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वकील और परिवार ने SC/ST Act के मामलों में लिए ₹23 लाख से ज्यादा, इलाहाबाद HC ने पूरे UP में जांच के दिए आदेश
SC/ST Act की राहत राशि के बार-बार दावों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक अधिवक्ता और उसके परिवार को अलग-अलग मामलों में ₹23.36 लाख से ज्यादा मिलने का मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने यूपी सरकार को पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि बार-बार राहत का दावा करना अकेले ‘दुरुपयोग’ साबित नहीं करता।

प्रयागराज:
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मिलने वाली राहत राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को पूरे प्रदेश में जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने खास तौर पर उन मामलों की जांच करने को कहा है, जहां एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य अलग-अलग आपराधिक मामलों में बार-बार राहत अथवा वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे हैं। न्यायमूर्ति संतोष राय की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पेशे से अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को विभिन्न आपराधिक मामलों में कुल मिलाकर ₹23,36,250 की राहत/वित्तीय सहायता मिलने की बात सामने आई। कोर्ट को यह भी बताया गया कि इसी व्यक्ति अथवा उसके परिवार से जुड़े लगभग 10 से 12 अन्य मामले ऐसे हैं, जिनमें राहत राशि के दावे संबंधित जिला स्तरीय समिति के समक्ष अभी लंबित हैं।
कैसे सामने आया मामला?
सुनवाई के दौरान कोर्ट का ध्यान इस तथ्य की ओर गया कि एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग-अलग आपराधिक मामलों में SC/ST Act के तहत मिलने वाली राहत का बार-बार दावा किया गया। इसके बाद पीठ ने इस पूरी व्यवस्था की जांच की जरूरत महसूस की। हालांकि, हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण सावधानी बरतते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति या परिवार द्वारा बार-बार राहत का दावा किया जाना अपने आप में योजना या कानून के दुरुपयोग का प्रमाण नहीं है। अदालत ने कहा कि केवल बार-बार आपराधिक मामले दर्ज होना या राहत का दावा किया जाना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच जरूरी है।
पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत राहत एवं वित्तीय सहायता के दावों और उनके भुगतान की प्रक्रिया की जांच की जाए। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि कहीं ऐसे मामलों में नियमों का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा, जहां एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा लगातार अलग-अलग मामलों में सरकारी राहत प्राप्त की जा रही है। कोर्ट ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पात्र पीड़ितों को कानून के तहत मिलने वाली सहायता में किसी प्रकार की बाधा न आए और साथ ही अपात्र या गलत दावों की पहचान की जा सके।
₹23.36 लाख की राहत पर कोर्ट की नजर
पीठ ने विशेष रूप से संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को मिली कुल ₹23,36,250 की राशि का उल्लेख किया। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी आया कि करीब 10-12 और मामलों में राहत के दावे जिला स्तरीय समिति के सामने लंबित हैं। इसी पैटर्न को देखते हुए अदालत ने व्यापक स्तर पर जांच का निर्देश देना उचित समझा। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति या परिवार ने निश्चित रूप से कानून का दुरुपयोग किया है। जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि राहत के दावे नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
SC/ST Act के तहत राहत क्यों मिलती है?
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अत्याचार और भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करना है। कानून और इसके तहत बनाए गए नियमों में कुछ परिस्थितियों में पीड़ितों तथा उनके आश्रितों को राहत और वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट का जोर इस बात पर है कि सरकारी राहत वास्तविक पीड़ितों तक पहुंचे, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि व्यवस्था का अनावश्यक या अनुचित लाभ न उठाया जाए।
कोर्ट का संतुलित रुख
इस मामले में हाईकोर्ट ने एक ओर सरकारी राहत व्यवस्था की निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर केवल बार-बार दावे के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी मानने से भी इनकार किया। अदालत का यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि SC/ST Act के तहत मिलने वाली राहत सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से है। इसलिए किसी भी जांच में वास्तविक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और गलत दावों की पहचान—दोनों के बीच संतुलन जरूरी होगा।
कब और किसने दिया आदेश?
यह निर्देश 7 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति संतोष राय की पीठ द्वारा पारित आदेश में दिया गया। मामला SC/ST Act के तहत राहत राशि के बार-बार किए जा रहे दावों से संबंधित था। कोर्ट के सामने ₹23,36,250 की कुल राहत और करीब 10-12 लंबित दावों का तथ्य आने के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में जांच का निर्देश दिया गया।
