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‘15 घंटे में मिल गई थी जमानत’: पुणे पोर्श हादसे के पीड़ित अनीश अवधीया के माता-पिता ने किशोर कानून में बदलाव की मांग की

2024 के चर्चित पुणे पोर्श हादसे में जान गंवाने वाले आईटी प्रोफेशनल अनीश अवधीया के माता-पिता ने किशोर न्याय कानून में बदलाव की मांग की है। अनीश के माता-पिता ओम और सविता अवधीया ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से किशोर की कानूनी उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने की मांग की।

Kalpana Gautam03 सित. 2026, 08:55 PM IST
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‘15 घंटे में मिल गई थी जमानत’: पुणे पोर्श हादसे के पीड़ित अनीश अवधीया के माता-पिता ने किशोर कानून में बदलाव की मांग की

पुणे: 2024 के चर्चित पुणे पोर्श हादसे में जान गंवाने वाले आईटी प्रोफेशनल अनीश अवधीया के माता-पिता ने किशोर न्याय कानून में बदलाव की मांग की है। अनीश के माता-पिता ओम और सविता अवधीया ने गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से किशोर की कानूनी उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने की मांग की। माता-पिता का कहना है कि 16-17 वर्ष की उम्र में वाहन चलाने, शराब पीकर ड्राइविंग करने और गंभीर हादसों के मामलों में मौजूदा कानूनी व्यवस्था पीड़ित परिवारों को न्याय का पर्याप्त भरोसा नहीं देती। ओम अवधीया ने कहा कि उनके मामले में आरोपी को नाबालिग होने की स्थिति में दुर्घटना के करीब 15 घंटे के भीतर जमानत मिल गई थी, जबकि उनके परिवार की पूरी जिंदगी इस हादसे से तबाह हो गई।


क्या हुआ था पुणे पोर्श हादसे में?

19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में तेज रफ्तार पोर्श कार ने एक दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। हादसे में 24 वर्षीय आईटी इंजीनियर अनीश अवधीया और उनकी साथी आईटी प्रोफेशनल अश्विनी कोस्ता की मौत हो गई थी। उस समय कार चला रहा आरोपी 17 वर्ष का था। मामले में शराब के सेवन और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के आरोपों को लेकर व्यापक विवाद हुआ था। हादसे के बाद Juvenile Justice Board ने आरोपी को करीब 15 घंटे के भीतर जमानत दे दी थी। जमानत की शर्तों में सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना, ट्रैफिक नियमों का अध्ययन करना और ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करना जैसी शर्तें शामिल थीं। इस आदेश के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। बाद में बोर्ड ने जमानत आदेश में बदलाव करते हुए आरोपी को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जून 2024 में ऑब्जर्वेशन होम में उसकी हिरासत को अवैध बताते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के पालन पर जोर दिया था।


क्या भारत में 16 साल के किशोर को वयस्क माना जाता है?

यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य समझना जरूरी है। मौजूदा Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति ‘बच्चा’ माना जाता है। हालांकि, 16 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चे पर जघन्य अपराध (heinous offence) का आरोप होने पर Juvenile Justice Board प्रारंभिक आकलन कर सकता है। इसमें बच्चे की मानसिक और शारीरिक क्षमता, कथित अपराध के परिणामों को समझने की क्षमता और परिस्थितियों का आकलन किया जाता है। कानून में ‘जघन्य अपराध’ की परिभाषा ऐसे अपराधों से जुड़ी है जिनमें न्यूनतम सजा सात वर्ष या उससे अधिक है। इसलिए हर गंभीर या चर्चित अपराध अपने आप ‘जघन्य अपराध’ की कानूनी श्रेणी में नहीं आ जाता।


पुणे पोर्श मामले में वयस्क की तरह ट्रायल का क्या हुआ?

पुणे पुलिस ने आरोपी को वयस्क के रूप में ट्रायल करने की मांग की थी। लेकिन 15 जुलाई 2025 को Juvenile Justice Board ने पुलिस की मांग खारिज कर दी। बोर्ड के सामने इस बात पर भी बहस हुई कि मामले में लगाए गए अपराधों की कानूनी सजा के आधार पर इसे Juvenile Justice Act की ‘heinous offence’ श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं। इसके बाद पुणे पुलिस ने इस फैसले के खिलाफ सेशंस कोर्ट में अपील दायर की। अगस्त 2025 की रिपोर्टों के मुताबिक राज्य सरकार की अनुमति के बाद पुलिस ने यह अपील दाखिल की थी।


पीड़ित परिवार की मांग क्या है?

ओम और सविता अवधीया चाहते हैं कि सरकार किशोर न्याय कानून में बदलाव पर विचार करे और 16 वर्ष की उम्र के बाद गंभीर अपराध करने वाले किशोरों के लिए कानून को और सख्त बनाया जाए। उनका कहना है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को ऐसी घटनाओं के बाद लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ओम अवधीया ने कहा कि उन्होंने कानून में संशोधन की मांग को लेकर पुलिस और कई सरकारी संस्थानों को पत्र भी भेजे हैं। उन्होंने मुंबई और नागपुर में नाबालिगों से जुड़े कथित सड़क हादसों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों से कानून पर दोबारा विचार करने की जरूरत सामने आती है।