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₹491 करोड़ की जमीन पर बड़ा फैसला, कोल्हापुर में 48 एकड़ जमीन सरकार के नाम दर्ज
कोल्हापुर के ताराबाई पार्क स्थित ‘अमेरिकन मिशन बंगला’ की करीब 48 एकड़ बेशकीमती जमीन अब महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज हो गई है। जमीन के रिकॉर्ड में हुए पुराने बदलाव और कथित निजी लेन-देन की जांच के बाद प्रशासन ने सरकारी हक बहाल किया है। जमीन पर मौजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी शुरू होने की तैयारी है।

कोल्हापुर: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में लंबे समय से विवादों में रही ‘अमेरिकन मिशन बंगला’ की जमीन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने जमीन के एक बड़े हिस्से को सरकारी हक में दर्ज कर दिया है। कोल्हापुर के ताराबाई पार्क इलाके में स्थित इस बेशकीमती जमीन के प्रॉपर्टी कार्ड पर अब ‘महाराष्ट्र शासन’ का नाम दर्ज हो गया है। प्रशासन ने जमीन पर मौजूद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
करीब 55 एकड़ का था पूरा भूखंड
यह मामला शहर के मध्यवर्ती इलाके में स्थित सिटी सर्वे नंबर 259/अ, जिसे ‘अमेरिकन मिशन बंगला’ के नाम से जाना जाता है, से जुड़ा है। उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पूरे भूखंड का क्षेत्रफल 2,24,035.90 वर्गमीटर यानी करीब 55 एकड़ है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 491 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, पूरे भूखंड में से टेलीकॉम विभाग और शैक्षणिक संस्थाओं के कुछ हिस्से अलग रखे गए हैं। इनके करीब 31,928 वर्गमीटर क्षेत्र को छोड़ने के बाद शेष 1,92,107.90 वर्गमीटर, यानी करीब 47.5 एकड़, जमीन को सरकारी हक में जमा किया गया है।
1939 से जुड़ा है जमीन का रिकॉर्ड
प्रशासन के अनुसार इस जमीन का इतिहास काफी पुराना है। 8 फरवरी 1939 के हुजूर मुलकी ठराव क्रमांक 392 के तहत यह जमीन ‘अमेरिकन मिशन बंगला’ के नाम से पट्टे की शर्तों पर अस्थायी रूप से दी गई थी। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का मूल दर्जा ‘ब’ सत्ता प्रकार था। इसका मतलब जमीन सरकारी स्वामित्व वाली और हस्तांतरण पर प्रतिबंध वाली श्रेणी में थी। बाद में वर्ष 2010 में जमीन के सत्ता प्रकार को ‘ब’ से बदलकर ‘क’ किए जाने का आदेश दिया गया। इसके बाद जमीन को निजी संपत्ति मानकर अलग-अलग लोगों के बीच लेन-देन किए जाने के आरोप सामने आए।
2010 के फैसले पर उठे सवाल
जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव के बाद इस भूखंड के अलग-अलग हिस्सों में खरीद-बिक्री के व्यवहार होने लगे। इसी प्रक्रिया को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई और प्रशासनिक स्तर पर मामले की सुनवाई शुरू हुई। जांच के बाद 8 जनवरी 2024 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने 2010 में किया गया सत्ता प्रकार परिवर्तन रद्द कर दिया और जमीन का मूल ‘ब’ सत्ता प्रकार बहाल कर दिया। इसके खिलाफ विभागीय आयुक्त के स्तर पर अपील की गई, लेकिन 29 मई 2025 को अतिरिक्त विभागीय आयुक्त ने जिलाधिकारी के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला राज्य स्तर पर पहुंचा। 30 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपील और पुनर्विचार याचिकाएं खारिज करते हुए जमीन का ‘ब’ सत्ता प्रकार अंतिम रूप से कायम रखा।
जांच में सामने आईं कई अनियमितताएं
राज्य स्तर पर फैसला होने के बाद अगस्त 2026 में जमीन की दोबारा जांच और मौके पर निरीक्षण किया गया। प्रशासन के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। अधिकारियों को जमीन के पट्टे का बकाया किराया जमा किए जाने का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके अलावा पट्टे का नवीनीकरण भी नहीं हुआ था। जांच में यह भी सामने आया कि सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना मूल सिटी सर्वे नंबर के 1 से 9 उप-विभाग बनाए गए और जमीन के अलग-अलग हिस्सों की बिक्री की गई। मौके की जांच में जमीन के बड़े हिस्से पर झोपड़ियां और व्यावसायिक निर्माण भी पाए गए। प्रशासन के अनुसार जमीन का इस्तेमाल उस मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं हो रहा था जिसके लिए इसे पट्टे पर दिया गया था।
27 अगस्त के आदेश के बाद सरकार के नाम दर्ज हुई जमीन
जमीन के स्वामित्व और सत्ता प्रकार को लेकर चली लंबी कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद 27 अगस्त 2026 के आदेश के तहत शेष जमीन को सरकारी हक में जमा करने की कार्रवाई की गई। इसके बाद नगर भूमापन अधिकारी ने प्रॉपर्टी कार्ड में ‘महाराष्ट्र शासन’ के नाम की आधिकारिक नोंद दर्ज की। जिला प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, 1966 की संबंधित धाराओं के तहत की गई है।
अब अतिक्रमण हटाने की तैयारी
सरकार के नाम जमीन दर्ज होने के बाद अब इस भूखंड पर मौजूद अतिक्रमण प्रशासन के रडार पर हैं। जिलाधिकारी डॉ. विजय राठोड के अनुसार, जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जमीन के कुछ हिस्सों पर पहले से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय स्तर पर वहां रहने वाले और कारोबार करने वाले लोगों में भी कार्रवाई को लेकर चिंता पैदा हुई है।
भविष्य में सरकारी कार्यालयों के लिए इस्तेमाल की संभावना
यह जमीन कोल्हापुर शहर के बेहद महत्वपूर्ण इलाके में स्थित है और जिलाधिकारी कार्यालय के नजदीक है। ऐसे में सरकारी नियंत्रण में आने के बाद इस बड़े भूखंड का भविष्य में सरकारी कार्यालयों या अन्य सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन का तत्काल फोकस जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह सरकारी नाम पर सुरक्षित करने और अनधिकृत कब्जों पर नियमानुसार कार्रवाई करने पर है।
क्या है पूरा मामला?
- स्थान: ताराबाई पार्क, कोल्हापुर
- सिटी सर्वे नंबर: 259/अ
- पूरा मूल क्षेत्र: 2,24,035.90 वर्गमीटर, करीब 55 एकड़
- सरकार के नाम दर्ज हिस्सा: 1,92,107.90 वर्गमीटर, करीब 47.5 एकड़
- अनुमानित कीमत: करीब ₹491 करोड़
- मूल सत्ता प्रकार: ‘ब’ — सरकारी, हस्तांतरण पर प्रतिबंध वाली जमीन
- 2010: सत्ता प्रकार ‘ब’ से ‘क’ किया गया
- 8 जनवरी 2024: 2010 का आदेश रद्द, ‘ब’ सत्ता प्रकार बहाल
- 29 मई 2025: अतिरिक्त विभागीय आयुक्त ने फैसला कायम रखा
- 30 अप्रैल 2026: राजस्व मंत्री ने अपीलें खारिज कर ‘ब’ सत्ता प्रकार अंतिम रूप से कायम रखा
- 27 अगस्त 2026: शेष जमीन सरकारी हक में जमा
- 1 सितंबर 2026: प्रॉपर्टी कार्ड पर महाराष्ट्र सरकार का नाम और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की तैयारी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ जमीन के स्वामित्व का विवाद नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव, उसके बाद हुए कथित निजी लेन-देन और अतिक्रमण पर प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा बड़ा मामला है।
