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DV Act के संरक्षण आदेश को Senior Citizens Act से नहीं किया जा सकता बेअसर: बॉम्बे हाईकोर्ट
बहू को घर से निकालने के लिए Senior Citizens Act का सहारा लेना 70 वर्षीय ससुर को भारी पड़ गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कहा कि वरिष्ठ नागरिक कानून को किसी महिला को मिले घरेलू हिंसा कानून के संरक्षण से वंचित करने या कोर्ट के आदेश को बेअसर करने के ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि Senior Citizens Act, 2007 का इस्तेमाल किसी महिला को घरेलू हिंसा कानून के तहत मिले न्यायिक संरक्षण से वंचित करने या कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून का इस्तेमाल किसी पक्ष को परेशान करने या पहले से पारित न्यायिक आदेश को दरकिनार करने के लिए ‘हथियार’ के तौर पर नहीं किया जा सकता। Justice Ajit B. Kadethankar ने यह टिप्पणी 70 वर्षीय एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता ने Senior Citizens Act के तहत अपनी बहू को उस मकान से बेदखल करने की मांग की थी, जहां उसे Magistrate के आदेश के तहत रहने की अनुमति मिली हुई थी।
क्या था पूरा मामला?
मामला उस समय सामने आया जब याचिकाकर्ता ने Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 की धारा 4 और 5 के तहत अपनी बहू को घर से निकालने के लिए आवेदन किया। हालांकि, Sub-Divisional Officer (SDO) ने उसकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद District Collector के समक्ष अपील की गई, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। इसके बाद याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और दोनों अधिकारियों के आदेशों को चुनौती दी। दूसरी ओर, बहू और उसकी दो नाबालिग बेटियों को Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 की धारा 12 के तहत Magistrate द्वारा पारित आदेश से मकान में रहने का संरक्षण प्राप्त था।
कोर्ट ने क्या कहा?
Justice Ajit B. Kadethankar ने कहा कि Senior Citizens Act एक कल्याणकारी कानून है और इसके तहत शुरू की गई कार्यवाही पूरी तरह सद्भावना (bona fide) के साथ और कानून के वास्तविक उद्देश्य को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2007 के कानून की धारा 4 और 5 के तहत प्राप्त अधिकार पूर्ण और असीमित नहीं हैं। इन प्रावधानों का इस्तेमाल सक्षम अदालतों द्वारा पारित आदेशों को विफल करने या ऐसे व्यक्ति को परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता, जिसे किसी अन्य कानून के तहत न्यायिक संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि Senior Citizens Act के प्रावधानों को ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
बहू और नाबालिग बेटियों के संरक्षण को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा शुरू की गई कार्यवाही वास्तविक और bona fide उद्देश्य से प्रेरित नहीं थी। कोर्ट के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि बहू और उसकी दो नाबालिग बेटियों द्वारा उठाए गए दावों को विफल करने के लिए Senior Citizens Act के तहत कार्यवाही शुरू की गई। कोर्ट ने कहा कि मकान खाली कराने और उसका कब्जा सौंपने की मांग, दरअसल, बहू और उसकी बेटियों को मिले न्यायिक संरक्षण आदेश को दरकिनार करने का प्रयास थी।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
अदालत ने माना कि ऐसी कार्यवाही को ‘due procedure of law’ नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने दोनों अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता की बेदखली की मांग खारिज किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस फैसले से हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण सिद्धांत दोहराया कि Senior Citizens Act का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को संरक्षण और भरण-पोषण उपलब्ध कराना है, न कि किसी अन्य सक्षम अदालत के संरक्षण आदेश को निष्प्रभावी करना।
