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नशे के लिए Codeine Cough Syrup रखा तो लगेगा NDPS Act! इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, 100 mg की सीमा भी नहीं देगी हर मामले में राहत

कोडीन वाली कफ सिरप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम कानूनी स्थिति साफ कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि तय सीमा के भीतर कोडीन वाली कफ सिरप होने मात्र से हर स्थिति में NDPS Act से छूट नहीं मिल जाती। अगर ऐसी सिरप को मेडिकल इस्तेमाल के बजाय नशे के लिए स्टॉक, बेचने या ट्रांसपोर्ट करने का आरोप है, तो कानूनी छूट खत्म हो सकती है और NDPS Act के प्रावधान लागू हो सकते हैं। कोर्ट का यह फैसला New Phensedyl, Eskuf और Codectus जैसी कोडीन आधारित कफ सिरप से जुड़े कई जमानत मामलों की सुनवाई के दौरान आया।

Sonali07 सित. 2026, 05:08 PM IST
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नशे के लिए Codeine Cough Syrup रखा तो लगेगा NDPS Act! इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, 100 mg की सीमा भी नहीं देगी हर मामले में राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप के कथित अवैध इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कफ सिरप में कोडीन की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर होना अपने आप उसे NDPS Act के दायरे से बाहर नहीं कर देता। यदि उसका स्टॉक, बिक्री या परिवहन नशे के उद्देश्य से किया जा रहा है, तो उसे मिलने वाली वैधानिक छूट समाप्त हो सकती है। अदालत के सामने कई जमानत अर्जियां थीं। इन सभी मामलों में New Phensedyl, Eskuf और Codectus जैसी codeine-based cough syrups के स्टॉक, बिक्री और परिवहन से जुड़े आरोप थे। हाईकोर्ट ने इन मामलों को एक साथ सुनते हुए कोडीन वाली दवाओं पर NDPS Act की लागू होने वाली धाराओं और केंद्र सरकार की अधिसूचना में दी गई छूट की व्याख्या की।

क्या है 100 मिलीग्राम और 2.5 प्रतिशत की सीमा?

केंद्र सरकार ने 14 नवंबर 1985 को NDPS Act के तहत एक अधिसूचना जारी की थी। इसकी Entry 35 में codeine और उसके salts, dilutions तथा preparations को manufactured drugs की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, इसमें कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है। ऐसी preparation जिसमें प्रति dosage unit कोडीन 100 मिलीग्राम से अधिक न हो और undivided preparation में इसकी concentration 2.5 प्रतिशत से अधिक न हो, उसे कुछ शर्तों के अधीन छूट मिल सकती है। इसके साथ यह भी जरूरी है कि ऐसी preparation का चिकित्सकीय इस्तेमाल स्थापित हो। यही वजह है कि सामान्य मेडिकल इस्तेमाल में उपलब्ध कुछ codeine-based cough syrups को केवल उनमें कोडीन मौजूद होने के आधार पर प्रतिबंधित narcotic drug नहीं माना जाता।

लेकिन नशे के लिए इस्तेमाल हुआ तो स्थिति बदल जाएगी

हाईकोर्ट ने इसी बिंदु पर महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया। अदालत के मुताबिक दवा की composition के साथ-साथ उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि किसी ऐसी preparation को मेडिकल उद्देश्य से इस्तेमाल करने के बजाय intoxication यानी नशे के लिए स्टॉक किया जाता है, बेचा जाता है या ट्रांसपोर्ट किया जाता है, तो उपलब्ध वैधानिक छूट का लाभ नहीं मिल सकता। इसका मतलब है कि आरोपी केवल यह कहकर NDPS Act की कार्रवाई से स्वतः बच नहीं सकता कि संबंधित कफ सिरप में कोडीन की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर है।

Section 8(c) क्यों है महत्वपूर्ण?

NDPS Act की Section 8(c) narcotic drugs और psychotropic substances से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाती है, जब तक कि उनका इस्तेमाल मेडिकल या वैज्ञानिक उद्देश्य के लिए न हो या कानून, नियमों, आदेशों तथा वैध licence, permit या authorisation के तहत इसकी अनुमति न हो। हाईकोर्ट ने इसी कानूनी ढांचे को ध्यान में रखते हुए कोडीन वाली कफ सिरप के मेडिकल इस्तेमाल और उसके कथित नशीले इस्तेमाल के बीच अंतर को रेखांकित किया।

दवा की बोतल से ज्यादा जरूरी होगा उसका उद्देश्य

इस फैसले का सबसे अहम पहलू यही है कि केवल उत्पाद के नाम या उसमें मौजूद कोडीन की मात्रा को देखकर कानूनी स्थिति तय नहीं की जा सकती। मामले के तथ्यों और इस्तेमाल के उद्देश्य की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। अगर जांच में यह सामने आता है कि कफ सिरप को चिकित्सकीय जरूरत के लिए नहीं, बल्कि नशे के लिए खरीदा, जमा किया, बेचा या पहुंचाया जा रहा था, तो आरोपी पर NDPS Act के प्रावधानों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

जमानत मामलों में आया फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन सभी connected bail applications पर साझा निर्णय दिया। अदालत की व्याख्या से यह साफ हुआ कि निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन वाली दवा होने की छूट को हर परिस्थिति में blanket protection नहीं माना जा सकता। फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोडीन आधारित कफ सिरप का मेडिकल इस्तेमाल वैध होने के बावजूद उनके कथित नशीले इस्तेमाल को लेकर कानून की सख्ती बनी हुई है।

क्या है पूरे फैसले का सार?

सीधी भाषा में समझें तो 100 mg तक कोडीन वाली हर कफ सिरप को NDPS Act से पूरी तरह बाहर मान लेना सही नहीं होगा। मेडिकल उद्देश्य और कानूनी शर्तों के तहत इस्तेमाल होने पर निर्धारित छूट मिल सकती है, लेकिन नशे के उद्देश्य से उसके स्टॉक, बिक्री या परिवहन का आरोप हो तो NDPS Act लागू होने का सवाल उठ सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला कोडीन आधारित कफ सिरप के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। दवा का वैध होना और उसका इस्तेमाल वैध उद्देश्य से होना—दोनों अलग-अलग कानूनी सवाल हो सकते हैं।