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CBSE छात्रों को राहत! Answer Sheet के लिए RTI फीस पर CIC का बड़ा आदेश

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने CBSE को RTI के तहत छात्रों को जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित शुल्क नियमों का पालन करने को कहा है। आयोग ने RTI के जरिए उत्तर पुस्तिका लेने वाले छात्रों को सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन से रोकने वाले प्रावधान की भी समीक्षा करने की सिफारिश की है।

Neha Sharma07 सित. 2026, 05:08 PM IST
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CBSE छात्रों को राहत! Answer Sheet के लिए RTI फीस पर CIC का बड़ा आदेश

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को बोर्ड परीक्षाओं की जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां सूचना का अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि RTI के तहत उत्तर पुस्तिका मांगने वाले छात्रों से RTI नियम, 2012 में निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क ही लिया जाना चाहिए। आयोग ने CBSE के 19 मई 2025 के परिपत्र में मौजूद उस प्रावधान की भी समीक्षा करने की सिफारिश की है, जिसके तहत RTI के माध्यम से उत्तर पुस्तिका हासिल करने वाले छात्रों को बाद में उत्तर पुस्तिका के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने से रोका जाता था। CIC ने इस रोक को RTI कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना है।


कक्षा 10 के छात्र की RTI याचिका से सामने आया मामला

यह मामला CBSE की कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देने वाले एक छात्र की RTI याचिका के बाद सामने आया। छात्र ने अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां RTI के तहत मांगी थीं। छात्र ने नियमित सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में लगने वाली अधिक फीस को इसकी वजह बताया था। छात्र ने कक्षा 10 के गणित मानक के सेट-3 प्रश्नपत्र की कठिनाई, मॉडरेशन नीति के लागू होने और अंकों में कटौती को लेकर भी सवाल उठाए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छात्र ने बताया था कि पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां लेने के लिए करीब 2,500 रुपये, पुनः सत्यापन के लिए करीब 2,500 रुपये और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न शुल्क देना पड़ सकता था। इस तरह पूरी प्रक्रिया का खर्च काफी बढ़ सकता था।


RTI के तहत निर्धारित शुल्क लेने का निर्देश

CIC ने CBSE को निर्देश दिया कि RTI के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए RTI नियम, 2012 में निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क का ही पालन किया जाए। आयोग का जोर इस बात पर है कि सूचना का अधिकार कानून के तहत उपलब्ध सूचना के लिए शुल्क ऐसा नहीं होना चाहिए जो छात्रों के लिए अनावश्यक आर्थिक बाधा बन जाए।


उत्तर पुस्तिका लेने के बाद पुनर्मूल्यांकन पर रोक का मामला

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने के बाद सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन से जुड़ा है। CBSE के 19 मई 2025 के परिपत्र में ऐसा प्रावधान था, जिसके अनुसार RTI के माध्यम से उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने वाले उम्मीदवार बाद में बोर्ड की प्रक्रिया के तहत पुनर्मूल्यांकन या सत्यापन की मांग नहीं कर सकते थे। CIC ने CBSE से इस प्रावधान में बदलाव की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि RTI के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने का अधिकार इस्तेमाल करने के कारण छात्र को परीक्षा व्यवस्था के तहत उपलब्ध अन्य उपायों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

यह निर्देश उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने प्राप्त अंकों को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका देखना चाहते हैं। उत्तर पुस्तिका की प्रति मिलने से छात्र यह समझ सकता है कि उसके उत्तरों का मूल्यांकन किस तरह किया गया और उसे कितने अंक दिए गए। इसके बाद यदि परीक्षा नियमों के तहत कोई सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन की सुविधा उपलब्ध है, तो छात्र उसके बारे में फैसला ले सकता है। CIC का निर्देश इसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों की सूचना तक पहुंच को मजबूत करने से जुड़ा है।


CBSE को अपने नियमों की समीक्षा करनी होगी

CIC ने CBSE से अपनी संबंधित प्रक्रिया और 19 मई 2025 के परिपत्र की समीक्षा करने की सिफारिश की है। खासतौर पर RTI के तहत उत्तर पुस्तिका हासिल करने के बाद सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पर लगी रोक को लेकर बदलाव की जरूरत बताई गई है। इससे आगे CBSE की ओर से परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच और पुनर्मूल्यांकन से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावना पर नजर रहेगी।


RTI और परीक्षा प्रक्रिया के बीच संतुलन

CIC का यह मामला केवल फीस से जुड़ा नहीं है, बल्कि RTI के तहत सूचना पाने के अधिकार और परीक्षा संबंधी नियमों के बीच तालमेल से भी जुड़ा है। आयोग ने अपने रुख में यह स्पष्ट किया है कि छात्रों को अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका तक पहुंच देने की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए और केवल RTI का इस्तेमाल करने के कारण उन्हें उपलब्ध अन्य परीक्षा संबंधी उपायों से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।


CIC के निर्देश के बाद CBSE के सामने उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने की फीस और RTI के जरिए उत्तर पुस्तिका लेने वाले छात्रों के लिए सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को लेकर अपने नियमों की समीक्षा करने की जरूरत है। यह फैसला छात्रों के लिए पारदर्शिता, उत्तर पुस्तिका तक पहुंच और परीक्षा परिणामों की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।