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हनुमान चालीसा केस में नया मोड़: क्या FIR दर्ज होने से पहले ही राणा दंपती को गिरफ्तार करने पहुंच गई थी पुलिस? बॉम्बे हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

हनुमान चालीसा केस में बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने FIR की टाइमिंग को लेकर बड़ा सवाल उठा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है—क्या FIR दर्ज होने से पहले ही पुलिस राणा दंपती को गिरफ्तार करने पहुंच गई थी?

Sonali03 सित. 2026, 04:42 PM IST
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हनुमान चालीसा केस में नया मोड़: क्या FIR दर्ज होने से पहले ही राणा दंपती को गिरफ्तार करने पहुंच गई थी पुलिस? बॉम्बे हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मुंबई:

 2022 के चर्चित हनुमान चालीसा विवाद से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के समय को लेकर महाराष्ट्र पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह साफ करने को कहा है कि BJP नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा तथा उनके पति एवं विधायक रवि राणा के खिलाफ FIR पुलिस के उनके घर पहुंचने से पहले दर्ज हुई थी या पुलिस के गिरफ्तारी के लिए उनके आवास पर पहुंचने के बाद। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि राणा दंपती की ओर से FIR के समय को लेकर पुलिस के रिकॉर्ड में कथित अंतर की ओर अदालत का ध्यान खींचा गया है।

5:03 बजे पुलिस स्टेशन से निकली पुलिस, 5:23 बजे FIR का समय?

2 सितंबर 2026 को जस्टिस शिवकुमार डिगे की एकल पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। राणा दंपती की ओर से पेश अधिवक्ता रिजवान मर्चेंट ने दावा किया कि संबंधित FIR 23 अप्रैल 2022 को शाम 5:23 बजे दर्ज दिखाई गई है। वहीं, बचाव पक्ष ने उसी दिन की स्टेशन डायरी का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी शाम 5:03 बजे ही खार पुलिस स्टेशन से राणा दंपती को गिरफ्तार करने के लिए निकल गए थे। उनके मुताबिक, पुलिस लगभग 5:15 बजे राणा दंपती के आवास पर पहुंच गई थी। ऐसे में सवाल उठाया गया कि जिस FIR के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही थी, वह पुलिस के निकलने और कथित तौर पर आवास पर पहुंचने के समय तक दर्ज ही नहीं हुई थी।

सरकार ने क्या सफाई दी?

राज्य सरकार की ओर से पेश अभियोजक ने इस दलील का विरोध किया। उनका कहना था कि पुलिस को 23 अप्रैल को शाम करीब 4:30 बजे सूचना मिल गई थी कि राणा दंपती तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित निजी आवास ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले हैं। सरकार के मुताबिक, सूचना मिलने के तुरंत बाद FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद शाम 5:03 बजे स्टेशन डायरी में पुलिस अधिकारियों के राणा दंपती के आवास के लिए रवाना होने की एंट्री हुई। अभियोजन ने अदालत को बताया कि FIR पुलिस पोर्टल पर कुछ देर से अपलोड हुई, जिसके कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड में 5:23 बजे का समय दिखाई दे रहा है। अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इसी दावे को हलफनामे के जरिए स्पष्ट करने को कहा है।

क्या राणा दंपती ने मातोश्री का घेराव किया था?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या नवनीत राणा और रवि राणा वास्तव में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी आवास मातोश्री पहुंचे थे और वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया था।  राणा दंपती के वकील ने इसका जवाब नकारात्मक दिया। इसके बाद अदालत ने अभियोजन से FIR के समय और घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा। राज्य को 23 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है और मामले की अगली सुनवाई भी 23 सितंबर को होगी।

कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?

अप्रैल 2022 में नवनीत राणा और रवि राणा ने उद्धव ठाकरे के निजी आवास मातोश्री के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था। पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी थी और CrPC की धारा 149 के तहत नोटिस भी दिया गया था। बाद में 23 अप्रैल 2022 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय राणा दंपती के खिलाफ IPC की धारा 153A समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अब 2026 में मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा है। राणा दंपती ने विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज आवेदन खारिज किए जाने को चुनौती दी है। इसी सुनवाई के दौरान FIR के वास्तविक समय को लेकर सवाल उठा है।

क्या होगा आगे?

फिलहाल हाईकोर्ट ने FIR को अवैध घोषित नहीं किया है और न ही राणा दंपती को इस आधार पर कोई अंतिम राहत दी है। अदालत ने केवल राज्य सरकार से रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। 23 सितंबर को सरकार का हलफनामा आने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि FIR वास्तव में कब दर्ज हुई थी और स्टेशन डायरी में दर्ज पुलिस की कार्रवाई से उसका क्या संबंध था।