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जेलों में जाति के आधार पर सफाई का काम? मद्रास हाईकोर्ट सख्त, CCTV फुटेज खंगालकर कैदियों से पूछताछ के आदेश
जेल में सजा काट रहे कैदियों से जाति के आधार पर काम कराने और मैनुअल स्कैवेंजिंग के आरोपों पर मद्रास हाईकोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से रिपोर्ट तलब कर जेलों में कथित जातिगत भेदभाव पर जवाब मांगा है।

तमिलनाडु की जेलों में क्या कैदियों से उनकी जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर सफाई का काम कराया जा रहा है? इस गंभीर आरोप पर मद्रास हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए जेलों का निरीक्षण करने, कैदियों से बातचीत करने और CCTV फुटेज की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस आर. सक्तिवेल की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता और ‘Global Network for Equality (GNE)-India’ के सह-संस्थापक की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
क्या है आरोप?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मदुरै सेंट्रल जेल और पलायमकोट्टई सेंट्रल जेल समेत कुछ जेलों में उत्पीड़ित समुदायों के कैदियों को disproportionately शौचालय साफ करने और मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसे कामों में लगाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ ब्लॉक और बैरक कथित तौर पर विशेष समुदायों के कैदियों के लिए अलग किए गए हैं और उनसे सफाई संबंधी काम कराया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि मदुरै सेंट्रल जेल में एक उम्रकैद कैदी को ड्रेनेज टैंक में उतरकर सफाई करने के लिए कहा गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जेलों की CCTV फुटेज की जांच करने पर ऐसे आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है।
अधिकारियों ने आरोपों से किया इनकार
याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसने पहले संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर ऐसी कथित प्रथाओं को रोकने और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब में तमिलनाडु की जेलों में मैनुअल स्कैवेंजिंग और जाति आधारित भेदभाव से इनकार किया गया।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कैदियों के परिवारों से उसे इसके विपरीत जानकारी मिली। इसी विरोधाभास को देखते हुए अदालत ने स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया है।
तीन जिलों की जेलों का होगा निरीक्षण
हाईकोर्ट ने मदुरै, तिरुनेलवेली और त्रिची के Principal District Judges तथा District Legal Services Authorities को संबंधित जेलों का निरीक्षण करने को कहा है। अधिकारियों को कैदियों से बातचीत करने, परिस्थितियों की जांच करने और CCTV फुटेज देखने के बाद रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी। संबंधित जेल अधीक्षकों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या सफाई संबंधी काम वास्तव में जाति के आधार पर बांटे जा रहे हैं और क्या कैदियों से प्रतिबंधित मैनुअल स्कैवेंजिंग या खतरनाक सफाई कार्य कराया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा मामला
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2024 के महत्वपूर्ण फैसले की पृष्ठभूमि में भी अहम है। Sukanya Shantha v. Union of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जाति आधारित भेदभाव और काम के बंटवारे से जुड़े कई प्रावधानों को असंवैधानिक माना था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कैदी होने के बावजूद व्यक्ति के गरिमा और समानता के संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होते। अदालत ने जेलों में जाति के आधार पर कैदियों को अलग करने या उनके काम का निर्धारण करने वाली व्यवस्था पर रोक लगाई थी।
साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया था कि मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर या सेप्टिक टैंक की hazardous cleaning से संबंधित कानूनी प्रतिबंध जेलों पर भी लागू होते हैं।
आरोपों की पुष्टि अभी बाकी
गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि तमिलनाडु की जेलों में जाति आधारित मैनुअल स्कैवेंजिंग हो रही है। फिलहाल अदालत ने आरोपों की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। CCTV फुटेज, जेल निरीक्षण और कैदियों के बयान के आधार पर अब रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
