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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: पांच साल बाद बना खास संयोग, 4 सितंबर को मनाया जाएगा कान्हा का जन्मोत्सव

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि करीब पांच साल बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग बन रहा है। काशी में मंदिरों, मठों, आश्रमों और घरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां चल रही हैं। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती की जाएगी।

sd03 सित. 2026, 04:39 PM IST
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: पांच साल बाद बना खास संयोग, 4 सितंबर को मनाया जाएगा कान्हा का जन्मोत्सव

पांच साल बाद बन रहा खास संयोग

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का होना विशेष माना जाता है।इस बार 4 सितंबर को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। काशी के ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ऐसा संयोग इससे पहले 2021 में देखने को मिला था। यही वजह है कि इस साल की जन्माष्टमी को खास माना जा रहा है।

4 सितंबर को मनाई जाएगी जन्माष्टमी

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रहेगी। इसी दिन जन्माष्टमी का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ माना जाता है। इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में रात 12 बजे के आसपास का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखने के बाद रात में कान्हा के जन्म का इंतजार करते हैं।

काशी में मंदिरों से लेकर घरों तक तैयारी

वाराणसी में जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों, मठों और आश्रमों में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

कई जगहों पर मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जा रहा है। बाल गोपाल के लिए झूले तैयार किए जा रहे हैं। घरों में भी लोग पूजा की तैयारी कर रहे हैं और लड्डू गोपाल के लिए नए कपड़े, मुकुट और अन्य श्रृंगार की चीजें जुटा रहे हैं।

रात 12 बजे होगा कान्हा का जन्म

जन्माष्टमी के दिन सबसे खास पल रात 12 बजे का होता है। मान्यता है कि इसी समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। रात में भगवान का अभिषेक करने के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। इसके बाद फूलों से श्रृंगार किया जाएगा और माखन-मिश्री, दूध, दही, फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाएगा। जन्म के समय मंदिरों में घंटियां और शंख बजाए जाएंगे। इसके बाद भगवान की आरती की जाएगी और भक्तों को प्रसाद बांटा जाएगा।

व्रत रखने वाले भक्तों के लिए भी खास दिन

जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन बिना अन्न के रहते हैं, जबकि कई भक्त फल और दूध आदि का सेवन करते हुए व्रत रखते हैं। अधिकतर लोग रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा करके व्रत खोलते हैं। हालांकि व्रत खोलने यानी पारण का समय अलग-अलग पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकता है।

रोहिणी नक्षत्र क्यों है महत्वपूर्ण?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष माना जाता है।

इस बार अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने से श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया है। हालांकि नक्षत्र और उसके प्रभाव से जुड़ी बातें धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

मथुरा-वृंदावन में भी दिखेगा उत्साह

जन्माष्टमी का सबसे बड़ा उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और वृंदावन में देखने को मिलता है। यहां मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन, झांकियां और जन्मोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश के दूसरे हिस्सों में भी मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में जन्माष्टमी की तैयारियां चल रही हैं।

इस बार क्यों खास है जन्माष्टमी?

2026 की जन्माष्टमी इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक ही दिन बन रहा है। काशी में इसे लेकर खास उत्साह है और मंदिरों में जन्मोत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां की जा रही हैं। यानी इस बार 4 सितंबर की रात भक्तों के लिए खास होने वाली है। दिनभर व्रत और पूजा के बाद आधी रात को जैसे ही कान्हा का जन्म होगा, मंदिरों में जयकारों से माहौल भक्तिमय हो जाएगा।