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जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल करने पर बड़ा अपडेट, ज्यादातर हाईकोर्ट तैयार; कई राज्यों ने खींचे हाथ

जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा अपडेट सामने आया है। ज्यादातर हाईकोर्ट 61 या 62 साल तक सेवा बढ़ाने के पक्ष में हैं, लेकिन कई राज्यों की असहमति ने पूरे देश में एक समान नियम लागू करने पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

Sonali02 सित. 2026, 03:28 PM IST
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जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल करने पर बड़ा अपडेट, ज्यादातर हाईकोर्ट तैयार; कई राज्यों ने खींचे हाथ

जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा अपडेट सामने आया है। ज्यादातर हाईकोर्ट जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 61 या 62 साल करने के पक्ष में हैं, लेकिन कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की असहमति के कारण देशभर में एक समान व्यवस्था लागू करने का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से दोबारा सकारात्मक रुख अपनाने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

यह मामला All India Judges Association से जुड़ी याचिका में सामने आया है। 1 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि अधिकांश हाईकोर्ट उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव से सहमत हैं, जबकि कई राज्य या तो इसका विरोध कर रहे हैं या अभी फैसला नहीं ले पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की तुलना सामान्य सरकारी कर्मचारियों से नहीं की जा सकती। कोर्ट के मुताबिक न्यायिक सेवा में प्रवेश सामान्य सरकारी सेवा की तुलना में अधिक उम्र में होता है। इसलिए रिटायरमेंट की उम्र में दो साल का अंतर रखना उचित हो सकता है।

CJI ने राज्यों की आपत्ति पर क्या कहा?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों की सेवा परिस्थितियां अलग हैं। सामान्य सरकारी कर्मचारी कम उम्र में नौकरी शुरू कर सकता है, जबकि न्यायिक सेवा में प्रवेश अपेक्षाकृत अधिक उम्र में होता है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को अधिक समय तक सेवा का अवसर मिलना तार्किक है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की दलील में ज्यादा दम नहीं है। अगर न्यायिक अधिकारी कुछ वर्ष अतिरिक्त सेवा में रहते हैं तो उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान भी बाद में होगा।

कौन से राज्य विरोध में हैं?

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

वहीं असम, बिहार, गोवा, गुजरात, त्रिपुरा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य अभी इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, सिक्किम और पुडुचेरी ने उम्र बढ़ाने के प्रति सहमति जताई है। पुडुचेरी ने 61 साल के लिए मूल रूप से सहमति जताते हुए 62 साल पर विचार करने की बात कही है।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट दे चुका है निर्देश

जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित हाईकोर्ट से सलाह लेकर जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल करने पर फैसला लेने को कहा था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि 61 साल की व्यवस्था अंतिम निर्णय तक अंतरिम आधार पर लागू हो सकती है, जहां राज्य सरकार और संबंधित हाईकोर्ट दोनों सहमत हों। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या देशभर के जिला न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र समान रूप से 62 साल होगी। फिलहाल इस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है। मामले की अगली सुनवाई करीब दो सप्ताह बाद होगी और कोर्ट को उम्मीद है कि असहमत राज्य अपने रुख पर दोबारा विचार करके जवाब देंगे।