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नितिन गडकरी E20 डीपफेक केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का X को झटका, पुराने आदेश पर अमल का निर्देश; नया आपत्तिजनक कंटेंट भी हटेगा

सोशल मीडिया के डीपफेक कंटेंट पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त! नितिन गडकरी से जुड़े E20 विवाद में X को पुराने टेकडाउन आदेश का पालन करने और नया आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया गया है।

Sonali03 सित. 2026, 05:01 PM IST
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नितिन गडकरी E20 डीपफेक केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का X को झटका, पुराने आदेश पर अमल का निर्देश; नया आपत्तिजनक कंटेंट भी हटेगा

सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल नीति को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को कथित तौर पर जोड़ने वाले डीपफेक और AI-generated कंटेंट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने X (पूर्व में Twitter) को 5 अगस्त के अपने आदेश का पालन करते हुए आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही गडकरी की ओर से कोर्ट के संज्ञान में लाए गए नए आपत्तिजनक कंटेंट को भी संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा गया है।

5 अगस्त के आदेश का पालन क्यों जरूरी हुआ?

2 सितंबर 2026 को जस्टिस अरिफ डॉक्टर की एकल पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। गडकरी की ओर से पेश अधिवक्ता संदीप लड्डा ने कोर्ट को बताया कि 5 अगस्त को स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद X पर कुछ आपत्तिजनक सामग्री अभी भी मौजूद है। वहीं Instagram जैसे अन्य प्लेटफॉर्म संबंधित सामग्री हटा चुके हैं। इस पर कोर्ट ने X को अपने पहले के आदेश का पालन करने और मामले में अपना affidavit-in-reply तथा compliance report दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गडकरी की ओर से अब जो नया आपत्तिजनक कंटेंट सामने लाया गया है, उसे भी संबंधित प्लेटफॉर्म हटाएं। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, 27 जुलाई को जस्टिस अभय आहूजा ने नितिन गडकरी को X, Meta Platforms, Google और अज्ञात लोगों के खिलाफ कथित मानहानिकारक, डीपफेक और AI-generated कंटेंट को लेकर सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी। गडकरी ने इस मामले में 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है। गडकरी की याचिका के मुताबिक सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो में उन्हें E20 यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण से जुड़ी नीति के लिए जिम्मेदार बताया गया। याचिका में दावा किया गया कि इन पोस्टों में उन्हें और उनके परिवार को कथित आर्थिक लाभ, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पद के दुरुपयोग जैसे आरोपों से जोड़ने की कोशिश की गई। गडकरी का कहना था कि E20 नीति उनके मंत्रालय के अधीन नहीं है। उनके अनुसार Ethanol Blending Programme से जुड़े नीति संबंधी निर्णय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कम से कम 24 कथित आपत्तिजनक पोस्ट का हवाला देते हुए इन्हें हटाने की मांग की थी।

5 अगस्त को कोर्ट ने क्या कहा था?

5 अगस्त को जस्टिस अरिफ डॉक्टर ने गडकरी द्वारा चिन्हित सामग्री को प्रथम दृष्टया “per se defamatory” मानते हुए उसे तत्काल हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने Meta, X और Google जैसे intermediaries को संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि गडकरी का उद्देश्य वैध आलोचना, बहस या असहमति को रोकना नहीं है। विवाद उन कथित रूप से झूठे, अपमानजनक और डीपफेक कंटेंट को लेकर है जिन्हें गडकरी ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।

अब आगे क्या होगा?

2 सितंबर के आदेश के बाद X को पुराने आदेश का अनुपालन करना होगा और कोर्ट के समक्ष compliance report दाखिल करनी होगी। साथ ही नए चिन्हित आपत्तिजनक कंटेंट पर भी प्लेटफॉर्म्स को कार्रवाई करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।