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मातृ-नवजात स्वास्थ्य पर सरकार का बड़ा प्लान, 130 जिलों पर खास फोकस

केंद्र सरकार ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए SUMAN Roadmap 2030 पर फोकस बढ़ाया है। इसके तहत 13 High-Focus States के 130 जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गर्भावस्था से पहले की देखभाल, High-Risk Pregnancy Management, प्रसव के बाद देखभाल, Referral Transport और Birth Waiting Homes जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर है।

Neha Sharma07 सित. 2026, 05:08 PM IST
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मातृ-नवजात स्वास्थ्य पर सरकार का बड़ा प्लान, 130 जिलों पर खास फोकस

लखनऊ: देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिर कल्याण मंत्रालय ने SUMAN Roadmap 2030 को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम तेज किए हैंवा। इसी उद्देश्य से 2 और 3 सितंबर 2026 को लखनऊ में “SUMAN Roadmap 2030 – Accelerating the Continuum of Care” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों, पेशेवर संगठनों और विकास भागीदारों समेत 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


2030 तक रोकी जा सकने वाली मातृ और नवजात मौतों को शून्य करने का लक्ष्य

SUMAN Roadmap 2030 का मुख्य उद्देश्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मौतों को शून्य करने की दिशा में भारत की प्रगति को तेज करना है। रोडमैप में गर्भावस्था से पहले की देखभाल से लेकर गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद की सेवाओं को एक निरंतर स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के रूप में मजबूत करने पर जोर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत ने मातृ मृत्यु को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी भी कुछ उच्च जोखिम वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष प्रयासों की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए SUMAN Roadmap में कमजोर और स्वास्थ्य सेवाओं से कम जुड़ी आबादी पर विशेष ध्यान दिया गया है।


13 राज्यों और 130 जिलों पर विशेष फोकस

रोडमैप को दो हिस्सों में तैयार किया गया है। इसके पहले हिस्से में 13 High-Focus States और 130 जिलों के लिए विशेष रणनीतियां तैयार की गई हैं। इन क्षेत्रों में मातृ एवं नवजात मौतों का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है, इसलिए यहां स्थानीय जरूरतों के अनुसार लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। दूसरे हिस्से में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसी रणनीतियां शामिल हैं, जिनसे मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति को बनाए रखा जा सके और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।


गर्भावस्था से पहले से प्रसव के बाद तक देखभाल

SUMAN Roadmap का एक अहम पहलू Continuum of Care यानी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता है। इसके तहत केवल प्रसव के समय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय महिला के स्वास्थ्य को गर्भावस्था से पहले से लेकर प्रसव के बाद तक एक व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाएगा। कार्यशाला में Pre-Pregnancy Care, High-Risk Pregnancy Management, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) का प्रबंधन, तीसरी तिमाही में सामुदायिक स्तर के हस्तक्षेप और Caesarean Section सेवाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।


हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने High-Risk Pregnancy की समय पर पहचान और उचित प्रबंधन को महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में रखा। इसका उद्देश्य जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं और रेफरल उपलब्ध कराना है।  कार्यशाला में PPH Management और Referral Transport पर भी चर्चा हुई, ताकि गंभीर स्थिति में मरीज को उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में होने वाली देरी को कम किया जा सके।


Birth Waiting Homes को मजबूत करने की योजना

दूरदराज और स्वास्थ्य सुविधाओं से कम जुड़े क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए Birth Waiting Homes (BWH) को भी रोडमैप में शामिल किया गया है। कार्यशाला के दौरान Birth Waiting Homes से संबंधित दिशानिर्देश भी जारी किए गए। इसका उद्देश्य ऐसी महिलाओं के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है, जिन्हें प्रसव के समय अस्पताल तक पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।


डिजिटल हेल्थ और SUMAN Call Centre पर भी जोर

रोडमैप के तहत डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसमें SUMAN Call Centre और Grievance Redressal Mechanism को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। इसके जरिए स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित समस्याओं और शिकायतों को बेहतर तरीके से दर्ज करने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करने का लक्ष्य है।


जलवायु परिवर्तन का भी स्वास्थ्य पर असर

कार्यशाला में मातृ स्वास्थ्य पर Climate Change के प्रभाव को भी चर्चा का हिस्सा बनाया गया। बदलते मौसम और जलवायु से जुड़ी परिस्थितियों का स्वास्थ्य सेवाओं और गर्भवती महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों को तैयार करने पर जोर दिया गया।


राज्यों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यशाला में 13 High-Focus States ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्राथमिकताएं, स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियां और प्रस्तावित कार्ययोजनाएं साझा कीं। इसका उद्देश्य राज्यों को एक-दूसरे की सफल पहलों से सीखने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान तैयार करने का अवसर देना था। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों की कई पहल भी प्रदर्शित की गईं। इनमें महाराष्ट्र की Vatsalya Initiative, कर्नाटक का Mission Zero Preventable Maternal Deaths, मध्य प्रदेश का SUMAN Panchayat और SUMAN Sakhi Chatbot तथा उत्तराखंड का State Maternal Health War Room शामिल थे।


उत्तर प्रदेश में नवविवाहित जोड़ों के पंजीकरण पर जोर

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नवविवाहित जोड़ों के पंजीकरण को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार इससे अनियोजित गर्भधारण को रोकने और स्वस्थ एवं नियोजित गर्भावस्था के लिए समय पर तैयारी करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में SUMAN Roadmap 2030 को प्रभावी तरीके से लागू करने की प्रतिबद्धता भी जताई।


सरकार का लक्ष्य—सुरक्षित और सम्मानजनक मातृत्व

SUMAN Roadmap 2030 के तहत सरकार का जोर केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि महिलाओं और नवजातों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराने पर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों, तकनीकी संस्थानों और विकास भागीदारों के साथ मिलकर रोडमैप को लागू करने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य परिणामों में मापने योग्य सुधार लाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।


SUMAN Roadmap 2030 क्यों महत्वपूर्ण?

SUMAN Roadmap 2030 को भारत की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक ढांचे के रूप में तैयार किया गया है। इसका फोकस Pre-Pregnancy Care से लेकर Postnatal Care तक Continuum of Care, हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान, प्रसव संबंधी जटिलताओं का बेहतर प्रबंधन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर है। सरकार का व्यापक लक्ष्य 2030 तक रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मौतों को शून्य करने की दिशा में ठोस और लगातार प्रगति हासिल करना है।