law-order

आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर दिल्ली HC सख्त, करणी सेना के Jantar Mantar प्रदर्शन पर 14 सितंबर तक फैसला करे पुलिस

आरक्षण व्यवस्था और UGC के नियमों के विरोध में Jantar Mantar पर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही क्षत्रिय करणी सेना को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संगठन के नए आवेदन पर 14 सितंबर तक फैसला लेने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने प्रदर्शन की सीधी अनुमति नहीं दी है। पुलिस को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अनुमति देने या इनकार करने का अधिकार रहेगा और अनुमति मिलने की स्थिति में वह प्रदर्शन पर जरूरी शर्तें भी लगा सकती है।

Sonali07 सित. 2026, 06:40 PM IST
खबर शेयर करें:
आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर दिल्ली HC सख्त, करणी सेना के Jantar Mantar प्रदर्शन पर 14 सितंबर तक फैसला करे पुलिस


दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को क्षत्रिय करणी सेना की ओर से Jantar Mantar पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस को समयबद्ध तरीके से फैसला लेने का निर्देश दिया। संगठन आरक्षण नीतियों और University Grants Commission यानी UGC के नियमों के विरोध में 20 सितंबर को प्रदर्शन करना चाहता है। मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने की। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि संगठन की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर 14 सितंबर तक फैसला लिया जाए और लिए गए निर्णय की जानकारी संगठन को भी दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस प्रदर्शन की अनुमति देती है तो वह सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए अपनी शर्तें निर्धारित कर सकती है।


क्या कहा हाईकोर्ट ने?

सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने संगठन को पुलिस के सामने अपना प्रतिनिधित्व रखने को कहा। इसके बाद पुलिस को निर्धारित समय सीमा में उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने साफ किया कि प्रदर्शन की अनुमति अपने-आप नहीं मिल गई है। पुलिस को परिस्थितियों का आकलन करने के बाद निर्णय लेना होगा। साथ ही पुलिस को यह अधिकार रहेगा कि अनुमति देते समय प्रदर्शन के समय, स्थान, लोगों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दों को लेकर उचित शर्तें निर्धारित करे।


6 सितंबर के प्रदर्शन पर क्यों लगी थी रोक?

दरअसल, क्षत्रिय करणी सेना ने पहले 6 सितंबर को Jantar Mantar पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। संगठन के प्रमुख डॉ. राज शेखावत ने इसके लिए 27 अगस्त को दिल्ली पुलिस को लिखित आवेदन दिया था। आवेदन में संगठन ने आश्वासन दिया था कि प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन किया जाएगा और पुलिस की ओर से दिए जाने वाले उचित एवं वैध निर्देशों का पालन किया जाएगा। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने 28 अगस्त को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस की ओर से इसकी वजह उस समय राजधानी में BRICS Summit को लेकर चल रही सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को बताया गया था।


पुलिस ने कहा- Summit के बाद होगा विचार

सोमवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि 6 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति BRICS Summit के कारण नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि Summit समाप्त होने के बाद संगठन के अनुरोध पर पुलिस विचार करेगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को समयबद्ध तरीके से निपटाने का रास्ता साफ किया और पुलिस को 14 सितंबर तक फैसला लेने का निर्देश दिया।


20 सितंबर को प्रस्तावित है प्रदर्शन

अब करणी सेना 20 सितंबर को Jantar Mantar पर प्रदर्शन करना चाहती है। संगठन का मुख्य मुद्दा आरक्षण नीतियों और UGC के नियमों का विरोध बताया गया है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब दिल्ली पुलिस को 14 सितंबर तक संगठन को अपने फैसले से अवगत कराना होगा। यदि पुलिस अनुमति देती है तो प्रदर्शन किन शर्तों के साथ होगा, यह भी उसी दौरान स्पष्ट हो सकता है।


कैसे पहुंचा मामला हाईकोर्ट?

पुलिस द्वारा 6 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति खारिज किए जाने के बाद क्षत्रिय करणी सेना के प्रमुख डॉ. राज शेखावत ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में पुलिस के फैसले को चुनौती देते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल सीधे तौर पर प्रदर्शन की अनुमति देने के बजाय पुलिस को संगठन के नए प्रतिनिधित्व पर निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश का अहम पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने पुलिस के प्रशासनिक अधिकार को बरकरार रखते हुए निर्णय लेने की समयसीमा तय कर दी है। यानी अब पुलिस अनिश्चितकाल तक आवेदन लंबित नहीं रख सकती। उसे 14 सितंबर तक अपना फैसला बताना होगा। अब 20 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अगला बड़ा फैसला दिल्ली पुलिस के हाथ में है। अनुमति मिलती है तो प्रदर्शन किन शर्तों के साथ होगा और सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहेगी, यह 14 सितंबर के फैसले के बाद साफ होगा।