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एक याचिका से नहीं बचेगी कोर्ट फीस! बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अलग-अलग दावा तो हर याचिकाकर्ता को देनी होगी फीस

एक याचिका में कई नाम जोड़कर कोर्ट फीस बचाना अब आसान नहीं होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ किया कि अगर संयुक्त याचिका में हर याचिकाकर्ता का दावा और राहत अलग है, तो प्रत्येक को अलग कोर्ट फीस देनी होगी। हालांकि, समान कारण और सामूहिक राहत वाले मामलों में एक ही फीस पर्याप्त होगी।

Sonali02 सित. 2026, 03:28 PM IST
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एक याचिका से नहीं बचेगी कोर्ट फीस! बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अलग-अलग दावा तो हर याचिकाकर्ता को देनी होगी फीस

मुंबई:

 बॉम्बे हाईकोर्ट ने संयुक्त याचिका दाखिल करने वाले कई याचिकाकर्ताओं के लिए कोर्ट फीस को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि कई लोगों ने मिलकर एक ही writ petition दाखिल की है, यह जरूरी नहीं कि सभी को एक ही कोर्ट फीस देनी होगी। यदि संयुक्त याचिका में शामिल प्रत्येक व्यक्ति का cause of action अलग है और वह अपने लिए अलग राहत या व्यक्तिगत लाभ मांग रहा है, तो कोर्ट फीस भी प्रत्येक याचिकाकर्ता के हिसाब से देनी होगी। वहीं, यदि सभी याचिकाकर्ताओं का cause of action एक ही या समान है और मांगी गई राहत पूरे समूह को सामूहिक रूप से लाभ पहुंचाती है, तो एक सेट कोर्ट फीस पर्याप्त होगी। यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने 25 अगस्त 2026 को सुनाया। मामला Satyam A. Surana v. High Court of Bombay through Registrar General से जुड़ा था। विवाद महाराष्ट्र Court Fees Act, 1959 की Schedule II की Entry 1(f)(ii) के तहत संविधान के Articles 226 और 227 के अंतर्गत दाखिल याचिकाओं पर लगने वाली फीस को लेकर था।


क्या था पूरा विवाद?

मुख्य writ petition में कई याचिकाकर्ता शामिल थे और उनसे 250 रुपये प्रति याचिकाकर्ता कोर्ट फीस जमा करने को कहा गया। इसके बाद अदालत में Interim Application दाखिल कर मांग की गई कि कानून में कोर्ट फीस “Application or Petition” के लिए निर्धारित है, इसलिए फीस “Per Petition” होनी चाहिए, न कि “Per Petitioner”। आवेदक की दलील थी कि Maharashtra Court Fees Act में कहीं भी “Per Petitioner” या “For Each Petitioner” जैसे शब्द नहीं लिखे हैं। इसलिए एक संयुक्त याचिका पर केवल एक ही कोर्ट फीस ली जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Mota Singh and Others v. State of Haryana and Others फैसले का हवाला दिया। उस मामले में कई ट्रक मालिकों ने संयुक्त याचिका दाखिल की थी, लेकिन प्रत्येक का अपना अलग cause of action था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि जब प्रत्येक याचिकाकर्ता का दावा अलग है, तो प्रत्येक को कानून के अनुसार कोर्ट फीस का भुगतान करना होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि संयुक्त याचिका दाखिल करने से अलग-अलग व्यक्तिगत दावों की प्रकृति नहीं बदल जाती।


कब लगेगी एक ही कोर्ट फीस?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कई लोग किसी एक समान कार्रवाई या आदेश से प्रभावित हैं और अदालत से मांगी गई राहत पूरे समूह को सामूहिक रूप से मिलेगी, तो एक सेट कोर्ट फीस पर्याप्त हो सकती है। लेकिन यदि हर याचिकाकर्ता अपने अलग अधिकार, अलग आर्थिक लाभ या व्यक्तिगत राहत के लिए अदालत आया है, तो हर व्यक्ति को अलग कोर्ट फीस देनी होगी।


पेंशन लाभ से जुड़ा था मामला

मौजूदा मामले में याचिकाकर्ताओं ने उच्च पेंशन, पेंशन संबंधी लाभ और बकाया राशि जैसे व्यक्तिगत लाभों की मांग की थी। अदालत ने माना कि यदि याचिका सफल होती है तो प्रत्येक याचिकाकर्ता को अलग-अलग लाभ मिलेगा। इसलिए प्रत्येक याचिकाकर्ता से अलग कोर्ट फीस लेना उचित है। कोर्ट का संदेश साफ है—एक ही याचिका में कई नाम जोड़ देने से कोर्ट फीस की देनदारी खत्म नहीं होती। असली सवाल यह है कि सभी का cause of action और मांगी गई राहत सामूहिक है या व्यक्तिगत।