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भारत की सौर क्षमता 164.59 गीगावाट के पार, 2025 में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर बिजली उत्पादक रहा देश
भारत की संचयी स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 31 जुलाई 2026 तक 164.59 गीगावाट पहुंच गई है। वहीं, 2025 में 196 टेरावाट-घंटे सौर बिजली उत्पादन के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर बिजली उत्पादक रहा।

भारत की उपलब्धि केवल सौर संयंत्र लगाने तक सीमित नहीं है। ऊर्जा थिंक टैंक Ember के अनुसार, देश ने 2025 में 196 टेरावाट-घंटे (TWh) सौर बिजली पैदा की, जो 2022 के 96 TWh के मुकाबले दोगुने से अधिक है। इस उत्पादन के साथ भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर बिजली उत्पादक रहा। चौथे स्थान पर रहे जापान का सौर उत्पादन 101 TWh था।
साल 2025 में भारत के सौर बिजली उत्पादन में 53 TWh, या 37 प्रतिशत, की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में सौर ऊर्जा ने जलविद्युत को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा स्वच्छ बिजली स्रोत बनने की दिशा में बड़ी छलांग लगाई और देश की कुल बिजली आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी 9.4 प्रतिशत तक पहुंच गई।
भारत की सौर क्षमता में तेजी का पैमाना भी उल्लेखनीय है। 2014 में देश के पास करीब 2.82 GW स्थापित सौर क्षमता थी, जो जुलाई 2026 तक बढ़कर 164.59 GW हो गई। सरकार के अनुसार, इस अवधि में भारत की सौर क्षमता लगभग 58 गुना बढ़ी है।
भारत स्थापित कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भी दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। हालांकि, इस रैंकिंग को सौर बिजली उत्पादन अथवा केवल सौर क्षमता की रैंकिंग से अलग समझना जरूरी है।
इस स्टोरी में क्या महत्वपूर्ण है
स्थापित क्षमता का रिकॉर्ड: 31 जुलाई 2026 तक भारत के पास 164.59 GW की सौर क्षमता थी, जो सौर परियोजनाओं के तेज विस्तार का संकेत है।
उत्पादन में वैश्विक स्थान: 2025 के वास्तविक सौर बिजली उत्पादन के आधार पर भारत तीसरे स्थान पर रहा; भारत ने जापान को पीछे छोड़ा।
तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी: 2025 में सौर उत्पादन 53 TWh बढ़ा और कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 9.4 प्रतिशत रही।
रिकॉर्ड नवीकरणीय वृद्धि: 2025 में भारत की कुल नवीकरणीय बिजली उत्पादन वृद्धि 98 TWh रही, जबकि बिजली मांग में बढ़ोतरी 49 TWh थी। इसी दौरान जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन 3.3 प्रतिशत घटा।
अगली बड़ी चुनौती: बड़ी मात्रा में दिन के समय मिलने वाली सौर बिजली को प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए बैटरी स्टोरेज, ट्रांसमिशन नेटवर्क और लचीले ग्रिड संचालन की जरूरत बढ़ेगी। Ember ने चेताया है कि पर्याप्त स्टोरेज और ग्रिड सुधार के बिना नवीकरणीय बिजली की कटौती का जोखिम बढ़ सकता है।
