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RTI में सीधे नहीं मिलेगी Section 8(1)(g) के दायरे वाली CCTV फुटेज, कोर्ट या आयोग से मांग सकते हैं: इलाहाबाद HC

RTI के जरिए CCTV फुटेज मांगने वालों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम कानूनी रास्ता बताया है। कोर्ट ने कहा कि Section 8(1)(g) के तहत संरक्षित CCTV फुटेज सीधे RTI आवेदक को नहीं दी जा सकती, लेकिन वह कोर्ट या आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है। जरूरत पड़ने पर कोर्ट फुटेज मंगाने और उसे सुरक्षित रखने का आदेश दे सकता है।

Sonali08 सित. 2026, 07:43 PM IST
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RTI में सीधे नहीं मिलेगी Section 8(1)(g) के दायरे वाली CCTV फुटेज, कोर्ट या आयोग से मांग सकते हैं: इलाहाबाद HC

प्रयागराज: 

सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत CCTV फुटेज मांगने वालों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगी गई CCTV फुटेज सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(g) में दी गई अपवाद की श्रेणी में आती है, तो उसे सीधे RTI आवेदक को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति के पास फुटेज हासिल करने का कोई रास्ता नहीं है। आवेदक संबंधित कोर्ट या आयोग के समक्ष शिकायत अथवा उचित कार्यवाही शुरू कर सकता है। ऐसी स्थिति में कोर्ट या आयोग जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज को मंगाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित रखने यानी preserve करने का निर्देश भी दे सकता है। यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने सुनाया।

क्या है मामला?

मामला एक RTI आवेदक द्वारा CCTV फुटेज हासिल करने की मांग से जुड़ा था। आवेदक ने RTI Act के तहत संबंधित CCTV रिकॉर्ड मांगा था। लेकिन सूचना को धारा 8(1)(g) के तहत अपवाद में आने वाला मानते हुए सीधे उपलब्ध कराने से इनकार किया गया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या RTI Act के तहत ऐसा CCTV रिकॉर्ड सीधे आवेदक को दिया जा सकता है, जब वह धारा 8(1)(g) के तहत संरक्षित सूचना की श्रेणी में आता हो।

Section 8(1)(g) क्यों महत्वपूर्ण है?

RTI Act की धारा 8 में ऐसी सूचनाओं की कुछ श्रेणियां बताई गई हैं जिन्हें सार्वजनिक प्राधिकरण सामान्य रूप से देने से मना कर सकता है। धारा 8(1)(g) ऐसी सूचना से संबंधित है, जिसके प्रकटीकरण से किसी व्यक्ति की जान या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है या कानून लागू करने अथवा सुरक्षा के उद्देश्य से गोपनीय रूप से दी गई जानकारी के स्रोत की पहचान हो सकती है। हाईकोर्ट ने इसी प्रावधान को ध्यान में रखते हुए कहा कि यदि CCTV फुटेज इस अपवाद के दायरे में आती है तो उसे RTI के जरिए सीधे आवेदक को उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं माना जा सकता।

फिर CCTV फुटेज कैसे मिल सकती है?

हाईकोर्ट ने RTI आवेदक के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ता भी स्पष्ट किया है। अदालत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि CCTV फुटेज किसी घटना या विवाद के लिए महत्वपूर्ण है, तो वह संबंधित कोर्ट या सक्षम आयोग के समक्ष शिकायत या उचित कार्यवाही कर सकता है। ऐसी कार्यवाही के दौरान कोर्ट या आयोग अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित CCTV फुटेज को मंगवा सकता है। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया जा सकता है, ताकि महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट या overwrite न हो जाए।

RTI और न्यायिक प्रक्रिया में अंतर

फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने RTI के माध्यम से सूचना हासिल करने और न्यायिक कार्यवाही में साक्ष्य हासिल करने के बीच अंतर स्पष्ट किया है। RTI Act के तहत सूचना मांगने की प्रक्रिया अपने आप में किसी व्यक्ति को ऐसी सूचना उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं देती, जो कानून में स्पष्ट रूप से अपवाद के दायरे में रखी गई हो। लेकिन यदि वही सामग्री किसी विवाद या आपराधिक/न्यायिक कार्यवाही के लिए जरूरी हो, तो संबंधित कोर्ट या आयोग अपनी प्रक्रिया के तहत उसे मंगाने और सुरक्षित रखने का आदेश दे सकता है।

कोर्ट का अहम संदेश

हाईकोर्ट का यह फैसला CCTV फुटेज से जुड़े RTI मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अदालत ने एक तरफ संवेदनशील जानकारी को RTI के अपवादों के तहत सुरक्षा दी, वहीं दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित किया कि महत्वपूर्ण साक्ष्य तक पहुंच का रास्ता पूरी तरह बंद न हो। यानी RTI के जरिए सीधे CCTV फुटेज न मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसे कभी हासिल नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर कोर्ट या आयोग के जरिए फुटेज मंगाई और सुरक्षित कराई जा सकती है।

कब और किसने दिया फैसला?

यह आदेश 8 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने पारित किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी ने की। कोर्ट ने RTI Act, 2005 की धारा 8(1)(g) के तहत CCTV फुटेज की उपलब्धता और उसके संरक्षण से जुड़े सवाल पर यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी।