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कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में भीषण धमाका, 11 की मौत; कई घायल सबहेडलाइन l
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में प्रयागराज सीमा के पास एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना तेज था कि आसपास के कई मकान इसकी चपेट में आ गए। पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार को एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट से हड़कंप मच गया। यह हादसा प्रयागराज और कौशांबी की सीमा के पास पिपरी थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव और मनौरी इलाके में हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री का भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास के कई मकान भी इसकी चपेट में आ गए। विस्फोट के बाद इलाके में धुएं का गुबार छा गया और लगातार पटाखे फटने से लोगों में दहशत फैल गई। कौशांबी के जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल समेत अन्य चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया।
धुआं उठने के बाद हुए धमाके
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह बस्ती से कुछ दूरी पर स्थित था। सोमवार दोपहर अचानक इस मकान से धुआं उठता दिखाई दिया। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले वहां रखे पटाखों में एक के बाद एक धमाके होने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाकों की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के कारण आसपास के मकानों की दीवारें और छतें क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ लोग मलबे में दब गए, जबकि कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
फैक्ट्री के ऊपर से बिजली के तार गुजरने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि विस्फोट शॉर्ट सर्किट, पटाखों के भंडारण, रासायनिक प्रतिक्रिया या किसी अन्य वजह से हुआ।
राहत और बचाव अभियान जारी
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। किसी और विस्फोट या अनहोनी की आशंका को देखते हुए आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और आपदा राहत दलों को लगाया गया। अधिकारियों ने मलबे और क्षतिग्रस्त भवन के आसपास तलाशी अभियान चलाया।
जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराना है। राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा सकेगा।
फैक्ट्री की अनुमति की जांच
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन इस बात की जांच कर रहे हैं कि फैक्ट्री में पटाखे बनाने और उनके भंडारण के लिए वैध अनुमति थी या नहीं। सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि आबादी के पास पटाखा निर्माण का काम किसकी अनुमति से चल रहा था। फैक्ट्री में कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और वहां अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, इसकी जांच भी की जा रही है। मामले में फैक्ट्री संचालक और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों की लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
CM योगी ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट का संज्ञान लेते हुए हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को घायलों का बेहतर इलाज कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत और उपचार कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से संपर्क बनाए रखने और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
गांव में पसरा मातम
हादसे के बाद मोहम्मदपुर और आसपास के गांवों में मातम का माहौल है। मृतकों में बच्चों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है, जिससे घटना की भयावहता और बढ़ गई है। परिवारों के लोग अस्पतालों और घटनास्थल के बाहर अपनों की तलाश में जुटे रहे।
स्थानीय लोगों ने आबादी के बीच पटाखा निर्माण और भंडारण को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा नियमों की जांच की होती तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल पुलिस विस्फोट के वास्तविक कारणों, फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किस वजह से हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
