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कांगो में इबोला का कहर! 6,186 मामले, 3,007 मौतें; तेजी से फैल रहा संक्रमण l

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। 2 सितंबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 6,186 confirmed cases सामने आ चुके हैं और 3,007 लोगों की मौत हुई है। संक्रमण छह प्रांतों तक पहुंच चुका है। मौजूदा प्रकोप Bundibugyo virus से जुड़ा है, जिसके खिलाफ अभी कोई licensed vaccine या specific treatment उपलब्ध नहीं है। WHO और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियां surveillance, contact tracing और treatment capacity बढ़ाने में जुटी हैं।

Kashish Rai05 सित. 2026, 06:36 PM IST
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कांगो में इबोला का कहर! 6,186 मामले, 3,007 मौतें; तेजी से फैल रहा संक्रमण l

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से गंभीर होता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2 सितंबर तक देश में 6,186 confirmed cases और 3,007 मौतें दर्ज की जा चुकी थीं। यह मौजूदा प्रकोप कांगो के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला Ebola outbreak बन चुका है। इस प्रकोप की शुरुआत मई 2026 में इटुरी प्रांत से हुई थी। इसके बाद संक्रमण देश के दूसरे हिस्सों में फैलता गया और अब छह प्रांतों तक पहुंच चुका है। WHO के 28 अगस्त के अपडेट में 60 health zones में संक्रमण की पुष्टि की गई थी।

Bundibugyo strain ने बढ़ाई चुनौती

इस बार इबोला संक्रमण Bundibugyo virus के कारण हो रहा है। WHO के मुताबिक इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई licensed vaccine या specific treatment उपलब्ध नहीं है। हालांकि संभावित वैक्सीन और उपचार विकल्पों पर research जारी है।

इस वजह से शुरुआती पहचान, संक्रमित लोगों को अलग करना और supportive medical care बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। WHO के अनुसार शुरुआती supportive care मरीजों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इटुरी और नॉर्थ किवू में ज्यादा असर

इटुरी प्रांत मौजूदा प्रकोप का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके अलावा नॉर्थ किवू में भी संक्रमण का विस्तार हुआ है। WHO के अनुसार अगस्त के अंत तक नॉर्थ किवू समेत छह प्रांत प्रभावित हो चुके थे। क्षेत्र में संघर्ष, लोगों का विस्थापन, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और आबादी की लगातार आवाजाही संक्रमण पर नियंत्रण को मुश्किल बना रही है। WHO ने भी इन परिस्थितियों को outbreak response के लिए बड़ी चुनौती बताया है।

संक्रमण रोकने की कोशिशों के सामने बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित लोगों और उनके संपर्क में आए लोगों को समय पर पहचानना है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार surveillance और contact tracing में कई जगह कमियां बनी हुई हैं। उपचार और isolation की क्षमता भी कई प्रभावित इलाकों में दबाव में है। इसके अलावा कुछ प्रभावित इलाकों में सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण स्वास्थ्यकर्मियों और राहत टीमों की पहुंच सीमित है। इससे संक्रमण की हर कड़ी को पहचानकर उसे रोकना मुश्किल हो रहा है।

WHO की चेतावनी

WHO लगातार कांगो सरकार और स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर surveillance, contact tracing, clinical preparedness और community engagement को मजबूत करने में जुटा है। WHO का कहना है कि समुदायों का सहयोग outbreak को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी है। मौजूदा स्थिति में WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली public health emergency के रूप में भी दर्ज किया है। मई 2026 में WHO ने Bundibugyo virus से जुड़े DRC और Uganda के outbreak को Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित किया था।

क्या यह 2014-16 के Ebola outbreak से बड़ा हो सकता है?

मौजूदा प्रकोप की रफ्तार ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। 2014-16 में पश्चिमी अफ्रीका में फैले Ebola outbreak में करीब 11,000 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि मौजूदा कांगो प्रकोप के बारे में यह कहना कि वह निश्चित रूप से उस आंकड़े को पार करेगा, अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि संक्रमण तेजी से नए क्षेत्रों में पहुंच रहा है और कई मामलों में बीमारी की पहचान तथा transmission chains को समय पर पकड़ना मुश्किल हो रहा है।

मोबाइल डेटा से भी संक्रमण पर नजर

स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण के संभावित विस्तार को समझने के लिए नए तरीकों का भी इस्तेमाल शुरू किया है। WHO और Flowminder के मुताबिक, anonymized mobile-phone data का इस्तेमाल लोगों की आवाजाही को समझने और उन क्षेत्रों की पहचान करने में किया जा रहा है जहां संक्रमण पहुंचने का खतरा अधिक हो सकता है। कांगो में इबोला की यह स्थिति अब सिर्फ स्थानीय स्वास्थ्य संकट नहीं रह गई है। छह प्रांतों में फैल चुके संक्रमण, कमजोर स्वास्थ्य ढांचे और लोगों की लगातार आवाजाही के कारण पड़ोसी क्षेत्रों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है। WHO के मुताबिक संक्रमण की हर transmission chain को जल्द पहचानकर रोकना ही इस outbreak को नियंत्रित करने की कुंजी है।