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PM मोदी का SCO में बड़ा बयान, आतंकवाद के खिलाफ Zero Tolerance और क्षेत्रीय शांति पर जोर
26वें SCO Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई, क्षेत्रीय शांति, बेहतर Connectivity और आर्थिक सहयोग को भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा। उन्होंने सदस्य देशों के बीच Trade, Investment, Digital Cooperation और Youth Engagement बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) Summit में भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक सहयोग पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब SCO क्षेत्र में सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद को क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने SCO देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। भारत लंबे समय से SCO के मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई और सहयोग को प्रमुख मुद्दा बनाता रहा है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास के लिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। आतंकवाद और हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास भी प्रभावित होता है।
शांति और संवाद पर भारत का जोर
प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय और वैश्विक विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को महत्वपूर्ण बताया। SCO को भारत एक ऐसे मंच के रूप में देखता है जहां सदस्य देश साझा चुनौतियों पर बातचीत और सहयोग के जरिए आगे बढ़ सकते हैं। SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग बैठक में उन्होंने युद्ध समाप्त करने और शांति के प्रयासों का समर्थन किया।
कनेक्टिविटी और व्यापार पर फोकस
भारत ने SCO के भीतर व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने ऐसे परिवहन और संपर्क मार्गों के महत्व को रेखांकित किया जो विभिन्न देशों के बीच व्यापार को आसान बना सकें। भारत के लिए चाबहार पोर्ट और International North-South Transport Corridor (INSTC) जैसे प्रोजेक्ट मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र से जुड़ने की रणनीति में महत्वपूर्ण हैं।
आर्थिक सहयोग बढ़ाने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत बताई। व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया। भारत का जोर ऐसे सहयोग पर है जिससे SCO देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हों और क्षेत्र में विकास के नए अवसर पैदा हों।
युवाओं और डिजिटल सहयोग पर भी जोर
SCO Summit में भारत ने युवा भागीदारी, डिजिटल परिवर्तन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को क्षेत्र के भविष्य का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनके बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सदस्य देशों के बीच डिजिटल सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया।
भारत की SCO नीति के तीन प्रमुख आधार
भारत की SCO नीति में Security, Connectivity और Opportunity यानी सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को प्रमुख आधार माना जाता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी SCO के संदर्भ में इन तीनों प्राथमिकताओं को भारत की दृष्टि के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रखा है।
चीन और रूस के नेताओं से भी मुलाकात
SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत भी हुई। मोदी और दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकातों को भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा ईरान समेत अन्य SCO सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SCO Summit?
SCO भारत के लिए मध्य एशिया और यूरेशियाई क्षेत्र के साथ अपने संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। संगठन के माध्यम से भारत सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, डिजिटल तकनीक और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर दूसरे सदस्य देशों के साथ काम कर सकता है। 26वें SCO Summit में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने एक बार फिर भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया—आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, क्षेत्रीय शांति, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग।
