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दिशा सालियान मौत की अब CBI जांच: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सबूत मिले तो चार्जशीट, नहीं तो क्लोजर रिपोर्ट

दिशा सालियान मौत मामले में 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने CBI जांच का रास्ता साफ करते हुए स्पष्ट कहा कि पर्याप्त और ठोस सामग्री के बिना किसी भी व्यक्ति को आरोपी मानकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

Sonali02 सित. 2026, 03:28 PM IST
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दिशा सालियान मौत की अब CBI जांच: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सबूत मिले तो चार्जशीट, नहीं तो क्लोजर रिपोर्ट

दिशा सालियान मौत केस में बड़ा मोड़: बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच का दिया आदेश, कहा- पर्याप्त सबूत के बिना किसी को आरोपी न मानें दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान केवल आरोप या संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता। किसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए जांच अधिकारी के सामने पर्याप्त सामग्री और उचित आधार होना जरूरी है।


क्या है पूरा मामला?

दिशा सालियान अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक हाईराइज इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे आकस्मिक मौत की घटना के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर अलग-अलग तरह के सवाल और आरोप सामने आए। दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर संदेह जताते हुए हत्या और गैंगरेप के आरोप लगाए तथा FIR दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की।


पिता की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई

दिशा के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर FIR दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। यह मामला Satish Salian vs State of Maharashtra के नाम से कोर्ट के सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि मुंबई पुलिस ने मामले की जांच उचित तरीके से नहीं की और परिवार को महत्वपूर्ण दस्तावेज भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने जांच को लेकर मुंबई पुलिस से सवाल किए थे। नवंबर 2025 में अदालत ने पूछा था कि दिशा की मौत के पांच साल बाद भी जांच पूरी क्यों नहीं हुई। अगस्त 2026 में भी कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया था कि जब परिवार की ओर से हत्या की आशंका जताई जा रही है तो FIR दर्ज करने में क्या बाधा है।


2 सितंबर को कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजितसिंहा भोंसले की डिवीजन बेंच ने CBI को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने CBI के मुंबई क्षेत्र के ज्वाइंट डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वे एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करें, जो शिकायतकर्ता का बयान दर्ज कर FIR की प्रक्रिया आगे बढ़ाए। साथ ही मुंबई पुलिस को मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज और भौतिक साक्ष्य CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया।


आरोप लगे तो भी तुरंत आरोपी नहीं माना जाएगा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण सावधानी भी बरती। अदालत ने साफ किया कि CBI जांच का आदेश किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का संकेत नहीं है। जब तक जांच अधिकारी के पास किसी व्यक्ति के खिलाफ उचित संदेह पैदा करने वाली पर्याप्त सामग्री नहीं मिलती, तब तक उसे आरोपी नहीं माना जाएगा। यानी कोर्ट ने एक तरफ स्वतंत्र जांच का रास्ता खोला है, वहीं दूसरी तरफ केवल आरोपों के आधार पर किसी की छवि या कानूनी स्थिति प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखा है।


सबूत मिले तो चार्जशीट, नहीं तो क्लोजर रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने CBI को जांच के नतीजे के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। यदि जांच में संज्ञेय अपराध सामने आता है तो CBI को जल्द से जल्द सक्षम अदालत के समक्ष चार्जशीट या उचित रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। वहीं, यदि जांच में कोई अपराध साबित नहीं होता है तो CBI को कानून के मुताबिक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। दिशा के पिता को ऐसी स्थिति में क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।


अब CBI जांच से क्या खुलेगा?

इस आदेश के बाद अब दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की नए सिरे से जांच हो सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं हुआ है और किसी को आरोपी घोषित नहीं किया गया है। कोर्ट का आदेश जांच की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। अब सबकी नजर CBI की जांच पर होगी कि वह उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस रहस्यमय मौत की वास्तविक परिस्थितियों तक किस तरह पहुंचती है।