business
रुपये को सहारा देने उतरा RBI, Forex Market में बढ़ाई Dollar Selling
रुपये में कमजोरी के बीच Reserve Bank of India (RBI) ने Forex Market में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पिछले हफ्ते रुपये को सहारा देने के लिए कम से कम $8 Billion की डॉलर बिक्री की। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मजबूत Forex Reserves और हालिया Dollar Inflows से RBI को रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने में मदद मिल रही है।

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में लगातार बनी कमजोरी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह RBI ने रुपये को सहारा देने के लिए कम से कम 8 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बिक्री की। कुछ बैंकरों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक की कुल डॉलर बिक्री 8 से 15 अरब डॉलर के बीच रही हो सकती है। हालांकि, RBI ने इस अनुमान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस हस्तक्षेप का असर रुपये की चाल पर भी दिखाई दिया। 3 सितंबर को रुपया 94.2850 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो करीब दो महीने का उच्च स्तर था। सोमवार, 7 सितंबर को भी बाजार में RBI की मौजूदगी के बीच रुपया करीब 94.4850 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
RBI ने क्यों बढ़ाई Forex Market में दखल?
रुपये पर पिछले कुछ समय से कई बाहरी दबाव बने हुए हैं। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और डॉलर की मांग प्रमुख हैं। सोमवार को Brent crude करीब $96.6 प्रति बैरल के आसपास रहा। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए महंगा तेल रुपये और देश के Import Bill दोनों पर दबाव डाल सकता है।
RBI डॉलर बेचकर रुपये को कैसे सहारा देता है?
जब बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर गिरावट का दबाव आता है, तब RBI विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेच सकता है। इससे बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिलती है।हालिया मामले में भी सरकारी बैंकों के जरिए लगातार डॉलर बिक्री देखे जाने की बात बैंकरों ने कही है। बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि ये बिक्री RBI की ओर से की जा रही है। हालांकि, RBI का उद्देश्य किसी एक निश्चित स्तर पर रुपये को स्थायी रूप से रोकना नहीं, बल्कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना होता है।
RBI के पास मजबूत Forex Reserve
RBI के पास फिलहाल रुपये को सपोर्ट देने के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। 21 अगस्त 2026 तक भारत का Forex Reserve रिकॉर्ड $740.8 अरब था। J.P. Morgan के अनुमान के मुताबिक इसके बाद यह आंकड़ा $750 अरब से ऊपर जा चुका हो सकता है। यही मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति RBI को जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचने की क्षमता देती है। हालिया बड़े डॉलर inflows ने भी केंद्रीय बैंक के लिए intervention की गुंजाइश बढ़ाई है।
$136 Billion से ज्यादा का Dollar Inflow
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की कुछ हालिया नीतिगत सुविधाओं के चलते देश में $136 अरब से ज्यादा के डॉलर inflows आए हैं। इनमें सरकारी कंपनियों और बैंकों की overseas borrowing के लिए discounted hedging facility और बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए उपलब्ध कराई गई no-cost hedging facility शामिल हैं। इन डॉलर inflows ने RBI को विदेशी मुद्रा बाजार में अपेक्षाकृत बड़े स्तर पर हस्तक्षेप करने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश दी है।
रुपये की Liquidity पर भी पड़ता है असर
RBI जब बाजार में डॉलर बेचता है तो इसके साथ रुपये की liquidity भी प्रभावित होती है। ऐसे समय में बैंकिंग सिस्टम से रुपये की अतिरिक्त liquidity बाहर निकल सकती है। यह पहल ऐसे समय हुई है जब भारतीय बैंकिंग सिस्टम में liquidity काफी अधिक थी। 7 सितंबर को RBI ने बैंकिंग सिस्टम से ₹6.12 लाख करोड़ से ज्यादा की liquidity absorb की। केंद्रीय बैंक ने overnight और 30-day operations के जरिए अतिरिक्त नकदी को सोखने की कोशिश की। इससे साफ है कि RBI इस समय सिर्फ रुपये की exchange-rate stability ही नहीं, बल्कि banking-system liquidity को भी संतुलित करने पर ध्यान दे रहा है।
क्या रुपया लगातार मजबूत होगा?
हालिया मजबूती के बावजूद विशेषज्ञ इसे रुपये में लंबी अवधि की तेज appreciation की शुरुआत मानने से बच रहे हैं। रुपये ने मई के करीब 96.96 प्रति डॉलर के निचले स्तर से वापसी की है, लेकिन Goldman Sachs का अनुमान है कि मध्यम अवधि में रुपया एक सीमित दायरे में रह सकता है। मजबूत external balances रुपये को सहारा दे सकते हैं, लेकिन इससे लंबे समय तक लगातार मजबूती की गारंटी नहीं मिलती।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले दिनों में रुपये और Forex Market की दिशा मुख्य रूप से Crude Oil Prices, US Federal Reserve की नीति, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, Foreign Capital Flows और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से प्रभावित हो सकती है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारत के Import Bill पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, अगर वैश्विक निवेशक डॉलर की ओर ज्यादा रुख करते हैं, तो उभरते बाजारों की currencies पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में RBI की Forex intervention policy रुपये की स्थिरता के लिए अहम बनी रहेगी। फिलहाल केंद्रीय बैंक के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और हालिया डॉलर inflows की वजह से बाजार में हस्तक्षेप करने की पर्याप्त क्षमता दिखाई दे रही है।
