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DLF Primus पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच; कोर्ट बोला- ब्रोशर में जो दिखाया, प्रोजेक्ट वैसा ही बनना चाहिए

घर खरीदने वालों को प्रोजेक्ट का ब्रोशर और प्लान दिखाकर जो वादा किया जाता है, बिल्डर को निर्माण उसी के अनुरूप करना होगा। DLF Primus प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए CBI को Preliminary Enquiry आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने गुरुग्राम स्थित प्रोजेक्ट में ब्रोशर में दिखाई गई 24 मीटर चौड़ी सड़क के वास्तविक स्वरूप पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Sonali07 सित. 2026, 06:40 PM IST
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DLF Primus पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच; कोर्ट बोला- ब्रोशर में जो दिखाया, प्रोजेक्ट वैसा ही बनना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के DLF Primus हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) को Preliminary Enquiry (PE) आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। मामला मुख्य रूप से इस सवाल से जुड़ा है कि क्या DLF द्वारा संभावित खरीदारों को ब्रोशर और प्लान में जिस तरह प्रोजेक्ट दिखाया गया था, निर्माण वास्तव में उसी के अनुरूप किया गया। मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि होमबायर्स को ब्रोशर या प्लान के माध्यम से जो प्रतिनिधित्व किया गया है, प्रोजेक्ट का निर्माण और डिलीवरी उसी के अनुरूप होनी चाहिए।


24 मीटर चौड़ी सड़क पर उठे सवाल

मामले में खास विवाद DLF Primus प्रोजेक्ट के बीच से गुजरने वाली 24 मीटर चौड़ी सड़क को लेकर है। मूल ब्रोशर और प्लान में यह सड़क दिखाई गई थी। लेकिन कोर्ट के सामने रखी गई रिपोर्ट और तस्वीरों से प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि सड़क उस रूप में मौजूद नहीं है, जिस तरह उसे मूल योजना में दर्शाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह शुरू से इस बात पर जोर देता रहा है कि उपभोक्ताओं को जिस रूप में प्रोजेक्ट बेचने का प्रतिनिधित्व किया गया था, उसे उसी के अनुरूप बनाया और सौंपा जाना चाहिए।


CBI अधिकारी ने की थी मौके की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की जांच की जिम्मेदारी CBI के IPS अधिकारी सौरभ गुप्ता को सौंपी थी। अधिकारी की 3 अगस्त 2026 की Status Report में बताया गया कि प्रोजेक्ट के भीतर संबंधित सड़क उस रूप में मौजूद नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, जिस हिस्से को सड़क के लिए निर्धारित किया गया था, उसके कुछ हिस्सों का इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जा रहा था, जबकि दूसरे हिस्से को ग्रीन ट्रैक के तौर पर विकसित किया गया था।


कोर्ट ने ब्रोशर और मौजूदा स्थिति की तुलना की

सुप्रीम कोर्ट ने मूल ब्रोशर/प्लान और CBI की रिपोर्ट में शामिल तस्वीरों की तुलना का भी उल्लेख किया। पीठ के अनुसार, दोनों की तुलना करने पर 24 मीटर चौड़ी सड़क के संबंध में गंभीर अंतर नजर आता है। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट को बेचते समय संभावित खरीदारों के सामने रखे गए representations केवल प्रचार सामग्री भर नहीं माने जा सकते। प्रोजेक्ट की वास्तविक डिलीवरी उन वादों और प्रस्तुतियों के अनुरूप होनी चाहिए, जिनके आधार पर उपभोक्ताओं ने खरीद का निर्णय लिया।


अब CBI करेगी Preliminary Enquiry

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मुद्दों की जांच के लिए CBI को Preliminary Enquiry जारी रखने का निर्देश दिया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रोजेक्ट की मूल योजना और बाद में विकसित की गई वास्तविक स्थिति के बीच अंतर क्यों और कैसे आया तथा सड़क के स्वरूप में कोई बदलाव किया गया था या नहीं। यह आदेश उन होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण है जो बिल्डर के ब्रोशर, लेआउट प्लान और अन्य representations के आधार पर घर खरीदते हैं। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि उपभोक्ताओं को किए गए निर्माण संबंधी वादों और वास्तविक प्रोजेक्ट के बीच गंभीर अंतर होने पर अदालतें मामले की जांच कर सकती हैं। हालांकि, CBI की Preliminary Enquiry पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या कंपनी की आपराधिक जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं माना जा सकता। आगे की जांच और अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।