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13 FIR खत्म करने और 2,873 प्रदर्शनकारियों पर नई FIR की मांग, सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई

13 FIR पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद अब 2,873 प्रदर्शनकारियों को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्र की नई मांग पर आज CJI सूर्यकांत की बेंच में सुनवाई होगी। क्या पुरानी FIR होंगी खत्म या दर्ज होगी नई FIR? सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Sonali01 सित. 2026, 05:11 PM IST
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13 FIR खत्म करने और 2,873 प्रदर्शनकारियों पर नई FIR की मांग, सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई

नई दिल्ली: 

छात्र प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में दर्ज 13 FIR को खत्म करने और 2,873 ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को अहम सुनवाई हो रही है। केंद्र सरकार ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने की मांग की है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही है। दिल्ली पुलिस की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि छात्र प्रदर्शनों से संबंधित 13 FIR को अब आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इनमें 10 FIR में हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2026 में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद दिल्ली में कई FIR दर्ज की गईं। अब केंद्र और दिल्ली पुलिस का कहना है कि इन 13 FIR को खत्म करने के लिए सामान्य कानूनी प्रक्रिया अपनाने में व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।


2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR क्यों?

केंद्र की अर्जी का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा 2,873 लोगों से जुड़ा है। पुलिस का कहना है कि इन लोगों के गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड बताए गए हैं और प्रदर्शन के दौरान हिंसा में उनकी संभावित भूमिका की अलग से जांच जरूरी है। प्रस्ताव के अनुसार, इन लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की जाएगी और जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि हिंसक घटनाओं में उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या थी। बाकी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 13 मौजूदा FIR को आगे नहीं बढ़ाने की मांग की गई है।


एक ही घटना पर दूसरी FIR नहीं

केंद्र की अर्जी में यह भी कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट 13 FIR को खत्म करने की अनुमति देता है, तो उन्हीं घटनाओं को लेकर आगे कोई दूसरी FIR दर्ज नहीं की जाएगी। प्रस्तावित नई FIR का उद्देश्य केवल 2,873 चिन्हित लोगों की कथित भूमिका की जांच करना होगा।


अनुच्छेद 142 का क्यों लिया सहारा?

संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी लंबित मामले में 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की शक्ति देता है। केंद्र ने इसी विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मौजूदा FIR को खत्म करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय आई है जब छात्र आंदोलन से जुड़े पक्ष सरकार से पहले किए गए आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी समूह ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक और मार्च का ऐलान किया है।


आज की सुनवाई क्यों अहम?

सुप्रीम कोर्ट के सामने अब दो प्रमुख मुद्दे हैं—पहला, क्या 13 FIR को अनुच्छेद 142 के तहत खत्म किया जा सकता है और दूसरा, क्या 2,873 लोगों के खिलाफ एक अलग FIR दर्ज कर उनकी व्यक्तिगत भूमिका की जांच की अनुमति दी जानी चाहिए। फिलहाल यह केवल केंद्र और दिल्ली पुलिस की मांग है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी 13 FIR खत्म करने या 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।