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Iran-US Tension का असर, शेयर बाजार में गिरावट; IT Stocks पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को फिर गिरावट देखने को मिली। Sensex 383 अंक गिरकर 76,132 और Nifty करीब 120 अंक टूटकर 23,779 पर बंद हुआ। IT Stocks में बिकवाली, Crude Oil की बढ़ती कीमतों, Iran-US तनाव और Foreign Investors की बिकवाली ने बाजार sentiment पर दबाव डाला।

Neha Sharma07 सित. 2026, 06:40 PM IST
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Iran-US Tension का असर, शेयर बाजार में गिरावट; IT Stocks पर दबाव

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 7 सितंबर 2026 को एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला। कारोबार के दौरान Sensex करीब 545 अंक तक फिसला, जबकि Nifty भी 23,800 के स्तर से नीचे चला गया। कारोबार के अंत में BSE Sensex 382.62 अंक यानी करीब 0.50% गिरकर 76,132.81 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 119.55 अंक यानी करीब 0.50% की गिरावट रही और यह 23,779.15 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ दोनों प्रमुख सूचकांक करीब छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए।


IT Stocks में सबसे ज्यादा दबाव

सोमवार की गिरावट में IT शेयरों की बड़ी भूमिका रही। अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ी कि अमेरिकी Federal Reserve सितंबर में ब्याज दरों में कटौती के बजाय सख्त रुख अपना सकता है। इसका असर भारतीय IT कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, क्योंकि इन कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है। ऊंची ब्याज दरों के चलते अमेरिकी कंपनियां Technology और IT Services पर खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो सकती हैं। दोपहर के कारोबार में Nifty IT Index करीब 2.3% तक नीचे गया। Infosys, TCS, HCLTech और Tech Mahindra जैसे प्रमुख IT शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।


कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव Crude Oil Prices का रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Brent crude करीब $96-$97 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर देश के Import Bill, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने Oil Prices की दिशा को लेकर सावधानी बरती।


Iran-US तनाव का भी बाजार पर असर

पश्चिम एशिया में Iran-US tensions बढ़ने से तेल की Supply को लेकर चिंता बढ़ी है। खास तौर पर Strait of Hormuz से तेल और अन्य commodities की आवाजाही पर नजर बनी हुई है। अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil की कीमतों पर और दबाव आ सकता है। भारत जैसे Oil-importing देश के लिए यह चिंता का विषय है और इसका असर शेयर बाजार की Investor Sentiment पर भी पड़ता है।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

बाजार में Foreign Institutional Investors यानी FIIs की बिकवाली भी चिंता का कारण बनी हुई है। सोमवार को FIIs ने भारतीय शेयरों में करीब ₹3,111.94 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जबकि Domestic Institutional Investors यानी DIIs ने करीब ₹8,930.12 करोड़ का निवेश किया। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन विदेशी बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के दबाव को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका।


कई सेक्टर्स में गिरावट

सोमवार को कमजोरी केवल IT सेक्टर तक सीमित नहीं रही। IT के अलावा Metal, PSU Bank और Media Stocks पर भी दबाव देखा गया। Reuters के अनुसार प्रमुख सेक्टर्स में से 16 में से 14 में गिरावट रही। Nifty IT Index में करीब 2.3% की गिरावट दर्ज की गई। Midcap Stocks भी दबाव में रहे। दूसरी ओर कुछ Defence और Financial Stocks में खरीदारी देखने को मिली।


IPO Market भी बना अहम फैक्टर

सितंबर में IPO गतिविधियां भी तेज हैं। नए IPO में पैसा लगाने के कारण Secondary Market में उपलब्ध Liquidity पर भी असर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस समय निवेशकों का एक हिस्सा नए IPOs की ओर आकर्षित है, जिससे मौजूदा शेयरों में खरीदारी का दबाव कुछ कम हो सकता है।


आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर?

अब निवेशकों की नजर मुख्य रूप से चार बड़े संकेतकों पर रहेगी—Crude Oil Prices, Middle East Geopolitical Developments, US Federal Reserve की September Policy और Foreign Investor Flows। इसके अलावा आने वाले अमेरिकी महंगाई और आर्थिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहेंगे। मजबूत अमेरिकी Economic Data से अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और कमजोर होती है, तो Emerging Markets पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल भारतीय बाजार के Domestic Economic Fundamentals को लेकर तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं है, लेकिन Global Risks ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में बाजार में आने वाले दिनों में Volatility बनी रहने की संभावना है।