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GPA Holder संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता, बिक्री की रकम भी नहीं रोक सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

General Power of Attorney (GPA) के हाथ में पावर ऑफ अटॉर्नी होने का मतलब यह नहीं कि संपत्ति पर उसका मालिकाना हक हो गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि GPA Holder न तो खुद को संपत्ति का मालिक बता सकता है और न ही बिक्री से मिली रकम अपने पास रोक सकता है।

Sonali01 सित. 2026, 05:10 PM IST
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GPA Holder संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता, बिक्री की रकम भी नहीं रोक सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली:

General Power of Attorney यानी GPA को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी व्यक्ति को GPA मिलने से वह संबंधित अचल संपत्ति का मालिक नहीं बन जाता। GPA केवल एजेंसी का अधिकार देता है और इससे संपत्ति में कोई स्वतः स्वामित्व, अधिकार या टाइटल ट्रांसफर नहीं होता। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने Bhisham Mehta v. Mrs. Gita Vig & Ors. मामले में यह फैसला सुनाते हुए अपील खारिज कर दी। मामला RFA 645/2022 से जुड़ा था। कोर्ट ने उस आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत अपीलकर्ता को Kusum Mehta के कानूनी वारिसों को ₹1,01,78,074 की बकाया राशि देने का निर्देश दिया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार फैसला 31 अगस्त 2026 को आया।


क्या है पूरा मामला?

विवाद एक कृषि भूमि से जुड़ा था। Kusum Mehta ने वर्ष 1985 में तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर यह संपत्ति खरीदी थी और उसमें उनकी एक-चौथाई अविभाजित हिस्सेदारी थी। बाद में उन्होंने Bhisham Mehta को General Power of Attorney दी। इसी GPA के आधार पर वर्ष 2011 में संपत्ति को ₹6,95,11,500 में बेच दिया गया। Kusum Mehta की एक-चौथाई हिस्सेदारी के हिसाब से उन्हें ₹1,73,77,875 बिक्री राशि मिलनी थी। हालांकि, उनके खाते में केवल ₹71,99,801 ट्रांसफर किए गए। बाकी ₹1,01,78,074 अपीलकर्ता के पास रह गए। Kusum Mehta की मृत्यु के बाद उनकी बेटियों ने इस रकम की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की।


GPA से मालिकाना हक मिलने की दलील खारिज

अपीलकर्ता ने दावा किया कि संपत्ति वास्तव में उसके और उसकी पत्नी ने खरीदी थी और Kusum Mehta द्वारा जारी की गई कथित irrevocable GPA ने उसे संपत्ति पर अधिकार दे दिया था। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि General Power of Attorney किसी संपत्ति के मालिकाना हक को Attorney Holder को ट्रांसफर करने वाला दस्तावेज नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Irrevocable Power of Attorney भी अपने आप Attorney Holder को संपत्ति का मालिक नहीं बनाती।

कोर्ट ने पाया कि GPA में अपीलकर्ता को Kusum Mehta के हिस्से की देखरेख, प्रबंधन और उनकी ओर से संपत्ति बेचने या ट्रांसफर करने का अधिकार दिया गया था। लेकिन GPA किसी consideration के बदले नहीं बनाई गई थी और अपीलकर्ता का संपत्ति में कोई स्वतंत्र हित भी साबित नहीं हुआ।


बिक्री की रकम Principal को देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने Kusum Mehta के Agent के रूप में काम करते हुए उनकी ओर से बिक्री राशि प्राप्त की थी। इसलिए Indian Contract Act, 1872 की Section 218 के तहत वह Principal के खाते पर प्राप्त रकम उसे देने के लिए बाध्य था।


'Friendly Loan' की दलील भी खारिज

अपीलकर्ता ने दावा किया कि Kusum Mehta को दिए गए करीब ₹72 लाख बिक्री की रकम नहीं बल्कि interest-free friendly loan थे। कोर्ट ने इस दलील को “moonshine defence” यानी बेबुनियाद बचाव माना। कोर्ट ने यह भी देखा कि अन्य सह-मालिकों के खातों में भी इसी तरह रकम जमा की गई थी। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की स्पष्ट स्वीकारोक्तियों को देखते हुए Order XII Rule 6 CPC के तहत दिए गए आदेश को उचित माना और अपील खारिज कर दी।


फैसले का अहम संदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि GPA Holder Principal की ओर से संपत्ति से जुड़े काम कर सकता है, लेकिन केवल GPA के आधार पर संपत्ति का मालिक नहीं बन सकता। साथ ही, Principal की संपत्ति बेचकर प्राप्त बिक्री राशि को अपने पास रखना भी GPA Holder का अधिकार नहीं है।