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Ad Hoc शिक्षकों को बर्खास्तगी से पहले Board की मंजूरी जरूरी नहीं: इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के एडहॉक शिक्षकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि धारा 21 के तहत सेवा समाप्ति से पहले Board की मंजूरी वाली सुरक्षा एडहॉक शिक्षकों को नहीं मिलेगी। यह संरक्षण नियमित या नियमितीकृत शिक्षकों के लिए है, जिनकी नियुक्ति बोर्ड की सिफारिश पर हुई हो

प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा संस्थानों में कार्यरत एडहॉक शिक्षकों की सेवा समाप्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग एवं चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 21 के तहत मिलने वाली सुरक्षा एडहॉक आधार पर नियुक्त शिक्षक को उपलब्ध नहीं है।
अदालत ने कहा कि धारा 21 के तहत किसी शिक्षक की सेवा समाप्त करने से पहले बोर्ड की पूर्व अनुमति लेने की शर्त उन शिक्षकों के पक्ष में लागू होती है, जिनकी नियुक्ति बोर्ड की सिफारिश पर नियमित रूप से हुई है या जिन्हें बाद में नियमित किया जा चुका है। इसका मतलब है कि केवल एडहॉक आधार पर नियुक्त शिक्षक अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ धारा 21 में दी गई पूर्व स्वीकृति की सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।
क्या है पूरा मामला?
मामला उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा संस्थान में एडहॉक आधार पर नियुक्त शिक्षक की सेवा से जुड़ा था। शिक्षक की ओर से अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए यह तर्क रखा गया कि धारा 21 के तहत उनकी सेवा समाप्त करने से पहले संबंधित बोर्ड की पूर्व मंजूरी लेना आवश्यक था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को यह तय करना था कि क्या धारा 21 में दी गई सुरक्षा का लाभ एडहॉक शिक्षक को भी दिया जा सकता है। कोर्ट ने कानून की व्यवस्था और शिक्षक की नियुक्ति की प्रकृति को देखते हुए इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
धारा 21 में क्या सुरक्षा है?
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग एवं चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 21 शिक्षकों की सेवा समाप्ति से संबंधित सुरक्षा प्रदान करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमित रूप से नियुक्त शिक्षकों को मनमाने तरीके से सेवा से न हटाया जाए। लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा हर प्रकार की नियुक्ति पर स्वतः लागू नहीं होती। अदालत के मुताबिक, धारा 21 का संरक्षण मुख्य रूप से उन शिक्षकों के लिए है जिनकी नियुक्ति निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत बोर्ड की सिफारिश पर हुई है। इसी तरह, नियमित किए जा चुके शिक्षकों को भी इस सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। इसके विपरीत, एडहॉक नियुक्ति की प्रकृति ही अस्थायी होती है। इसलिए ऐसे शिक्षक को नियमित शिक्षक के समान वैधानिक सुरक्षा नहीं दी जा सकती।
एडहॉक और नियमित शिक्षक में अंतर
हाईकोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू नियुक्ति की प्रकृति है। नियमित शिक्षक की नियुक्ति वैधानिक चयन प्रक्रिया के माध्यम से होती है, जबकि एडहॉक नियुक्ति सामान्यतः तत्काल आवश्यकता या अस्थायी व्यवस्था के लिए की जाती है। इसलिए केवल किसी संस्थान में शिक्षक के रूप में काम करने से एडहॉक कर्मचारी को नियमित शिक्षक के समान सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाते। कोर्ट ने इसी अंतर के आधार पर कहा कि धारा 21 के तहत पूर्व स्वीकृति की अनिवार्यता को एडहॉक शिक्षकों तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।
किस बेंच ने दिया फैसला?
यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने की। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग एवं चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 21 की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि सेवा समाप्ति से पहले बोर्ड की मंजूरी वाली सुरक्षा का दायरा सीमित है।
फैसले का असर
इस फैसले से उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा संस्थानों में एडहॉक आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा समाप्ति से जुड़े मामलों पर असर पड़ सकता है। अब केवल एडहॉक नियुक्ति के आधार पर कोई शिक्षक धारा 21 के तहत बोर्ड की पूर्व मंजूरी की मांग नहीं कर सकेगा। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि एडहॉक शिक्षक की सेवा किसी भी परिस्थिति में मनमाने तरीके से समाप्त की जा सकती है। सेवा समाप्ति के मामले में नियुक्ति की शर्तों, संबंधित नियमों और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की स्थिति अलग-अलग देखी जा सकती है।
कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?
हाईकोर्ट ने मूल रूप से यह अंतर स्पष्ट किया कि धारा 21 की सुरक्षा नियुक्ति के पद या केवल शिक्षक के रूप में काम करने पर नहीं, बल्कि नियुक्ति की वैधानिक प्रकृति से जुड़ी है। नियमित नियुक्ति या नियमितीकरण प्राप्त शिक्षक को जहां बोर्ड की पूर्व स्वीकृति जैसी वैधानिक सुरक्षा मिल सकती है, वहीं एडहॉक शिक्षक इस प्रावधान का लाभ केवल अपनी अस्थायी नियुक्ति के आधार पर नहीं ले सकता।
