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अदालत से तथ्य छिपाना पड़ा भारी! कॉलेज के बैंक खाते खोलने की मांग खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया ₹1 लाख जुर्माना

अदालत के सामने जरूरी तथ्य छिपाना याचिकाकर्ता को भारी पड़ गया। कॉलेज के बैंक खाते संचालित करने की मांग लेकर पहुंची याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ राहत देने से इनकार किया, बल्कि ₹1 लाख की दंडात्मक लागत भी लगा दी। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का “घोर दुरुपयोग” माना।

Sonali01 सित. 2026, 02:06 PM IST
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अदालत से तथ्य छिपाना पड़ा भारी! कॉलेज के बैंक खाते खोलने की मांग खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया ₹1 लाख जुर्माना

प्रयागराज।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कॉलेज के बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने पाया कि याचिका दाखिल करते समय कॉलेज चलाने वाली सोसायटी से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मैनेजमेंट विवाद और पहले की न्यायिक कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर सामने नहीं रखा गया। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने इस रवैये को न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग माना और याचिका को “कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग” बताते हुए दंडात्मक लागत लगाने का आदेश दिया।


क्या था पूरा मामला?

यह याचिका अबिदा बानो ने दाखिल की थी, जिन्होंने खुद को हरदोई जिले के खजोहना स्थित मसीहुननिसा डिग्री कॉलेज की मैनेजर बताया था। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि संबंधित बैंकों को कॉलेज के बैंक खाते संचालित करने की अनुमति देने का निर्देश दिया जाए और उन्हें अधिकृत मैनेजर एवं खातों की सिग्नेटरी के रूप में मान्यता दी जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि कॉलेज के बैंक खाते वर्ष 2020 से संचालित नहीं हो पा रहे थे। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका में खातों के निष्क्रिय होने की वास्तविक परिस्थितियों और उससे जुड़े विवाद की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। याचिका में मुख्य रूप से 15 मई 2026 की एक अभ्यावेदन का सहारा लेकर बैंक खातों को फिर से संचालित करने की मांग की गई थी।


बैंक खाते नहीं, असल में मैनेजमेंट विवाद था

हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक खातों का मुद्दा अलग-थलग नहीं देखा जा सकता, क्योंकि कॉलेज को संचालित करने वाली किशन शिक्षा संस्थान, जैतनगर की सोसायटी के मैनेजमेंट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सोसायटी के संस्थापक मैनेजर की 15 जनवरी 2020 को मृत्यु के बाद अबिदा बानो और उनकी बहन उजमा फहीम से जुड़े अलग-अलग पक्ष सोसायटी के नियंत्रण का दावा कर रहे थे। इसके बाद सोसायटी के नवीनीकरण, चुनाव, कार्यकारिणी समिति और कॉलेज की संबद्धता को लेकर कई न्यायिक कार्यवाहियां हुईं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अबिदा बानो पहले सोसायटी के नवीनीकरण को रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थीं। वह याचिका वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के आधार पर खारिज हुई और बाद की अपील भी खारिज कर दी गई। एक अन्य याचिका अभियोजन के अभाव में खारिज हुई। इसके अलावा, प्रतिद्वंद्वी कार्यकारिणी समिति के चुनाव की मंजूरी से जुड़ा मामला भी सामने आया, जिसमें 25 जनवरी 2023 को डिवीजन बेंच द्वारा विशेष अपील की अनुमति दिए जाने के बाद उस निर्णय को प्रथम दृष्टया अंतिम रूप प्राप्त हो गया था।


तथ्य छिपाने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने 2020 से 2023 के बीच हुए महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को अदालत के सामने नहीं रखा। कोर्ट के अनुसार, एक गंभीर और विवादित सोसायटी मैनेजमेंट विवाद को केवल बैंक खातों को डी-फ्रीज कराने के साधारण मामले के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने यह भी गंभीरता से लिया कि बैंक खाते वर्ष 2020 से फ्रीज होने की बात मूल टाइप की गई याचिका में स्पष्ट रूप से नहीं थी और बाद में पैराग्राफ 11 में इसे हाथ से जोड़ा गया था।


“साफ हाथों” से अदालत आना जरूरी

पीठ ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति हाईकोर्ट के असाधारण रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करता है, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह साफ हाथों, स्पष्ट सोच और पूरी ईमानदारी के साथ अदालत के सामने आए। कोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना महज तकनीकी या प्रक्रियात्मक गलती नहीं है। विशेष रूप से तब, जब याचिकाकर्ता को उन पूर्व कार्यवाहियों की जानकारी थी जो सीधे उसके बैंक खाते संचालित करने के दावे से संबंधित थीं।


₹1 लाख की लागत, एक महीने में जमा करना होगा

हाईकोर्ट ने याचिका को महत्वपूर्ण तथ्यों के जानबूझकर दमन के कारण न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग माना। अदालत ने न्यायिक समय की बर्बादी को देखते हुए याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख की दंडात्मक लागत लगाई। यह राशि संयुक्त रूप से या अलग-अलग उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ में एक महीने के भीतर जमा करनी होगी। राशि जमा नहीं करने पर इसे भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जा सकेगा।