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IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े अवमानना मामले से जज ने खुद को किया अलग, जानिए क्या है पूरा विवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े अवमानना मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। मामला एक न्यायिक अधिकारी को कथित तौर पर प्रभावित और डराने की कोशिश के आरोपों से जुड़ा है। अब इस मामले की सुनवाई ऐसी बेंच करेगी, जिसमें जस्टिस श्रीवास्तव शामिल नहीं होंगे।

Sonali04 सित. 2026, 06:32 PM IST
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IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े अवमानना मामले से जज ने खुद को किया अलग, जानिए क्या है पूरा विवाद

प्रयागराज।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने वरिष्ठ IAS अधिकारी और देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। आरोप है कि नागपाल ने एक लंबित मुकदमे के सिलसिले में एक न्यायिक अधिकारी को फोन कर कथित तौर पर प्रभावित और डराने की कोशिश की थी।

किस बेंच ने दिया आदेश?

3 सितंबर 2026 को जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच के सामने मामला आया। जस्टिस श्रीवास्तव के रिक्यूजल के बाद बेंच ने निर्देश दिया कि मामले को ऐसी दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें जस्टिस श्रीवास्तव शामिल न हों। आदेश में कहा गया कि मामले को चीफ जस्टिस या वरिष्ठ जज से नामांकन प्राप्त करने के बाद 9 सितंबर को सूचीबद्ध किया जाए।  गौरतलब है कि 3 सितंबर के आदेश में जस्टिस श्रीवास्तव के मामले से अलग होने का कारण दर्ज नहीं किया गया है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

विवाद करीब तीन दशक पुराने एक सिविल मुकदमे से जुड़ा है। 1997 में दाखिल यह मुकदमा सरकारी जमीन से संबंधित है और गोंडा में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के सामने लंबित था। मामले में 2018 में मुद्दे तय किए गए थे और कार्यवाही साक्ष्य के चरण तक पहुंच चुकी थी। मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायिक अधिकारी शबीना खान ने आरोप लगाया था कि 15 जुलाई 2026 को छुट्टी के दौरान कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने उन्हें फोन किया। न्यायिक अधिकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें उनकी छुट्टी और फोन न उठाने को लेकर सवाल किए गए तथा कथित तौर पर वरिष्ठ IAS अधिकारी होने का हवाला दिया गया। न्यायिक अधिकारी ने 4 अगस्त को गोंडा के जिला जज को पत्र लिखकर इस बातचीत की शिकायत की और मामले को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। बाद में जिला जज ने मुकदमे को दूसरी समान क्षेत्राधिकार वाली अदालत में स्थानांतरित कर दिया।

हाईकोर्ट ने क्यों लिया स्वतः संज्ञान?

मामला ट्रांसफर होने के बाद भी हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी की शिकायत में लगाए गए आरोपों को गंभीर माना। 21 अगस्त के आसपास हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नागपाल के कथित आचरण को आपराधिक अवमानना से जुड़े मामले की सुनवाई करने वाली अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक अधिकारियों को बाहरी दबाव या डर से मुक्त होकर अपने न्यायिक कार्य करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कोर्ट के अनुसार, किसी न्यायिक अधिकारी को लंबित मामले के संबंध में प्रभावित या दबाव में लाने का प्रयास न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप का सवाल खड़ा कर सकता है।

IAS अधिकारी का क्या पक्ष है?

दुर्गा शक्ति नागपाल ने कथित फोन कॉल से इनकार नहीं किया है, लेकिन बातचीत की अलग व्याख्या दी है। उनका कहना है कि अप्रैल 2026 में देवीपाटन मंडल के कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्हें सरकारी जमीन से जुड़े इस पुराने मुकदमे की जानकारी मिली थी, जो दशकों से लंबित था। उनके अनुसार, फोन पर बातचीत का उद्देश्य न्यायिक अधिकारी की छुट्टी और मामले की स्थिति से संबंधित जानकारी लेना था, न कि न्यायिक अधिकारी पर दबाव डालना। अब जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव के रिक्यूजल के बाद इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी। फिलहाल आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है और मामला न्यायिक विचाराधीन है।