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₹1 करोड़ के फ्लैट की बिक्री छिपाने का आरोप, बॉम्बे हाईकोर्ट ने लिया सख्त रुख; वरिष्ठ दंपती और बेटी को अवमानना नोटिस
मुंबई में घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक दंपती और उनकी शादीशुदा बेटी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत के मुताबिक, जिस फ्लैट को घरेलू हिंसा की कार्यवाही में ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’ के तौर पर संरक्षण मिला था, उसे पहले बेटी के नाम गिफ्ट किया गया और बाद में मई 2026 में ₹1 करोड़ में बेच दिया गया। अदालत के सामने इस ट्रांसफर और बिक्री का खुलासा नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे प्रथमदृष्टया अवमानना का मामला माना और फ्लैट का तत्काल कब्जा लेने का आदेश दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट में यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक दंपती की ओर से दायर आवेदन से जुड़ा था। मामले की पृष्ठभूमि में उनकी बहू की ओर से Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के तहत शुरू की गई कार्यवाही थी। फरवरी 2024 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने बहू को उसके वैवाहिक घर यानी ‘shared household’ में रहने की अनुमति दी थी। साथ ही पति और ससुराल वालों को उसके कब्जे में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद मई 2024 में हाईकोर्ट के समक्ष बहू ने वैवाहिक घर के पास किराये के मकान में रहने पर सहमति जताई। बाद में अगस्त 2025 में अदालत को बताया गया कि उसे इस व्यवस्था के तहत हर महीने ₹30,000 का भुगतान किया जा रहा है, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार किया था।
₹1 करोड़ की बिक्री का खुलासा कैसे हुआ?
मामले में नया मोड़ तब आया जब हाईकोर्ट ने पाया कि वरिष्ठ दंपती ने मई 2024 में ही विवादित फ्लैट को एक गिफ्ट डीड के जरिए अपनी शादीशुदा बेटी के नाम ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद उस बेटी ने मई 2026 में फ्लैट को एक तीसरे पक्ष को ₹1 करोड़ में बेच दिया। अदालत के अनुसार, इन महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी पहले की कार्यवाही के दौरान कोर्ट के सामने नहीं रखी गई। यही बात हाईकोर्ट के सख्त रुख का प्रमुख कारण बनी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस माधव जे. जमदार की एकल पीठ ने मामले को बेहद गंभीर बताया। अदालत ने प्रथमदृष्टया माना कि कोर्ट के सामने तथ्यों को छिपाकर आदेश हासिल किया गया हो सकता है। कोर्ट ने इसे अदालत के साथ धोखे का गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इस तरह की रणनीति को कामयाब नहीं होने दिया जा सकता। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत ने इस चरण पर अंतिम दोषसिद्धि नहीं की है। आदेश में वरिष्ठ दंपती और उनकी बेटी के खिलाफ prima facie contempt यानी प्रथमदृष्टया अवमानना का निष्कर्ष दर्ज किया गया है।
फ्लैट का तत्काल कब्जा लेने का आदेश
हाईकोर्ट ने Court Receiver को विवादित फ्लैट का तत्काल भौतिक कब्जा लेने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया कि फ्लैट में जो भी व्यक्ति कब्जे में पाया जाए, उसे हटाया जाए। अदालत ने कब्जा लेने की कार्रवाई के दौरान पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। Court Receiver की ₹50,000 की फीस अंततः वरिष्ठ दंपती और उनकी बेटी से वसूलने की बात भी आदेश में कही गई है।
तीनों को हर सुनवाई में रहना होगा मौजूद
हाईकोर्ट ने वरिष्ठ दंपती और उनकी बेटी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की है। अदालत ने तीनों को प्रत्येक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि अदालत के समक्ष लंबित संपत्ति और घरेलू हिंसा से जुड़े विवादों में पक्षकारों से पूर्ण और सही तथ्य सामने रखने की अपेक्षा की जाती है। खास तौर पर तब, जब किसी संपत्ति के संबंध में अदालत पहले ही संरक्षण या रहने का अधिकार तय कर चुकी हो, उस संपत्ति का स्वामित्व बदलने या उसे बेचने जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी अदालत से छिपाना गंभीर कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट की कार्रवाई प्रथमदृष्टया अवमानना के निष्कर्ष और अंतरिम/प्रवर्तन संबंधी निर्देशों पर आधारित है। मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष आगे की सुनवाई और कार्यवाही के बाद सामने आएगा।
