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मेघालय में दशकों का इंतजार खत्म, 21 परिवारों को मिला जमीन का पट्टा

मेघालय के तुरा स्थित Ronggi Songgital में लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे परिवारों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 21 लाभार्थियों को Land Pattas सौंपे। सरकार के मुताबिक, दस्तावेज मिलने से परिवारों को जमीन पर कानूनी सुरक्षा के साथ बैंक लोन, जरूरी प्रमाणपत्र और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

Neha Sharma03 सित. 2026, 08:54 PM IST
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मेघालय में दशकों का इंतजार खत्म, 21 परिवारों को मिला जमीन का पट्टा

मेघालय के तुरा में सरकारी जमीन पर वर्षों से रह रहे 21 परिवारों के लिए लंबे इंतजार का अंत हुआ है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 2 सितंबर 2026 को इन परिवारों को जमीन के पट्टे (Land Pattas) सौंपे। यह कदम तुरा शहर में सरकारी जमीन पर लंबे समय से चले आ रहे भूमि अधिकार और कब्जे से जुड़े विवादों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


Ronggi Songgital के परिवारों को मिली बड़ी राहत

पट्टा वितरण कार्यक्रम तुरा के Ronggi Songgital इलाके में हुआ। यहां रहने वाले परिवार लंबे समय से उस जमीन पर रह रहे थे, लेकिन उनके पास जमीन से संबंधित औपचारिक दस्तावेज नहीं थे। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम में कुल 21 भूमि पट्टे लाभार्थियों को सौंपे गए, जिनमें Ronggi Songgital के 17 परिवार शामिल हैं। इन परिवारों के लिए पट्टा मिलना सिर्फ जमीन का दस्तावेज हासिल करना नहीं है, बल्कि इससे उनके घर और जमीन पर कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।


2018 में किया था समाधान का वादा

मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने इस मौके पर 2018 में इलाके के अपने दौरे को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने स्थानीय लोगों से उनकी लंबे समय से चली आ रही जमीन संबंधी समस्या का समाधान खोजने का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब पट्टों का वितरण उस पुराने वादे को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार आगे भी ऐसे भूमि मामलों को लोगों की सहमति और सहयोग के साथ सुलझाने की कोशिश करेगी।


तुरा में सरकारी जमीन पर बसे हैं कई इलाके

तुरा शहर में General Administration Department (GAD) की जमीन पर कई बस्तियां और परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, तुरा में ऐसी 8 स्थानीयताएं हैं जहां लोग GAD की जमीन पर बसे हुए हैं। अब तक इनमें से 4 स्थानीयताओं में भूमि दस्तावेज वितरित किए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और जमीन के इस्तेमाल तथा अधिकारों को लेकर बनी अस्पष्टता को दूर करना है।


पट्टा मिलने से क्या फायदा होगा?

भूमि पट्टा मिलने के बाद लाभार्थियों को अपनी जमीन और घर से जुड़ी कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। सरकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्री के अनुसार, दस्तावेज मिलने से परिवारों के लिए बैंक से ऋण लेने, विभिन्न प्रमाणपत्र हासिल करने और सरकारी योजनाओं तथा सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। इससे जमीन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में भी प्रशासन को मदद मिलेगी और भविष्य में जमीन के स्वामित्व तथा उपयोग को लेकर विवादों की संभावना कम हो सकती है।


दशकों पुराने विवाद को सुलझाने की कोशिश

तुरा में सरकारी जमीन पर लंबे समय से बसे लोगों और प्रशासन के बीच जमीन के अधिकार को लेकर विवाद की स्थिति रही है। इससे पहले इन मामलों में कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां भी सामने आती रही हैं। सरकार ने अब जमीन के मामलों को व्यवस्थित तरीके से सुलझाने पर जोर दिया है। दिसंबर 2025 में सरकार ने बताया था कि तुरा की कुछ बस्तियों में सरकारी जमीन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए लंबे समय के लीज एग्रीमेंट का मॉडल अपनाया जा रहा है। उस व्यवस्था में जमीन का स्वामित्व सरकार के पास रहते हुए निवासियों को मान्यता प्राप्त अधिकार देने की बात कही गई थी।


आगे भी दूसरे इलाकों में हो सकता है समाधान

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि तुरा के दूसरे इलाकों में भी ऐसे भूमि मामलों को आगे सुलझाया जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी इलाके पर फैसला थोपने के बजाय स्थानीय लोगों की सहमति और सहयोग के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि भूमि दस्तावेज जारी होने से तुरा में भूमि रिकॉर्ड और शहरी प्रशासन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, दशकों से जमीन के दस्तावेज का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए यह कदम कानूनी सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में बड़ी राहत है।