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Child Labour पर सरकार का बड़ा अभियान, 3,800+ बच्चों को मिली आजादी

बाल मजदूरी और बाल तस्करी के खिलाफ NCPCR ने देशभर में विशेष Rescue और Rehabilitation Campaign चलाया। 12 जून से 31 अगस्त 2026 तक चले इस अभियान में 3,800 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया, जबकि 575 से अधिक FIR दर्ज की गईं। अभियान में बच्चों के Rescue के साथ उनके Rehabilitation और Education से दोबारा जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

Neha Sharma04 सित. 2026, 06:32 PM IST
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Child Labour पर सरकार का बड़ा अभियान, 3,800+ बच्चों को मिली आजादी

नई दिल्ली: देश में बाल मजदूरी, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाले NCPCR के विशेष “Pan-India Rescue and Rehabilitation Campaign” के दौरान 3,800 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया, जबकि अभियान के दौरान 575 से अधिक FIR दर्ज की गईं। यह अभियान 12 जून 2026 से शुरू होकर 31 अगस्त 2026 तक चला।


देशभर में चलाया गया विशेष अभियान

NCPCR ने इस अभियान को सिर्फ बच्चों को काम से मुक्त कराने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके Rescue, Rehabilitation और Educational Mainstreaming पर भी जोर दिया। आयोग ने राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिलाधिकारियों, श्रम विभागों, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान को आगे बढ़ाया। अभियान के तहत उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया गया जिन्हें Child Labour और Child Trafficking Hotspots के रूप में चिन्हित किया गया था। संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्थानों पर लक्षित और तेज बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।


3,800 से ज्यादा बच्चों को बाल मजदूरी से मिली मुक्ति

लगातार निगरानी और राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय के परिणामस्वरूप अभियान के दौरान 3,800 से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। इसके साथ ही विभिन्न मामलों में 575 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं। यह कार्रवाई इस बात को रेखांकित करती है कि बाल मजदूरी के मामलों में सिर्फ बच्चों को कार्यस्थल से हटाना पर्याप्त नहीं है। बचाव के बाद उनकी सुरक्षा, परिवार में पुनर्स्थापना, शिक्षा से दोबारा जोड़ना और जरूरत के अनुसार पुनर्वास भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।


राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगी गई नियमित रिपोर्ट

NCPCR ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अभियान से संबंधित आंकड़े नियमित रूप से उपलब्ध कराने को कहा। इसमें बचाए गए बच्चों की संख्या, दर्ज FIR, Rehabilitation, Restoration, Educational Mainstreaming, Compensation और अन्य Follow-up Actions की जानकारी शामिल थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी बच्चे को रेस्क्यू करने के बाद उसकी स्थिति की निगरानी भी की जाए और वह दोबारा शोषण या बाल मजदूरी की स्थिति में न पहुंचे।


जिला प्रशासन के साथ लगातार निगरानी

अभियान की जमीनी प्रगति पर नजर रखने के लिए NCPCR ने विभिन्न जिला प्रशासनों के साथ बैठकें भी कीं। इन बैठकों में बचाव अभियानों की समीक्षा की गई और अभियान के दौरान सामने आने वाली Operational Bottlenecks को दूर करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा Action Taken Reports (ATR) समय पर जमा कराने पर भी जोर दिया गया।


बाल तस्करी और शोषण के खतरे पर भी फोकस

अभियान का एक अहम उद्देश्य उन बच्चों की पहचान करना भी था जो बाल मजदूरी के साथ-साथ Trafficking और Exploitation के खतरे में थे। इसलिए NCPCR ने केवल मौजूदा बाल मजदूरी के मामलों पर कार्रवाई करने के बजाय संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों की पहचान और सुरक्षा को भी अभियान का हिस्सा बनाया।


जागरूकता अभियान भी चलाया गया

रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ NCPCR ने Social Media और अन्य Communication Platforms के जरिए Awareness और Outreach Activities भी चलाईं। लोगों को बाल मजदूरी के मामलों की रिपोर्ट करने और बच्चों को बचाव के बाद शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना उनके पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


सिर्फ Rescue नहीं, Rehabilitation पर भी जोर

इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि NCPCR ने Rescue के साथ Rehabilitation को भी प्राथमिकता दी। बच्चों को बाल मजदूरी से बाहर निकालने के बाद उन्हें परिवार में वापस स्थापित करने, शिक्षा से जोड़ने, मुआवजे और अन्य जरूरी सहायता से संबंधित कार्रवाई की निगरानी की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, राज्य अधिकारियों के साथ लगातार और सक्रिय निगरानी के परिणामस्वरूप अभियान में 3,800 से ज्यादा बच्चों को मुक्त कराया गया और 575 से अधिक FIR दर्ज हुईं। यह अभियान देश में बाल मजदूरी और बाल तस्करी के खिलाफ सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।