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पंजाब में BJP-SAD गठबंधन फाइनल, भाजपा 60 और अकाली दल 57 सीटों पर लड़ेगा
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन का फॉर्मूला तय हो गया है। दोनों दलों के बीच 117 विधानसभा सीटों का बंटवारा 60:57 के अनुपात में होगा। भाजपा 60 सीटों पर, जबकि अकाली दल 57 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी सहमति बनी है। गठबंधन चुनाव से पहले किसी एक नेता को CM फेस घोषित नहीं करेगा। सरकार बनने की स्थिति में जिस पार्टी के ज्यादा विधायक जीतकर आएंगे, मुख्यमंत्री उसी पार्टी का होगा, जबकि दूसरी पार्टी को उपमुख्यमंत्री पद मिलेगा। गठबंधन की औपचारिक घोषणा सितंबर में होने की संभावना है।

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन का फॉर्मूला तय हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों दलों ने सीट शेयरिंग से लेकर मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले तक पर सहमति बना ली है।
60-57 सीटों पर बनी सहमति
पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से भाजपा 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 57 सीटें मिलेंगी। इस तरह भाजपा अकाली दल से तीन सीट ज्यादा पर उम्मीदवार उतारेगी। यह फॉर्मूला दोनों दलों के पुराने सीट बंटवारे से बिल्कुल अलग है। पिछले गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में था और 2017 के विधानसभा चुनाव में उसने 94 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि भाजपा के खाते में 23 सीटें थीं। 2027 के लिए भाजपा ने सीटों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। पार्टी का तर्क है कि पंजाब में पिछले कुछ चुनावों के दौरान उसका वोट आधार और चुनावी प्रभाव बढ़ा है।
2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को बनाया आधार
सीट शेयरिंग के लिए 2024 लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। भाजपा ने विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में रही। भाजपा के आंकड़ों के अनुसार, 58 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी पहले या दूसरे स्थान पर रही थी। इसी प्रदर्शन के आधार पर भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अधिक सीटों पर दावा पेश किया। दोनों पार्टियों के 2024 के वोट शेयर को जोड़ने पर गठबंधन का संयुक्त वोट प्रतिशत करीब 32 फीसदी बैठता है। भाजपा का वोट शेयर करीब 18.56 फीसदी और अकाली दल का करीब 13.42 फीसदी रहा था। गठबंधन की रणनीति इसी संयुक्त वोट आधार को विधानसभा चुनाव में सीटों में बदलने की है।
पहले 70 से ज्यादा सीटों की मांग
सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत की शुरुआत में भाजपा ने ज्यादा सीटों की मांग रखी थी। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने 70 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। दूसरी तरफ अकाली दल करीब आधी सीटों पर चुनाव लड़ने के पक्ष में था। बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोनों दलों के बीच 60-57 के फॉर्मूले पर सहमति बनी। भाजपा के पंजाब चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल तथा अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच भी सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत हुई। इस दौरान विधानसभा क्षेत्रों में दोनों दलों की चुनावी स्थिति और संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा हुई।
CM फेस पर भी समझौता
गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अहम फॉर्मूला तय किया गया है। अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे रखने की बात कही गई थी। हालांकि भाजपा ने चुनाव से पहले किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने के बजाय चुनाव परिणाम को आधार बनाने पर जोर दिया। अब तय फॉर्मूले के मुताबिक गठबंधन किसी घोषित CM फेस के बिना चुनाव लड़ेगा। चुनाव परिणाम आने के बाद जिस पार्टी के ज्यादा विधायक जीतेंगे, मुख्यमंत्री उसी पार्टी का होगा। दूसरी पार्टी को उपमुख्यमंत्री का पद दिया जाएगा। इस फॉर्मूले से दोनों दलों को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव से बचने में मदद मिलेगी।
PM मोदी की भी नजर
गठबंधन को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सीधी नजर बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पूरी कवायद पर नजर रख रहे हैं।
सुखबीर सिंह बादल की 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। इसके बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच बैठकों का दौर तेज हुआ। गठबंधन की औपचारिक घोषणा सितंबर में किए जाने की संभावना है।
2020 में टूट गया था BJP-SAD गठबंधन
भाजपा और अकाली दल का पुराना गठबंधन सितंबर 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। अकाली दल ने केंद्र की तत्कालीन कृषि कानूनों को लेकर भाजपा से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने अलग-अलग लड़ा। 2022 में अकाली दल ने 97 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 73 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर दो सीटों पर जीत दर्ज की।
अब दोनों दल एक बार फिर साथ आ रहे हैं।
2027 में बदलेगा पंजाब का सियासी गणित
BJP-SAD गठबंधन के सामने पंजाब की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। राज्य में आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि कांग्रेस भी मजबूत विपक्षी ताकत के रूप में मौजूद है। अकाली दल के पास पंजाब में अपना पारंपरिक ग्रामीण और क्षेत्रीय आधार है, जबकि भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य के शहरी और अन्य इलाकों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की है। दोनों दलों को उम्मीद है कि उनका संयुक्त वोट आधार 2027 के विधानसभा चुनाव में मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
पुराने गठबंधन से इस बार तस्वीर अलग
इस गठबंधन में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस बार भाजपा छोटे सहयोगी की भूमिका में नहीं होगी। 60 सीटों के साथ भाजपा अकाली दल से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी। वहीं अकाली दल 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। मुख्यमंत्री पद का फैसला भी चुनाव परिणाम के आधार पर करने का फॉर्मूला तय किया गया है। इस तरह BJP-SAD गठबंधन ने 2027 के चुनाव के लिए सीट शेयरिंग और सत्ता बंटवारे का ढांचा तैयार कर लिया है। अब निगाहें सितंबर में होने वाली गठबंधन की औपचारिक घोषणा और सीटवार उम्मीदवारों के ऐलान पर रहेंगी।
