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मुंबई को कचरे से मुक्त करने के लिए ‘युद्ध स्तर’ पर काम करें BMC और नागरिक, बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुंबई की चमक-दमक के पीछे छिपी कचरे और गंदगी की समस्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि मुंबई को कचरे से मुक्त करना सिर्फ BMC की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इसके लिए अब ‘युद्ध स्तर’ पर प्रयास जरूरी हैं।

मुंबई की सड़कों, फुटपाथों, समुद्र तटों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाला मुंबई जैसा बड़ा शहर गंदगी, कूड़े और कचरे से मुक्त होना चाहिए। इसके लिए नगर निगम के साथ-साथ नागरिकों और सभी संबंधित एजेंसियों को ‘युद्ध स्तर’ पर प्रयास करने होंगे।
क्या कहा बॉम्बे हाईकोर्ट ने?
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की डिवीजन बेंच ने 27 अगस्त 2026 को दिए आदेश में कहा कि सार्वजनिक स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिक भी इस व्यवस्था के बराबर के हितधारक हैं और उन्हें नगर निगम की मशीनरी का सहयोग करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मुंबई के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से लेकर झुग्गी बस्तियों, सड़कों, फुटपाथों, खुले स्थानों, उद्यानों, समुद्र तटों और सी-फ्रंट तक हर जगह गंदगी और कचरे से मुक्त होना चाहिए। कोर्ट ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर जीवन स्तर से जोड़ते हुए कहा कि यह संवैधानिक लक्ष्यों को हासिल करने का हिस्सा है।
Article 51A के मौलिक कर्तव्यों का भी जिक्र
हाईकोर्ट ने संविधान के Article 51A में दिए मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों का भी दायित्व है कि वे व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कृष्टता की ओर बढ़ें तथा पर्यावरण की रक्षा और सुधार में योगदान दें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना केवल शहर की सुंदरता को खराब नहीं करता, बल्कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी सीधा असर पड़ता है। कचरे के कारण मच्छरों, चूहों और आवारा जानवरों के पनपने की स्थिति बनती है, जिससे डेंगू, मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
BMC ने कोर्ट को बताई अपनी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अदालत को बताया कि कचरा फैलाने और अवैध डंपिंग पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सभी वार्ड अधिकारियों को Solid Waste Management से जुड़े उपनियमों को सख्ती से लागू करने और कचरा फैलाने वालों पर निर्धारित जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए हैं। BMC ने नियमित निरीक्षण, एंटी-लिटरिंग अभियान और प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी भी अदालत को दी। इसके अलावा कचरा फेंके जाने वाले संवेदनशील स्थानों यानी Garbage Vulnerable Points पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
‘स्वच्छ मुंबई प्रबोधन अभियान’ भी चलाया जा रहा
BMC ने अदालत को बताया कि Swachh Mumbai Prabodhan Abhiyan के तहत गैर-सरकारी संगठनों को झुग्गी क्षेत्रों से कचरा इकट्ठा करने और उसे निर्धारित कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहां से नगर निगम के वाहन कचरे को आगे डंपिंग ग्राउंड तक ले जाते हैं। इसके अलावा अप्रैल 2026 से MyBMC Marg ऐप को भी सक्रिय किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक ठोस कचरा प्रबंधन, गंदगी, अवैध कचरा डंपिंग और स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
इंदौर का उदाहरण भी दिया
इस मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इंदौर का उदाहरण देते हुए कहा था कि अगर प्रशासन और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो बड़े शहरों में भी स्वच्छता का उच्च स्तर हासिल किया जा सकता है। अदालत ने मुंबई के सभी वार्डों और उपनगरों में कचरा फैलाने के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
यह मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
यह मामला मूल रूप से कंजूरमार्ग स्थित डंपिंग ग्राउंड के प्रबंधन से जुड़ी याचिका से सामने आया था। मामले का दायरा बढ़ाते हुए हाईकोर्ट ने मुंबई में समग्र स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर भी विचार किया। मामले का शीर्षक Kannamwar Co-Op. Hsg. Soc. Association Ltd. vs Union of India है और यह Writ Petition No. 790 of 2018 के तहत चल रहा है। 27 अगस्त 2026 के आदेश में कोर्ट ने BMC की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए नागरिकों से भी सहयोग करने की अपील की। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
‘Clean Mumbai, Green Mumbai’ सिर्फ नारा नहीं होना चाहिए
हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि ‘Clean Mumbai, Green Mumbai’ केवल कागजों पर लिखा नारा बनकर न रह जाए, बल्कि इसे वास्तविकता में बदला जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सही दिशा में सामूहिक इच्छाशक्ति हो तो लक्ष्य हासिल करना संभव है।
