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सुकेश चंद्रशेखर को 8 साल की सजा, खुद को जज बताकर दी थी धमकी l

महाठग सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर एक आपराधिक मामले में चल रही जमानत की कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश करने के मामले में उसे 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सुकेश ने पुलिस हिरासत के दौरान कांस्टेबल के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर मामले की सुनवाई कर रही स्पेशल जज पूनम चौधरी से संपर्क किया था। उसने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के जज का प्राइवेट सेक्रेटरी और बाद में सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा जज बताया था। अदालत ने उसकी इस हरकत को न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और पवित्रता पर सीधा हमला करार दिया है।

Kashish Rai01 सित. 2026, 05:11 PM IST
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सुकेश चंद्रशेखर को 8 साल की सजा, खुद को जज बताकर दी थी धमकी l

महाठग सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा उसे खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर एक आपराधिक मामले में चल रही जमानत की कार्यवाही को प्रभावित करने और निचली अदालत की जज पर दबाव बनाने के मामले में मिली है। अदालत ने सुकेश को भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 170, धारा 189 और धारा 507 के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, धारा 170 के तहत सुकेश को 2 साल, धारा 189 के तहत 2 साल और धारा 507 के तहत 4 साल की सजा सुनाई गई है। तीनों सजाएं एक साथ नहीं, बल्कि लगातार चलेंगी। इस तरह उसकी कुल सजा 8 साल की हो गई है।

खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताया

यह मामला अप्रैल 2017 का है। उस समय सुकेश चंद्रशेखर भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में पुलिस हिरासत में था। पुलिस कांस्टेबल मंजीत उसकी निगरानी कर रहा था। आरोप है कि इसी दौरान सुकेश ने कांस्टेबल के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और उस मामले की सुनवाई कर रही स्पेशल जज पूनम चौधरी से संपर्क किया। सुकेश ने जज के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल फोन पर फोन किया। बातचीत के दौरान उसने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का प्राइवेट सेक्रेटरी बताया। इसके बाद उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट का सिटिंग जज यानी मौजूदा जज बताकर अपनी पहचान पेश की। आरोप है कि सुकेश ने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल जमानत की कार्यवाही को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए किया। उसने स्पेशल जज पर जल्द से जल्द जमानत मंजूर करने का दबाव बनाया। जब उसकी बात नहीं मानी गई तो उसने कथित तौर पर जज को पेशेवर नुकसान भुगतने की धमकी भी दी।

न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा हमला

तीस हजारी कोर्ट की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा ने सुकेश को दोषी ठहराते हुए उसकी हरकत पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह महज धोखाधड़ी का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और पवित्रता पर सीधा हमला है। कोर्ट ने माना कि आरोपी ने न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने के लिए एक सुनियोजित तरीके से झूठी पहचान का इस्तेमाल किया। उसने खुद को संवैधानिक संस्था से जुड़ा व्यक्ति बताकर अदालत की कार्यवाही में दखल देने की कोशिश की और जज पर दबाव बनाने का प्रयास किया। अदालत ने सुकेश की इस कोशिश को संस्थागत अवहेलना बताया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को धमकी, दबाव, फर्जी पहचान या प्रभाव के जरिए फैसला बदलने की कोशिश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

‘मूर्खतापूर्ण नाटकीय प्रस्तुति’ पर कोर्ट सख्त

फैसला सुनाते हुए अदालत ने सुकेश की पहचान बदलने और खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताने की कोशिश को उसकी ‘मूर्खतापूर्ण नाटकीय प्रस्तुति’ करार दिया। कोर्ट के मुताबिक, सुकेश ने इस पूरे घटनाक्रम में मर्यादा की सभी सीमाएं पार कर दीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश केवल संबंधित मामले तक सीमित नहीं रहती। ऐसी हरकतों से पूरी न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता और अदालतों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सख्त सजा सुनाई।

कांस्टेबल मंजीत की भूमिका पर भी सवाल

इस मामले में पुलिस कांस्टेबल मंजीत की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अदालत ने गंभीर सवाल उठाया कि पुलिस हिरासत में रहने के बावजूद सुकेश चंद्रशेखर को कांस्टेबल का मोबाइल फोन कैसे मिला। सुकेश ने इसी मोबाइल फोन से स्पेशल जज के आधिकारिक फोन नंबरों पर संपर्क किया था। ऐसे में कोर्ट ने कांस्टेबल मंजीत की भूमिका की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है। जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि मोबाइल फोन सुकेश तक किस तरह पहुंचा और क्या इस पूरी घटना में कांस्टेबल की किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत थी। अदालत के निर्देश के बाद अब जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल करेंगी कि पुलिस हिरासत के दौरान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि फोन उपलब्ध कराने या फोन के इस्तेमाल को लेकर कांस्टेबल की कोई भूमिका थी या नहीं।

दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती

तीस हजारी कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उसने निचली अदालत के निर्णय को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। अब हाई कोर्ट में यह मामला सुना जाएगा और वहां सुकेश की ओर से निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाए जाएंगे। हालांकि, फिलहाल तीस हजारी कोर्ट का फैसला सुकेश के खिलाफ है और उसे कुल 8 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इस मामले के अलावा सुकेश चंद्रशेखर पर कई अन्य आपराधिक मामले भी चल रहे हैं।

200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला

सुकेश चंद्रशेखर पर तिहाड़ जेल से 200 करोड़ रुपये से अधिक की रंगदारी और ठगी करने के आरोप भी हैं। इन मामलों में भी उसके खिलाफ जांच और कानूनी कार्यवाही चल रही है। इस तरह तीस हजारी कोर्ट का यह फैसला सुकेश के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई में एक और बड़ा घटनाक्रम है। एक मामले में अदालत ने उसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश का दोषी माना, जबकि अन्य मामलों में सुनवाई और जांच अभी जारी है।