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फोटोग्राफर की हत्या के बाद भी चलता रहा WhatsApp चैट, 20 दिन बाद खुला राज
प्रयागराज के 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के मुताबिक, हत्या के बाद शव को नीले ट्रॉली बैग में रखकर रीवा क्षेत्र में ले जाया गया। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि करीब 20 दिनों तक आलोक के मोबाइल से उसकी गर्लफ्रेंड को मैसेज भेजे जाते रहे, जिससे उसके जिंदा होने का भ्रम बना रहा। CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। हत्या की वजह में पैसों के विवाद और कथित आपसी नाराजगी का एंगल सामने आया है।

प्रयागराज। प्रयागराज में 27 वर्षीय फोटोग्राफर आलोक गुप्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सनसनीखेज वारदात का खुलासा किया है। पुलिस जांच के मुताबिक, आलोक की हत्या उसके परिचितों ने की थी। इसके बाद उसके शव को एक बड़े नीले ट्रॉली बैग में रखकर मध्य प्रदेश के रीवा क्षेत्र में ले जाकर फेंक दिया गया। मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि हत्या के बाद भी करीब 20 दिनों तक आलोक के मोबाइल फोन से उसकी गर्लफ्रेंड के साथ चैट होती रही। इससे उसे कुछ समय तक यह लगता रहा कि आलोक जिंदा है और उससे बातचीत कर रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर इसी वजह से उसके फोन का इस्तेमाल किया, ताकि उसकी गुमशुदगी और मौत का शक तुरंत न हो।
जन्मदिन की पार्टी के बाद सामने आया पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, आलोक अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन की पार्टी के लिए प्रयागराज स्थित अपने फ्लैट पर था। इसी दौरान उसका दोस्तों से विवाद हुआ और मामला गंभीर हो गया। पुलिस की जांच में पैसे के लेनदेन को विवाद की प्रमुख वजह बताया गया है। कुछ रिपोर्टों में करीब 50 हजार रुपये के लेनदेन का जिक्र है। पुलिस के अनुसार, आलोक और मुख्य आरोपी शुभम तिवारी के बीच पहले से परिचय था। जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि पैसों के विवाद और आलोक द्वारा दोस्तों पर की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर नाराजगी थी। हालांकि, पुलिस अभी हत्या के पीछे की पूरी वजह और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
CCTV फुटेज ने खोला राज
आलोक के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। जांच के दौरान पुलिस को उसके अपार्टमेंट की CCTV फुटेज मिली। फुटेज में कुछ लोग एक बड़े नीले बैग के साथ बाहर जाते दिखाई दिए। यही फुटेज पुलिस की जांच में अहम कड़ी बनी। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, CCTV और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों को खंगालना शुरू किया।
रीवा में मिला शव
जांच के दौरान पुलिस को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सुहागी क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली। बाद में आलोक के परिजनों ने कपड़ों और दूसरे पहचान संबंधी साक्ष्यों के आधार पर उसकी पहचान की। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने शव को प्रयागराज से रीवा की तरफ ले जाकर वहां ठिकाने लगाया था। इस पूरे घटनाक्रम में प्रयुक्त वाहन और अन्य सामान भी पुलिस जांच का हिस्सा बने।
हत्या के बाद भी चलता रहा मोबाइल
इस केस की सबसे अलग कड़ी मृतक का मोबाइल फोन बना। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने आलोक की हत्या के बाद उसके फोन का इस्तेमाल किया और उसकी गर्लफ्रेंड के साथ चैट जारी रखी। करीब 20 दिनों तक मैसेज आने के कारण उसे यह भरोसा रहा कि आलोक कहीं गया हुआ है और उससे संपर्क में है। हालांकि, जब फोन कॉल या आमने-सामने मिलने की बात आती थी तो स्थिति अलग रहती थी। पुलिस का मानना है कि फोन से बातचीत जारी रखने का मकसद आलोक की मौत का पता चलने में देरी करना था।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में शुभम तिवारी, शुभम यादव और अंकुश यादव को गिरफ्तार किया है। जांच में शुभम तिवारी की भूमिका को मुख्य रूप से सामने रखा गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर हत्या की पूरी साजिश, घटना में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और शव को रीवा ले जाने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। जांच में फाफामऊ के प्रॉपर्टी डीलर विपिन शुक्ला का नाम भी सामने आया है। पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, उसकी भूमिका वाहन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के आरोपों को लेकर जांच के दायरे में है। उसकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर पुलिस का फोकस
पुलिस ने मामले में CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और लोकेशन समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अहम आधार बनाया है। इन साक्ष्यों के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के बाद आरोपियों ने किन-किन लोगों से संपर्क किया और घटना के बाद उनकी गतिविधियां क्या थीं। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर घटना में इस्तेमाल वाहन और अन्य सामान की बरामदगी की भी जानकारी दी है।
गुमशुदगी से हत्या के खुलासे तक
आलोक के लापता होने के बाद शुरू हुई जांच धीरे-धीरे हत्या के मामले तक पहुंची। अपार्टमेंट की CCTV फुटेज, रीवा में मिले शव और मोबाइल फोन से जुड़े सुरागों ने जांच को दिशा दी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्धों तक पहुंचकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। मामले में कुछ रिपोर्टों में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने की तारीख अलग-अलग बताई गई है। इसलिए पुलिस रिकॉर्ड से स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी एक तारीख को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। हत्या की वजह, सभी आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े बाकी पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
