थीं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत बहाल करने से इनकार कर दिया।

Bombay HC ने 18 अगस्त को क्यों रद्द की थी Bail?

इस मामले में अहम मोड़ 18 अगस्त 2026 को आया था। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच की जस्टिस डॉ. नीला गोखले ने सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को मिली जमानत रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि Sessions Court ने जमानत देते समय जांच के दौरान सामने आए material और अपराध की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि निचली अदालत ने अपने discretionary power का उचित इस्तेमाल नहीं किया था। हाईकोर्ट ने Sessions Court की उस reasoning पर भी सवाल उठाया था, जिसमें अपराध को murder या dacoity जैसे अपराधों की तुलना में कम गंभीर माना गया था।

Court के सामने सामने आए Fire Safety के गंभीर सवाल

Bombay HC के आदेश में जांच के दौरान सामने आए कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख हुआ।

अदालत के सामने रखे material के अनुसार क्लब में कथित तौर पर पर्याप्त fire-safety व्यवस्था नहीं थी। गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने soundproof glass लगाए जाने, कर्मचारियों को fire emergency से निपटने की पर्याप्त training नहीं दिए जाने और fire extinguishers जैसी व्यवस्था की कमी का उल्लेख किया।

अदालत ने यह भी नोट किया कि kitchen की ओर emergency exit नहीं था। कोर्ट ने कहा कि अगर restaurant के पास वैध licences होते तो fire-safety regulations के तहत आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन करना पड़ता। हालांकि इन आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों का अंतिम परीक्षण ट्रायल के दौरान होना बाकी है।

Emergency Exit को लेकर Chargesheet में क्या कहा गया?

इस मामले की chargesheet में emergency exit को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार prosecution का आरोप है कि club management को blocked/locked emergency exit की जानकारी थी। यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आग लगने के बाद लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने की क्षमता पर ही गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी तरह nightclub की संरचना, fire-safety compliance और evacuation arrangements भी जांच के प्रमुख विषय रहे हैं।

Fire Show भी जांच के केंद्र में

पुलिस की जांच में nightclub में आयोजित fire show को भी महत्वपूर्ण circumstance के तौर पर देखा गया। अभियोजन का आरोप है कि आग से जुड़े प्रदर्शन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।प्राथमिक जांच में fire extinguishers, alarms और अन्य fire-suppression arrangements को लेकर भी सवाल उठे थे। यही वजह है कि मामला केवल accidental fire तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित negligence, safety violations और regulatory compliance तक पहुंच गया।

Club के Licence और Structure पर भी सवाल

Bombay HC के सामने prosecution की ओर से यह भी कहा गया कि restaurant/nightclub आवश्यक licences के बिना चल रहा था और structure को लेकर भी गंभीर regulatory issues थे। हाईकोर्ट की reasoning में यह बात महत्वपूर्ण रही कि अगर structure itself unauthorised था और इसके कारण वैध licences नहीं मिल सके, तो fire-safety regulations के तहत आवश्यक installations और compliance भी प्रभावित हुए होंगे। Open Magazine की रिपोर्ट ने भी prosecution के आरोपों के हवाले से बताया कि nightclub की location और structure, fire-safety equipment, emergency evacuation plan तथा emergency exits को लेकर गंभीर सवाल जांच में उठे थे।

4,150 पन्नों की Chargesheet, 13 आरोपी

Goa Police ने फरवरी 2026 में इस मामले में लगभग 4,150 पन्नों की chargesheet दाखिल की थी। इसमें nightclub owners समेत कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक chargesheet में 300 से ज्यादा witnesses का भी उल्लेख है। आरोपियों के खिलाफ culpable homicide not amounting to murder, forgery और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि अब मामला सिर्फ bail proceedings तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज trial court को charges framing में तेजी लाने का निर्देश दिए जाने के बाद मुख्य आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

हादसा कब और कैसे हुआ था?

6 दिसंबर 2025 की रात North Goa के Arpora इलाके में स्थित Birch by Romeo Lane nightclub में भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 50 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद nightclub की fire-safety व्यवस्था, structure, licences और management की भूमिका को लेकर जांच शुरू हुई।

हादसे के बाद Thailand चले गए थे Luthra Brothers

मामले में सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी भी काफी चर्चा में रही। दोनों हादसे के बाद भारत से बाहर चले गए थे और Thailand में trace किए गए। बाद में उन्हें भारत वापस लाया गया। ED की जांच से संबंधित रिपोर्टों में भी दोनों भाइयों के Thailand जाने का उल्लेख सामने आया है। यह मुद्दा bail proceedings के दौरान prosecution के लिए महत्वपूर्ण circumstances में से एक रहा।

ED ने भी ₹11.01 करोड़ की संपत्तियां Attach कीं

इस मामले ने आर्थिक जांच का भी रूप ले लिया है।

Enforcement Directorate ने मई 2026 में Birch by Romeo Lane nightclub से जुड़े मामले में करीब ₹11.01 करोड़ की immovable properties को provisionally attach किया था। ED की कार्रवाई कथित illegal operation और उससे जुड़े financial transactions की जांच से संबंधित थी। इससे पहले ED की जांच में सामने आया था कि Birch by Romeo Lane से जुड़े कारोबार ने दो financial years में करीब ₹22 करोड़ का revenue generate किया था और एजेंसी इन पैसों को suspected proceeds of crime के angle से भी जांच रही थी।

Sessions Court की Bail कैसे पलटी?

पहले Sessions Court ने तीनों आरोपियों को अलग-अलग चरणों में bail दी थी। लेकिन Goa सरकार ने इस bail को Bombay High Court में चुनौती दी। 18 अगस्त को High Court ने bail orders को set aside करते हुए तीनों को दो सप्ताह में surrender करने को कहा था। इसके बाद आरोपियों ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया। अब 31 अगस्त को Supreme Court ने भी High Court के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

SC के आज के आदेश का मतलब क्या है?

यह समझना जरूरी है कि Supreme Court ने आज आरोपियों को दोषी घोषित नहीं किया है। कोर्ट ने केवल Bombay High Court द्वारा bail cancellation के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है। अपराध सिद्ध होना अभी ट्रायल का विषय है। इसलिए कानूनी स्थिति यह है कि तीनों आरोपी फिलहाल bail पर बाहर रहने की स्थिति में नहीं हैं और उन्हें दो सप्ताह के भीतर surrender करना होगा। साथ ही trial court को charges framing की प्रक्रिया तेज करनी होगी।

25 मौतों के बाद अब सवाल सिर्फ Fire Safety का नहीं

Birch by Romeo Lane अग्निकांड अब एक व्यापक regulatory और criminal investigation का मामला बन चुका है। एक तरफ 25 लोगों की मौत, alleged fire-safety lapses, emergency exit और licensing जैसे सवाल हैं; दूसरी तरफ police chargesheet में 13 accused और हजारों पन्नों का investigation material है। इसके साथ ED की financial probe और ₹11.01 करोड़ की attachment ने मामले को और गंभीर बना दिया है। लेकिन अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण trial में evidence के आधार पर ही होगा।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद:

  • सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दो सप्ताह में surrender करना होगा।

  • फिलहाल Bombay HC द्वारा bail cancellation का आदेश प्रभावी रहेगा।

  • Trial Court को charges framing की प्रक्रिया तेज करनी होगी।

  • 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल chargesheet के आधार पर आगे criminal trial चलेगा।

  • Fire-safety, licensing, emergency exit, alleged negligence और अन्य आरोपों का अंतिम परीक्षण evidence के आधार पर होगा।

  • ED की financial investigation भी अलग से जारी है।

Goa nightclub fire case में सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला आरोपियों की दोषसिद्धि नहीं है, लेकिन bail के मोर्चे पर उन्हें बड़ा झटका जरूर है। Bombay HC की जिस reasoning पर तीनों की bail रद्द हुई थी—यानी Sessions Court द्वारा investigation material और अपराध की गंभीरता का पर्याप्त मूल्यांकन न करना—उसमें Supreme Court ने फिलहाल हस्तक्षेप नहीं किया। अब इस मामले की अगली बड़ी लड़ाई trial court में होगी, जहां 25 मौतों के पीछे कथित लापरवाही और safety violations की न्यायिक जांच evidence के आधार पर होगी।