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पंजाब की जेलों में नशे का बड़ा संकट! 35 हजार कैदियों में 15,768 ड्रग-डिपेंडेंट, हाईकोर्ट ने कहा- इससे गंभीर कुछ नहीं

पंजाब में नशे का संकट अब सिर्फ सड़कों और गांवों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जेलों की चारदीवारी के भीतर भी इसकी भयावह तस्वीर सामने आई है। पंजाब की 25 जेलों में बंद 35,449 कैदियों में से 15,768 कैदी OOAT उपचार से जुड़े हैं—यानी करीब 44.5 फीसदी कैदी ओपिओइड निर्भरता के इलाज पर हैं। इन आंकड़ों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गंभीर चुनौती कुछ नहीं हो सकती और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

Sonali03 सित. 2026, 04:41 PM IST
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पंजाब की जेलों में नशे का बड़ा संकट! 35 हजार कैदियों में 15,768 ड्रग-डिपेंडेंट, हाईकोर्ट ने कहा- इससे गंभीर कुछ नहीं

पंजाब में नशे के खिलाफ जंग की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर अब जेलों की चारदीवारी के भीतर से सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब की 25 जेलों में कुल 35,449 कैदी बंद हैं। इनमें से 15,768 कैदी Out-Patient Opioid Assisted Treatment यानी OOAT क्लीनिक से जुड़े हुए हैं। यह संख्या कुल कैदियों की करीब 44.5 प्रतिशत है। आंकड़ों ने हाईकोर्ट की चिंता बढ़ा दी है और अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर चुनौती बताते हुए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है।


हाईकोर्ट ने पूछा- नशे से बाहर निकालने की नीति क्या है?

मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस राजेश गौर की डिवीजन बेंच कर रही है। अदालत ने सरकार से सवाल किया कि नशे पर निर्भर कैदियों को केवल जेल में दवा उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें इस निर्भरता से बाहर निकालने के लिए क्या ठोस नीति बनाई गई है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि कैदियों को लंबे समय तक नशे की निर्भरता में नहीं छोड़ा जा सकता। उपचार के साथ-साथ काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। हाईकोर्ट इस मामले की नियमित निगरानी भी कर रहा है और सुनवाई साप्ताहिक आधार पर किए जाने की बात कही गई है।


मानसा जेल से सामने आया था गंभीर मामला

यह मामला हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ। इसकी शुरुआत मानसा से जुड़े जिला न्यायपालिका के प्रशासनिक न्यायाधीश की 23 जून 2026 की रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट में जेल में बड़ी संख्या में नशे पर निर्भर कैदियों को Buprenorphine और Naloxone के संयोजन से उपचार दिए जाने का उल्लेख था। मानसा जेल के आंकड़ों ने अदालत को खास तौर पर चिंतित किया। वहां 767 कैदियों में से 530 कैदी OOAT क्लीनिक में पंजीकृत थे। यानी करीब 69 प्रतिशत कैदी इस उपचार व्यवस्था से जुड़े थे। इसके बाद अदालत ने पंजाब सरकार से राज्य की सभी जेलों का विस्तृत डेटा मांगा।


अमृतसर-बठिंडा जेल के आंकड़े भी चिंताजनक

सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर सेंट्रल जेल में 4,918 कैदियों में से 2,124 OOAT क्लीनिक से जुड़े हैं। वहीं बठिंडा जेल में 1,978 कैदियों में से 1,064 कैदी इस उपचार व्यवस्था में पंजीकृत हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रभावित कैदियों में बड़ी संख्या युवा उम्र के लोगों की है। 18 से 25 वर्ष की उम्र के 2,951, 26 से 35 वर्ष के 5,656 और 36 से 45 वर्ष के 4,544 कैदी उपचार व्यवस्था से जुड़े बताए गए हैं। इससे जेलों में नशे की समस्या के साथ युवा आबादी पर पड़ रहे असर को लेकर भी चिंता बढ़ी है।


जेल से बाहर आने के बाद क्या होगा?

हाईकोर्ट का फोकस सिर्फ जेल के अंदर उपचार तक सीमित नहीं है। अदालत यह जानना चाहती है कि रिहाई के बाद इन कैदियों के इलाज और फॉलो-अप की क्या व्यवस्था होगी। कितने लोग उपचार के बाद नशे की निर्भरता से बाहर आए और कितने दोबारा उसी स्थिति में लौटे, इसका रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माना गया है। हरियाणा-चंडीगढ़ से भी मांगा डेटा अब हाईकोर्ट ने हरियाणा और चंडीगढ़ की जेलों में नशे पर निर्भर कैदियों का डेटा भी मांगा है। केंद्र सरकार को भी मामले में सहायता करने को कहा गया है। चंडीगढ़ प्रशासन को PGIMER के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लेने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी। अब देखना होगा कि पंजाब सरकार अदालत के सामने नशे पर निर्भर कैदियों के उपचार, पुनर्वास और रिहाई के बाद फॉलो-अप के लिए कौन-सी ठोस कार्ययोजना पेश करती है।