law-order

Vodafone Idea को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! ₹363 करोड़ की GST मांग फिर से लागू करने से इनकार, गैर-मौजूद कंपनी पर कार्रवाई पर उठाया सवाल

Vodafone Idea को सुप्रीम कोर्ट से ₹363 करोड़ की GST मांग के मामले में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें विलय के बाद अस्तित्व में नहीं रही Vodafone Mobile Services Limited के खिलाफ शुरू की गई GST कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब कंपनी विलय के बाद अस्तित्व में ही नहीं रही, तो उसके खिलाफ कार्यवाही कैसे शुरू की जा सकती है।

Sonali07 सित. 2026, 06:40 PM IST
खबर शेयर करें:
Vodafone Idea को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत! ₹363 करोड़ की GST मांग फिर से लागू करने से इनकार, गैर-मौजूद कंपनी पर कार्रवाई पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने Vodafone Idea के खिलाफ ₹363 करोड़ की GST मांग को दोबारा लागू करने की केंद्र सरकार की कोशिश को झटका दिया है। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस एन विनोद चंद्रन की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र की अपील खारिज कर दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस GST कार्यवाही को रद्द कर दिया था, जो ऐसी कंपनी के खिलाफ शुरू की गई थी जिसका बाद में दूसरी कंपनियों में विलय हो गया था और उसका अलग कानूनी अस्तित्व समाप्त हो चुका था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भी इसी सवाल पर ध्यान केंद्रित किया। कोर्ट ने पूछा कि जब अमलगमेशन यानी विलय के बाद संबंधित कंपनी अस्तित्व में ही नहीं रही, तो उसके खिलाफ कार्यवाही कैसे शुरू की जा सकती है।


क्या है पूरा विवाद?

यह मामला Vodafone Mobile Services Limited के टेलीकॉम टावर कारोबार से जुड़ा है। वर्ष 2017 में Vodafone Mobile Services ने अपने टावर कारोबार को ATC Telecom Infrastructure को ‘going concern’ के तौर पर slump sale के जरिए ट्रांसफर करने का समझौता किया था। इसके बाद अगस्त 2018 में National Company Law Tribunal (NCLT) के आदेश के तहत Vodafone Mobile Services Limited का विलय Vodafone India Limited और Idea Cellular Limited के साथ हो गया। इस विलय की जानकारी GST अधिकारियों को भी दी गई थी। इसके बावजूद अगस्त 2024 में Directorate General of GST Intelligence (DGGI) ने Vodafone Mobile Services Limited को ₹363 करोड़ की GST मांग को लेकर शो-कॉज नोटिस जारी किया।


GST विभाग का क्या था दावा?

विभाग का कहना था कि going concern के तौर पर कारोबार का ट्रांसफर एक exempt supply था। विभाग के मुताबिक इसी आधार पर कंपनी उतनी मात्रा में Input Tax Credit (ITC) का लाभ लेने की हकदार नहीं थी, जितना उसने दावा किया था। इस आधार पर कंपनी से ₹363 करोड़ की GST राशि के साथ-साथ जुर्माने की भी मांग की गई। मामले में जनवरी 2025 में adjudication order भी पारित किया गया। इसके बाद Vodafone Idea ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। कंपनी की ओर से मुख्य आपत्ति यह थी कि जिस Vodafone Mobile Services के खिलाफ GST कार्यवाही शुरू की गई, वह अगस्त 2018 के विलय के बाद स्वतंत्र कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व में ही नहीं रही थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यवाही रद्द कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस एन विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र की अपील खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने गैर-मौजूद हो चुकी कंपनी के खिलाफ कार्यवाही जारी करने के आधार पर सवाल उठाया। इस फैसले के साथ ₹363 करोड़ की संबंधित GST मांग को फिर से लागू करने की केंद्र की कोशिश सफल नहीं हो सकी। मामला Union of India v. Vodafone के नाम से सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। यह फैसला कंपनियों के विलय के बाद कर कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवालों के लिहाज से भी अहम माना जा सकता है। हालांकि, इस आदेश का वास्तविक दायरा मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों तक ही सीमित रहेगा।