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छात्र प्रदर्शन पर बड़ा अपडेट: 4 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से 116 FIR रद्द करने की मांग की

छात्र आंदोलनों पर दर्ज FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है, चार राज्यों ने 116 FIR रद्द करने की मांग की है। बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र और असम ने केंद्र के कथित आश्वासन का हवाला देते हुए अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप मांगा है।

Sonali01 सित. 2026, 05:11 PM IST
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छात्र प्रदर्शन पर बड़ा अपडेट: 4 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से 116 FIR रद्द करने की मांग की

नई दिल्ली:

 NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अब सुप्रीम कोर्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कुल 116 FIR रद्द करने की मांग की है। राज्यों ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया है। यह मांग ऐसे समय आई है जब छात्र संगठन 5 सितंबर को दिल्ली में दोबारा प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने आंदोलन समाप्त करने के बदले FIR वापस लेने का जो आश्वासन दिया था, उसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

केंद्र के कथित आश्वासन का हवाला

चारों राज्यों की ओर से दाखिल आवेदनों में 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की ओर से दिए गए कथित आश्वासन का हवाला दिया गया है। राज्यों के अनुसार, छात्रों से कहा गया था कि यदि आंदोलन वापस ले लिया जाता है तो प्रदर्शन से संबंधित मामले वापस लेने पर विचार किया जाएगा। अब राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इन FIR को खत्म करने के लिए अदालत अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करे।

बिहार में सबसे ज्यादा 69 FIR

बिहार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 69 FIR को रद्द करने की मांग रखी है। ये मामले राज्य के अलग-अलग जिलों और पुलिस थानों में दर्ज किए गए हैं। इनमें पटना के गांधी मैदान और कोतवाली समेत गोपालगंज टाउन, सीवान टाउन, जहानाबाद, कटिहार टाउन, मुजफ्फरपुर टाउन, बिहारशरीफ और अन्य स्थानों के मामले शामिल हैं। इनमें से कई FIR 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 के बीच दर्ज की गई थीं।

महाराष्ट्र की 34 FIR भी शामिल

महाराष्ट्र ने भी 34 FIR रद्द करने की मांग की है। इन मामलों का संबंध नागपुर, मुंबई, पुणे, जलगांव, बुलढाणा समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में हुए छात्र प्रदर्शनों से बताया गया है। पश्चिम बंगाल और असम ने भी अपने-अपने राज्यों में दर्ज छात्र प्रदर्शन से संबंधित FIR को खत्म करने की मांग की है। चारों राज्यों की कुल 116 FIR अब सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं।

दिल्ली की FIR पर केंद्र पहले ही पहुंच चुका है SC

इससे एक दिन पहले केंद्र ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया था। केंद्र ने दिल्ली पुलिस की 13 FIR खत्म करने की मांग की थी। साथ ही 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने का दावा किया गया है।

केंद्र का प्रस्ताव है कि एक ही घटना से संबंधित मामलों में अलग-अलग FIR के बजाय एक नई FIR के माध्यम से चिन्हित आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका की जांच की जाए।

5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले बढ़ी हलचल

इन सभी अर्जियों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि छात्र संगठन 5 सितंबर को दिल्ली में नए प्रदर्शन का ऐलान कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केंद्र द्वारा किया गया कथित आश्वासन पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार सुबह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अनुरोध किया कि चारों राज्यों की अर्जियों को केंद्र की दिल्ली वाली अर्जी के साथ दोपहर 2 बजे सुनवाई के लिए लिया जाए।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के सामने अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी 116 FIR को रद्द किया जा सकता है। साथ ही दिल्ली की 13 FIR और 2,873 लोगों के खिलाफ प्रस्तावित नई FIR पर भी अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल FIR रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।