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‘मोहम्मद दीपक’ को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, FIR पर रोक; सोशल मीडिया बैन भी हटा, बजरंग दल विवाद ने लिया था तूल

26 जनवरी को एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होकर ‘मोहम्मद दीपक’ कहने वाले उत्तराखंड के जिम संचालक दीपक कुमार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद FIR, राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर पाबंदी तक जा पहुंचा। अब सुप्रीम कोर्ट ने दीपक को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए FIR से जुड़ी कार्यवाही पर रोक लगा दी है और हाईकोर्ट के सोशल मीडिया बैन वाले आदेश को भी फिलहाल स्थगित कर दिया है। राहुल गांधी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक के समर्थन और दूसरी ओर सामने आई कथित धमकियों के बीच इस मामले ने देशभर में बहस छेड़ दी है।

Sonali31 अग. 2026, 04:48 PM IST
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‘मोहम्मद दीपक’ को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, FIR पर रोक; सोशल मीडिया बैन भी हटा, बजरंग दल विवाद ने लिया था तूल

एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होने और भीड़ के सामने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताने वाले उत्तराखंड के जिम संचालक दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के संचालन पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत दीपक को घटना और केस से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो साझा करने से प्रतिबंधित किया गया था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को दीपक कुमार की याचिका पर उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में जवाब मांगा। यह मामला अब केवल एक FIR का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि धर्म, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया पर अदालत द्वारा लगाई गई पाबंदी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ चुका है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

घटना गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2026 की बताई गई है। उत्तराखंड में एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द इस्तेमाल किए जाने पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। इसी दौरान वहां पहुंचे जिम संचालक दीपक कुमार ने दुकानदार के पक्ष में हस्तक्षेप किया। विवाद के दौरान जब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने कथित तौर पर जवाब दिया—‘मोहम्मद दीपक।’ घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद दीपक रातोंरात राष्ट्रीय चर्चा में आ गए। उनके समर्थन और विरोध में राजनीतिक तथा सामाजिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। जिस दुकानदार को लेकर विवाद हुआ, उसकी पहचान वकील अहमद के रूप में हुई। रिपोर्टों के अनुसार वह बुजुर्ग दुकानदार लंबे समय से अपनी दुकान चला रहे थे।

‘अच्छा नागरिक होने की सजा क्यों?’—सुप्रीम कोर्ट में सिंघवी की दलील

दीपक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने किसी हिंसा या उपद्रव में हिस्सा नहीं लिया था, बल्कि एक दुकानदार की मदद करने के लिए वहां पहुंचे थे। सिंघवी ने दलील दी कि दीपक ने स्वयं भी घटना को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई और उलटे उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कैसे की जा सकती है, जिसने कथित तौर पर एक व्यक्ति की मदद करने के लिए हस्तक्षेप किया था। सिंघवी ने FIR में लगाई गई BNS की धारा 191 का भी उल्लेख किया और कहा कि इस धारा के आवश्यक तत्व मामले में मौजूद नहीं थे। उनके अनुसार, बाद में यह आरोप भी हटा दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में ‘Arnesh Kumar’ फैसले का भी हवाला

दीपक की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ लगाए गए अपराधों में सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है। इसलिए गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के Arnesh Kumar फैसले में निर्धारित सिद्धांत लागू होने चाहिए। सिंघवी ने हाईकोर्ट द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट पर लगाई गई रोक को भी चुनौती दी। उन्होंने इसे ‘blanket gag order’ यानी व्यापक बोलने की पाबंदी बताया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

दीपक ने FIR रद्द कराने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने FIR को तत्काल रद्द करने से इनकार किया था और मामले की जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए थे। साथ ही हाईकोर्ट ने दीपक को इस विवाद और लंबित मामले से संबंधित सोशल मीडिया पर पोस्ट या वीडियो साझा करने से रोक दिया था।

दीपक ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से के संचालन पर भी रोक लगा दी है, जिसके तहत सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर रोक लगाई गई थी।

राहुल गांधी ने की थी दीपक की तारीफ

मामले ने राजनीतिक रंग तब और पकड़ा जब कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दीपक से मुलाकात की। राहुल गांधी ने दीपक के उस रुख की तारीफ की थी जिसमें उन्होंने कथित तौर पर मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया था। राहुल गांधी ने इसे नफरत के खिलाफ खड़े होने और देश की एकता के पक्ष में आवाज उठाने से जोड़ा। राहुल गांधी ने दीपक के जिम की सदस्यता लेने की बात भी कही थी।

असदुद्दीन ओवैसी ने भी किया समर्थन

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम भी दीपक के समर्थन में सामने आया। ओवैसी ने कथित तौर पर मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े होने के लिए दीपक की सराहना की थी। हालांकि, इस मामले से जुड़ी कुछ वायरल तस्वीरों और दावों को लेकर फैक्ट-चेक सामने आए। AIMIM की महिला विंग द्वारा दीपक के स्वागत से जुड़ी एक वायरल तस्वीर को फैक्ट-चेक में AI-generated बताया गया था। इसलिए इस तस्वीर को वास्तविक घटना के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा।

झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने किया ₹2 लाख देने का ऐलान

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी दीपक के समर्थन में सामने आए। उन्होंने दीपक को ₹2 लाख देने की घोषणा की थी। लेकिन दीपक ने यह राशि लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह रकम किसी दिव्यांग या जरूरतमंद व्यक्ति को दी जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इस घटनाक्रम ने दीपक की छवि को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को और हवा दी।

उत्तराखंड के पूर्व मंत्रियों ने भी जताया समर्थन

उत्तराखंड के पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और हरक सिंह रावत के नाम भी दीपक का समर्थन करने वालों में सामने आए। हालांकि, दीपक ने स्वयं किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव से इनकार किया और कहा कि उन्हें राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ हिंदू रक्षा दल की कथित धमकी से बढ़ा तनाव

मामला केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं रहा। हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रमुख ललित शर्मा की कथित धमकियों के बाद विवाद और गंभीर हो गया।

रिपोर्टों में दावा किया गया कि दीपक को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक बयान दिए गए और उनके खिलाफ इनाम की घोषणा तक की गई। इसके बाद पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी मामला गरमाया। इस पूरे घटनाक्रम ने दीपक की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए और स्थानीय विवाद राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।

‘इंसानियत जोड़ो यात्रा’ निकालने की तैयारी

विवाद के बाद दीपक और उनके मित्र विजय रावत ने कथित तौर पर देशभर में ‘इंसानियत जोड़ो यात्रा’ निकालने की योजना की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक विभाजन और नफरत के बजाय भाईचारे तथा मानवता का संदेश देना बताया गया।

विवाद का असर कारोबार पर भी पड़ा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के बाद दीपक के जिम पर भी असर पड़ा। सदस्यता में कमी और आर्थिक परेशानियों के कारण बाद में उनका जिम बंद होने की खबर सामने आई। यानी 26 जनवरी की कुछ मिनटों की घटना ने दीपक की निजी जिंदगी, कारोबार और कानूनी स्थिति—तीनों को प्रभावित किया।

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या मतलब?

सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि दीपक के खिलाफ FIR सही है या गलत। कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत दी है।

यानी:

  • FIR रद्द नहीं हुई है।
  • FIR से संबंधित आगे की कार्यवाही पर फिलहाल रोक है।
  • हाईकोर्ट के सोशल मीडिया प्रतिबंध वाले आदेश के संचालन पर भी रोक है।
  • राज्य और अन्य पक्षों को चार सप्ताह में जवाब देना होगा।
  • मामले पर आगे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

इसलिए इसे ‘FIR खत्म’ होने के बजाय ‘FIR की कार्यवाही पर अंतरिम रोक’ के तौर पर रिपोर्ट करना ज्यादा सटीक होगा। कुल मिलाकर, ‘मोहम्मद दीपक’ का मामला अब एक स्थानीय धार्मिक विवाद से आगे बढ़कर FIR, नागरिक स्वतंत्रता, सोशल मीडिया पर अदालत की पाबंदी और राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़ा मामला बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की आज की अंतरिम राहत ने इस विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।