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भारत की Space Power को बढ़ावा, ISRO ने लॉन्च किया EOS-05

ISRO ने 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 Earth Observation Satellite को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। Satellite को निर्धारित Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में स्थापित किया गया। EOS-05 से Earth Imaging और लगातार निगरानी की क्षमता मजबूत होगी, जिसका फायदा Disaster Management, Agriculture, Environment Monitoring और अन्य क्षेत्रों में मिल सकता है।

Neha Sharma04 सित. 2026, 06:32 PM IST
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भारत की Space Power को बढ़ावा, ISRO ने लॉन्च किया EOS-05

श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को एक और बड़ी अंतरिक्ष उपलब्धि हासिल की। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 2:55 बजे GSLV-F17 रॉकेट ने उड़ान भरी और अपने साथ EOS-05 Earth Observation Satellite को लेकर अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ। मिशन के दौरान रॉकेट ने EOS-05 को निर्धारित Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया।


EOS-05 क्यों है खास?

EOS-05 को भारत का पहला dedicated imaging satellite बताया जा रहा है, जिसे Geosynchronous Orbit से पृथ्वी की तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है। सामान्य Earth Observation Satellites अक्सर निचली कक्षाओं में घूमते हैं और किसी क्षेत्र के ऊपर से गुजरते समय उसकी तस्वीरें लेते हैं। इसके मुकाबले EOS-05 का geosynchronous orbit से संचालन किसी खास क्षेत्र की लंबे समय तक लगातार निगरानी में मदद करेगा। यह क्षमता कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन, पर्यावरण निगरानी, वानिकी, समुद्री संसाधनों और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लगातार Earth imaging से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझने और monitoring में मदद मिल सकती है।


36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचेगा satellite

EOS-05 को आगे चलकर पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाले geosynchronous region में अपनी operational स्थिति हासिल करनी है। फिलहाल GSLV-F17 ने satellite को transfer orbit में पहुंचाया है और इसके बाद spacecraft अपने onboard manoeuvres के जरिए अंतिम operational orbit की ओर बढ़ेगा।


GSLV-F17 की भी अहम भूमिका

इस मिशन में ISRO के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) का इस्तेमाल किया गया। GSLV तीन-stage launch vehicle है, जिसमें solid, liquid और cryogenic propulsion का इस्तेमाल होता है। इसकी cryogenic upper stage इसे भारी satellites को geosynchronous transfer trajectories की ओर भेजने में सक्षम बनाती है। GSLV-F17, GSLV की 19वीं flight है। ISRO की official mission list में इसे 4 सितंबर 2026 के GSLV-F17/EOS-05 Mission के रूप में दर्ज किया गया है।


ISRO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

EOS-05 मिशन भारत की Earth Observation capabilities को एक नई दिशा देता है। Geosynchronous orbit से imaging capability मिलने के कारण भारत को पृथ्वी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की लगातार निगरानी के लिए एक नया platform मिलेगा। यह मिशन ISRO के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह 2026 में जनवरी के बाद पहली सफल launch mission है। जनवरी में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण वापसी के तौर पर देखी जा रही है।


PM मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

EOS-05 की सफल launch के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि Geosynchronous orbit से भारत के पहले imaging satellite का सफल launch देश के space sector की innovation और बढ़ती capabilities को दर्शाता है। उन्होंने ISRO और भारतीय industry के बीच बढ़ती partnership को भी महत्वपूर्ण बताया।


भारत की Space Technology को मिलेगी नई ताकत

EOS-05 से मिलने वाले Earth observation data का इस्तेमाल आने वाले समय में कई नागरिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। खासकर agriculture monitoring, environmental changes, disaster management और natural resources की निगरानी में लगातार satellite imagery उपयोगी साबित हो सकती है। GSLV-F17 की सफल उड़ान के साथ ISRO ने एक बार फिर भारत की launch और satellite technology की क्षमता का प्रदर्शन किया है। EOS-05 के operational orbit में पहुंचने के बाद इससे मिलने वाला data भारत की Earth observation infrastructure को और मजबूत कर सकता है।